• मेरी प्यारी हिन्दी

    मेरी प्यारी हिन्दी हिंदी भाषा का गुणगान कैसे करूं,हिंदी भाषा का बखान कैसे करूं।अपरिभाषित है मेरी हिंदी भाषा,परिभाषा ही नहीं परिभाषित कैसे करूं।। सबको मान व सम्मान हिंदी देती है,अपना नया रूप एक छोटी सी बिंदी देती है।हलन्त, पदेन, रेफ का महत्व होता है,गद्य पद्य के रूप नए-नए शब्द गढ़ देती है।। हिंदी अपनी सीमा…

  • जग से निराला लगे,

    जग से निराला लगे रूप घनाक्षरीमनमीत-8,8,8,8चरणांत -21 जग से निराला लगे,सबसे ही प्यारा लगे,छेड़े जब प्रेम धुन,वह राग मनमीत । मुख आभा लगे ऐसी,पूनम के चाॅ॑द जैसी,मुख शोभित लालिमा,ज्यों रजनी चाॅ॑दप्रीत । दीप उजियार करे,घर की है शोभा बढ़े,दमक रहे जुगनू,ऐसे लगे नैन जीत । अजब सी लीला देखो,प्रेम रस जरा चखो,कहे फिर सारा जग,है…

  • चोरी कर के लिखता हूँ मैं

    चोरी कर के लिखता हूँ मैं क्या लूटा है मैंने बतला, झूठे क़िस्से गढ़ा ना करजन्मजात दौलत वाला हूँ, तौहमत यूँ ही मढ़ा ना कर भूखा-नंगा था ये कह कर, मियां बेइज्जती करता क्योंतू भी रंग जा मेरे रँग में, तिल का ताड़ बड़ा ना कर पहले ही से मैं बेचारा, मुश्किलात में घिरा हुआज़ख़्मों…

  • तिरंगा काव्य मंच : कवि सम्मेलन और मुशायरे की विस्तृत रिपोर्ट/प्रतिवेदन

    तिरंगा काव्य मंच के 54वें ऑन लाइन मासिक कवि सम्मेलन और मुशायरे का संयुक्त आयोजन वरिष्ठ साहित्यकार /संपादक डॉ कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड और वरिष्ठ मशहूर शायर विनय सागर जायसवाल,बरेली की अध्यक्षता में किया गया महेन्द्र सिंह प्रखर और अमिता गुप्ता के संचालन में सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ चंचल हरेंद्र वशिष्ट द्वारा…

  • देख लो तुम भी आईना फिर से

    देख लो तुम भी आईना फिर से देख लो तुम भी आईना फिर सेलौट ये पल न पायेगा फिर से चाहते क्या होके जुदा फिर सेबन न पाओगे तुम खुदा फिर से मुझको होना नहीं फ़ना फिर सेरात दिन माँगता दुआ फिर से यूँ न निकलो सँवर के तुम बाहरहो न जाये कहीं खता फिर…

  • ऐ सर्द हवा

    ऐ सर्द हवा ऐ सर्द हवा का झोंका,अब तो,शांत हो जा,तू भी कहीं जाकर और आराम से सो जा।। जग को क्यों इतना परेशान कर रहा है,काहे जग के लिए तू शैतान बन रहा है।। बूढ़े, बच्चे सब तो परेशान हो गए हैं,बताओ, आप किसकी सुध में खो गए हैं।। पेड़ पौधे भी तो अब…

  • हमने तो सारे दाँव जवानी पे रख दिये

    हमने तो सारे दाँव जवानी पे रख दिये राजा पे रख दिए न तो रानी पे रख दियेहमने तो सारे दाँव जवानी पे रख दिये सागर, शराब, जाम कसौटी पे रख दियेउसने हिज़ाब जब मेरी मर्ज़ी पे रख दिये मय-ख़्वार जब शराब से तौबा न कर सकाइल्ज़ाम मयकशी के उदासी पे रख दिये सादा मिज़ाजी…

  • एक चने ने

    एक चने ने मेरे आँगन नित्य सवेरे बुलबुल आती एकसच्च बोलो-सच बोलो की मधुर लगाती टेक मधुर लगाकर टेक मुझे हैरान करेकैसी खोटी बातें ये नादान करे झूठा और बेईमान भला सच कैसे बोलेज़हर बेचने वाला अमृत कैसे तौले मूरख पंछी मुझको कैसी सीख दे रहानहीं चाहिए बिन मांगे क्यों भीख दे रहा तेरी मीठी…

  • नव ऊर्जा का उत्सव

    नव ऊर्जा का उत्सव युवाओं का यह दिन अनमोल,बनाता है हर सपने को गोल।जोश, जुनून, और हौसलों का संग,युवाओं के दम पर बढ़ता ये रंग। देश की ताकत, नई उमंग,युवाओं में दिखता हर तरंग।ज्ञान की गंगा, साहस की धारा,युवा ही तो हैं भारत का सहारा। स्वामी विवेकानंद के शब्दों का असर,युवाओं में जलता है प्रेरणा…

  • मेरी परवरिश का असर देखते हैं

    मेरी परवरिश का असर देखते हैं मेरी परवरिश का असर देखते हैंवो घर को मेरे इस कदर देखते हैं किताबों में जिनका असर देखते हैंकभी भी नहीं उनका घर देखते हैं पलट वार हमने किया ही कहाँ कबअभी तक तो उनका हुनर देखते हैं मिलेगी न हमको यहां मौत ऐसेचलो साँस को बेचकर देखते हैं…