मेरी प्यारी हिन्दी
मेरी प्यारी हिन्दी हिंदी भाषा का गुणगान कैसे करूं,हिंदी भाषा का बखान कैसे करूं।अपरिभाषित है मेरी हिंदी भाषा,परिभाषा ही नहीं परिभाषित कैसे करूं।। सबको मान व सम्मान हिंदी देती है,अपना नया रूप एक छोटी सी बिंदी देती है।हलन्त, पदेन, रेफ का महत्व होता है,गद्य पद्य के रूप नए-नए शब्द गढ़ देती है।। हिंदी अपनी सीमा…










