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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • मुहब्बत में मुझे धोखा दिया है
    शेरो-शायरी

    मुहब्बत में मुझे धोखा दिया है | Dhokha Shayari

    ByAdmin April 30, 2021February 8, 2023

    मुहब्बत में मुझे धोखा दिया है ( Muhabbat me mujhe dhokha diya hai )     मुहब्बत में मुझे धोखा दिया है किसी ने दर्द ग़म ऐसा दिया है   दवा करने से भी भरता नहीं ये जिगर पे जख़्म वो गहरा दिया है   रुलाये याद बनकर रोज़ दिल को वफ़ाओ का सिला कैसा…

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  • कुंडली
    कविताएँ

    कुंडली | Kundali par Kavita

    ByAdmin April 29, 2021February 8, 2023

    कुंडली ( Kundali )   आम जनता झेल रही विकट समय की मार कोरोना ने कर दिया जग का बंटाधार जग का बंटाधार कहर कोरोना बनकर डसता जहरी नाग कालिया जन को तनकर कह सोनी कविराय जगत का जीना हराम कैसी आई लहर संकट में पिसता आम   कवि : रमाकांत सोनी नवलगढ़ जिला झुंझुनू (…

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  • कोरोना का सीजन
    कविताएँ

    कोरोना का सीजन | Kavita

    ByAdmin April 29, 2021April 29, 2021

    कोरोना का सीजन ( Corona ka season )   कोरोना का सीजन कोरोना का सीजन बढ़े रोग दिन दिन घटे ऑक्सीजन कोरोना का सीजन…….2 मार्च में आए अप्रैल में छाए पूरी मई यह तबाही मचाए जून में जाने की करे डिसीजन करोना का सीजन……. जुलाई में जोर भयो कमजोर अगस्त में गश्त बची अब थोर…

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  • मैं नहीं हम की बात
    कविताएँ

    मैं नहीं हम की बात | Kavita

    ByAdmin April 28, 2021

    मैं नहीं हम की बात ( Main Nahi Hum Ki Baat )     करें बंद अब,धरम की बातें। गंगा और जमजम की बातें।   चोटिल हैं ज़ज्बात अभी बस, करें  फकत  मरहम की बातें।   भूख प्यास विश्वास की बातें, बोझिल हर इक,साँस की बातें।   मिलजुलके सुलाझायें मसले, करें  ताल  कदम की बातें।…

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  • कोरोना काल का पक्ष एक और!
    कविताएँ

    कोरोना काल का पक्ष एक और | Kavita

    ByAdmin April 28, 2021

    कोरोना काल का पक्ष एक और! ( Corona Kal Ka Pach Ek Or )   जरा सोचें समझें कैसा है यह दौर? भविष्य हमारा किधर जा रहा है? देखो कोई चांद पर मंगल पर बस्तियां- बसा रहा है! उधर हम देख सोच भी नहीं पा रहे हैं हम अनजाने डर से डरे जा रहे हैं…

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  • आपस में रखें भाईचारा
    कविताएँ

    आपस में रखें भाईचारा | Bhaichara par Kavita

    ByAdmin April 27, 2021February 8, 2023

    आपस में रखें भाईचारा ( Aapas me rakhe bhaichara )   उत्तम यही है विचार धारा बेबस बेकशों का सहारा सदियों से यही हमारी रीति हमें चाहिए सबकी प्रीति इसी ध्येय ने दिया था- वासुधैव कुटुंबकम् का नारा विश्व एक परिवार था हमारा है और रहेगा भी विश्वास है इतना ज्यादा! इन चंद हवा के…

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  • खरीद खरीद कर थक गया हूं
    कविताएँ

    खरीद खरीद कर थक गया हूं | Kavita Khareed Khareed kar

    ByAdmin April 27, 2021February 8, 2023

    खरीद खरीद कर थक गया हूं ( Khareed khareed kar thak gaya hoon )   सेनेटाइजर खरीदा खरीदा आक्सीमीटर मास्क साथ में हैण्डवाश लाया आयुष काढ़ा तब जबकि आमदनी हुई आधा पीया गिलोय तुलसी का रस नारियल पानी भी ठसम ठस कभी पैरासिटामोल तो कभी खरीदा मल्टी विटामिन कभी डेक्सामेथासोन एजीथ्रोमाइसीन । टीवी अखबार में…

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  • He nath bacha lo
    कविताएँ

    हे नाथ बचा लो | Kavita

    ByAdmin April 27, 2021

    हे नाथ बचा लो ( He nath bacha lo )   जग के सारे नर नारी रट रहे माधव मुरलीधारी यशोदा नंदन आ जाओ मोहन प्यारे बनवारी   चक्र सुदर्शन लेकर प्रभु नियति चक्र संभालो कहर कोरोना बरस रहा आकर नाथ बचा लो   उठा अंगुली पर गोवर्धन बचा लिया गोकुल को हर लो पीर…

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  • मुक्तक
    कविताएँ

    मुक्तक | Muktak

    ByAdmin April 27, 2021April 27, 2021

    मुक्तक ( Muktak )   1 सच जो लिख न सके वो कलम तोड़ दो, ये सियासत का  अपने  भरम  तोड़ दो, इन गुनाहों   के  तुम  भी  गुनहगार  हो, यार सत्ता  न  संभले  तो  दम  तोड दो।। 2 भटक रहा हूँ मैं अपनी तिश्नगी के लिए.. ज़रूरी हो गया तू मेरी जिन्दगी के लिए.. फक़त…

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  • शर्मनाक स्थिति
    कविताएँ

    शर्मनाक स्थिति | Kavita

    ByAdmin April 27, 2021

    शर्मनाक स्थिति ( Sharmanak sthiti )   ऐसे पिट रहा है साहेब का विदेशों का डंका, आग लगा के रख दी स्वयं की लंका। शवों पर चढ़ शान से सवारी करते रहे, आॅक्सीजन के अभाव में भले हम दम तोड़ते रहे। बिछ गई लाशें चहुंओर, पर थमा ना चुनाव और नारों का शोर। अब मद्रास…

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