Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • मुखड़ा देखो गुलाब है जिसका
    शेरो-शायरी

    मुखड़ा देखो गुलाब है जिसका | Ghazal Mukhda Dekho

    ByAdmin May 13, 2021February 8, 2023

    मुखड़ा देखो गुलाब है जिसका ( Mukhda dekho gulab hai jiska )   मुखड़ा देखो गुलाब है जिसका हाँ उड़ा जो नकाब है जिसका   पी जाऊं मैं नशा समझकर के हुस्न लगता शराब है  जिसका   भेज रब जीस्त में उसको मेरी चेहरा जो आफ़ताब है जिसका   वो हक़ीक़त में घर आए मिलने…

    Read More मुखड़ा देखो गुलाब है जिसका | Ghazal Mukhda DekhoContinue

  • प्यार सबको जोड़ता है
    कविताएँ

    प्यार सबको जोड़ता है | Kavita

    ByAdmin May 13, 2021May 13, 2021

    प्यार सबको जोड़ता है ( Pyar sab ko jodta hai )   प्यार मधुर एहसास रिश्तो का हर  बाधाओं  को  तोड़ता है अपनेपन  का  भाव  जगाता प्यार  सब  को  जोड़ता  है   हर रिश्तो में प्यार जरूरी मधुर प्रेम रग रग दौड़ता है दिल से दिल को दस्तक देता प्यार सब को जोड़ता है  …

    Read More प्यार सबको जोड़ता है | KavitaContinue

  • हाथ पकड लो हे गिरधारी
    कविताएँ

    हाथ पकड लो हे गिरधारी | Kavita

    ByAdmin May 12, 2021May 12, 2021

    हाथ पकड लो हे गिरधारी ( Haath Pakad Lo Hey Girdhari )   माना  वक्त  ले रहा परिक्षा हिम्मत बची नहीं अब बाकि जीवन के आयाम बदल गए हर ओर मचा तबाही का मंजर   एसा खौफ एसी बेबसी पसर रही चहु दिशा बेलौस जीवन मृत्यु के सर्घष बीच कांप रही तन बीच बसी रूह…

    Read More हाथ पकड लो हे गिरधारी | KavitaContinue

  • क्षितिज के तारे
    कविताएँ

    क्षितिज के तारे | Kavita

    ByAdmin May 12, 2021May 12, 2021

    क्षितिज के तारे ( Kshitij ke taare )   क्षितिज के तारे टूट रहे, अपनों के प्यारे छूट रहे। खतरों के बादल मंडराये, हमसे रब हमारे रूठ रहे।।   नियति का चलता खेल नया, कैसा  मंजर  दिखलाता है। बाजार बंद लेकिन फिर भी, कफ़न रोज बिकवाता है।।   मरघट  मौज  मना  रहा, सड़कों पर वीरानी…

    Read More क्षितिज के तारे | KavitaContinue

  • मिली नई जिंदगी
    कविताएँ

    मिली नई जिंदगी | Kavita

    ByAdmin May 12, 2021

    मिली नई जिंदगी ( Mili Nayi Zindagi )   बचते बचते बचा हूं मैं, सजते सजते बचा हूं मैं। शुक्र है मौला इलाही तेरा, टाल दिया जो अभी बुलावा मेरा। जिंदगी बख्श दी जिंदगी की खातिर, वरना यह समाज है बहुत ही शातिर! फायदे को अपने बनाए सारे कायदे, जीते जी जो ना निभा सके?…

    Read More मिली नई जिंदगी | KavitaContinue

  • समावेशी विकास की अवधारणा
    निबंध

    समावेशी विकास की अवधारणा | Essay In Hindi

    ByAdmin May 11, 2021

    निबंध : समावेशी विकास की अवधारणा ( Concept of inclusive development : Essay In Hindi ) समावेशी विकास एक व्यापक अवधारणा है। इसका प्रमुख उद्देश्य देश के विकास प्रक्रिया में सभी नागरिकों को शामिल करने के साथ-साथ उनसे मिलने वाले लाभों की सत प्रतिशत पहुंच भी सुनिश्चित उन तक करना है। यानी कि समावेशी विकास…

    Read More समावेशी विकास की अवधारणा | Essay In HindiContinue

  • मेरा दिल रो पड़ा देखते देखते
    शेरो-शायरी

    मेरा दिल रो पड़ा देखते देखते | Udasi shayari

    ByAdmin May 11, 2021May 11, 2021

    मेरा दिल रो पड़ा देखते देखते ( Mera Dil Ro Para Dekhte Dekhte )   मेरा दिल रो पड़ा देखते देखते वो जुदा जब हुआ देखते देखते   कह सका बात दिल की नहीं उससे कुछ वो  जुदा  हो  गया  देखते  देखते   खा गया हूँ ठोकर पत्थर से नफ़रत की राह  मैं  तो  चला …

    Read More मेरा दिल रो पड़ा देखते देखते | Udasi shayariContinue

  • आज अपना हबीब है देखा
    शेरो-शायरी

    आज अपना हबीब है देखा | Ghazal

    ByAdmin May 10, 2021

    आज अपना हबीब है देखा ( Aaj apna habib hai dekha )   आज  अपना  हबीब  है देखा पास किसी के करीब है देखा   मत कर इतना गरूर ख़ुद पे तू हाँ  बिगड़ते  नसीब  है  देखा   बोलते हक़ में सच के मैंनें तो आज मैंनें रकीब है देखा   है परेशां यहां तो…

    Read More आज अपना हबीब है देखा | GhazalContinue

  • घड़ी
    कविताएँ

    घड़ी | Bal kavita

    ByAdmin May 10, 2021

    घड़ी ( Ghadi )   टिक टिक टिक कर यह घड़ी बोलती इसके भीतर अलग-अलग तीन छड़ी घूमतीं सेकेंड, मिनट, घंटे से जो समय तोलतीं टिक टिक टिक कर यह घड़ी बोलती । बच्चों झटपट हो जाओ तुम सब तैयार मात-पिता, बड़ों को करो नमस्कार जल्दी पहुँचो स्कूल-तुमसे ये घड़ी बोलती शिक्षा ही सबकी उन्नति…

    Read More घड़ी | Bal kavitaContinue

  • जगतगुरु आदि शंकराचार्य
    कविताएँ

    जगतगुरु आदि शंकराचार्य | Kavita

    ByAdmin May 10, 2021

    जगतगुरु आदि शंकराचार्य ( Jagadguru Adi Shankaracharya )    धर्म और संप्रदाय पर जब था अंधकार का साया,  तब केरल के कालडी़ मैं जन्मे महान संत| 8 वर्ष की उम्र में सन्यासी बने सबको दिया ज्ञान,  कई ग्रंथ  रचकर  दिया सबको परम ज्ञान| सनातन धर्म स्थापित किया, अद्वैत चिंतन को पुनर्जीवित करके सनातन हिंदू धर्म…

    Read More जगतगुरु आदि शंकराचार्य | KavitaContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 700 701 702 703 704 … 837 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search