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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Pehchan
    कविताएँ

    पहचान | Kavita

    ByAdmin June 28, 2021June 28, 2021

    पहचान ( Pehchan )   प्रेम के मोती लुटाओ प्रतिभा कोई दिखाओ पहचान  जग  में  कोई  नई  बनाईए सफलता मिल सके पर्वत भी हिंल सके जंग  भरी  दुनिया  में  हौसला  बनाइए लगन से मेहनत रंग जरूर लाएगी पहचान जग में आप ऐसी बनाईए पूर्वजों की साख में चार चांद लग जाए कर्म  पथ  पर  अपनी …

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  • पहली बारिश
    कविताएँ

    पहली बारिश | Kavita

    ByAdmin June 28, 2021

    पहली बारिश   ( Pehli Baarish )   बचपन की यादों को समेट रही हूं पहली बारिश की यादे सहेज रही हूं बारिश का पानी सखी सहेली कागज की नाव छपाक सी मस्ती बेफिक्र ज़माना वक्त सुहाना हौले हौले से सपने भीग जाना पिता की मुस्कान मां को चिंता पहली बारिश का अहसास अनोखा ना…

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  • कुछ अनकही बातें
    कविताएँ

    कुछ अनकही बातें | Kuch Ankahee  Baatein

    ByAdmin June 28, 2021June 28, 2021

    कुछ अनकही बातें (Kuch Ankahee  Baatein )   कुछ अनकही बातें, कुछ पुरानी यादें कहां से आती हैं कहां चली जाती हैं कुछ नही समझ आता क्या होता हैं कभी कभी। कुछ अनजान रास्ते और अनजान राहे जाना कहां हैं समझ नही आता बीच राह मैं खड़े खड़े मन बड़ा घबराता रास्ते पर खड़े खड़े…

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  • बहुत समझाया, बहुत मनाया
    शेरो-शायरी

    बहुत समझाया बहुत मनाया | Suneet Sood Grover Shayari

    ByAdmin June 26, 2021February 7, 2023

    बहुत समझाया, बहुत मनाया ( Bahot Samjhaya Bahot Manaya )   बहुत समझाया, बहुत मनाया डराया भी ,धमकाया भी वक़्त की नज़ाकत समझो फासलों को नजदीकियां… पर वे तो ऐसे थे एक हुए बगावत के सुर बोल रहे एक एक करते थे जुट हुए धरने पर वो जैसे  बैठे हुए … अशआर कभी कोई नज़्म…

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  • पानी  थोड़ा  कम  है
    कविताएँ

    पानी थोड़ा कम है | Poem Pani Thoda Kam hai

    ByAdmin June 21, 2021February 7, 2023

    पानी थोड़ा कम है ( Pani thoda kam hai )     उम्मीदों  के  भरे  कलश  में, पानी  थोड़ा  कम  है।   भरते  भरते  जीवन  बीता,  फिर भी थोड़ा कम है।   पाने  की  चाहत  में  तुमको,  बीता  ये  जीवन  है।   फिर भी तृष्णा कम ना हुई, लगता है थोडा कम है।   कवि : …

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  • कभी अपनों ने ही समझा नहीं है
    शेरो-शायरी

    कभी अपनों ने ही समझा नहीं है | Udasi Bhari Shayari

    ByAdmin June 20, 2021June 20, 2021

    कभी अपनों ने ही समझा नहीं है ( Kabhi apno ne hi samjha nahin hai )   कभी अपनों ने ही समझा नहीं है ! दिल उनसे इसलिए अब मिलता नहीं है   गली में इसलिए छाया अंधेरा कभी तक चाँद वो  निकला नहीं है   मुहब्बत की क्या होती गुफ़्तगू फ़िर कभी वो  पास…

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  • दीप जलाने होंगे
    कविताएँ

    दीप जलाने होंगे | Kavita

    ByAdmin June 20, 2021

    दीप जलाने होंगे ( Deep jalane honge )   दीप  जलाने  होंगे  जोत जलानी होगी शारदे दरबार तेरे अलख जगानी होगी   सिर पर रख दो हाथ मां भर दो भंडार मां शब्द सुमनहार मैया कर लो स्वीकार मां   वीणा वरदायिनी मोहक सुभाषिनी बुद्धि विधाता वाणी मां प्रज्ञादायिनी   लेखनी में भाव भर शब्द…

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  • कड़ी कड़ी कर जुड़ी जो
    शेरो-शायरी

    कड़ी कड़ी कर जुड़ी जो | Suneet Sood Grover Shayari

    ByAdmin June 20, 2021

    कड़ी कड़ी कर जुड़ी जो ( Kadi kadi kar judi jo )   कड़ी कड़ी कर जुड़ी जो जंजीर ,बेड़ियां हो गईं पांव जख्मी, हाथ रिसते … सोने का पिंजरा सा नशेमन तेरा जज्ब हुई यूं, कि दिल छलनी हुआ तू सय्याद, तेरा इश्क कातिल… सौ आसमां औ’ हवा खुली  दम भरने को अब खोल…

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  • महारानी लक्ष्मी बाई
    कविताएँ

    महारानी लक्ष्मी बाई | Maharani Laxmi Bai Par Kavita

    ByAdmin June 19, 2021June 20, 2021

    महारानी लक्ष्मी बाई ( Maharani Laxmi Bai )   आजादी की चिंगारी थी बैरियों पर भारी थी गोरों के छक्के छुड़ाए लक्ष्मी वीर नारी थी   तेज था तलवारों में ओज भरा हूंकारों में रणचंडी पराक्रमी हजारों पर भारी थी   क्रांति काल की कहानी वो झांसी की महारानी बिगुल बजाया रण का राष्ट्र पुजारी…

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  • मेरा बचपन
    कविताएँ

    मेरा बचपन | Poetry On Bachpan

    ByAdmin June 18, 2021

    मेरा बचपन ( Mera bachpan)   वो रह रह कर क्यों याद आता है मुझे वो मेरा बचपन जो शायद भूल मुझे कहीं खो गया है दूर वो मेरा बचपन… वो पापा की बातें मम्मी का झिड़कना इम्तिहान के दिनों में मेरा टीवी देखने को ज़िद करना…. कितना मासूम था भोला था वो कितना न…

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