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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • चक्र समय का चलता है
    कविताएँ

    चक्र समय का चलता है | Kavita

    ByAdmin May 19, 2021

    चक्र समय का चलता है ( Chakra ka samay chalta hai )   परिवर्तन नित निरंतर होता जग का आलम बदलता है नई सोच नई उमंगे भर चक्र समय का चलता हैं   सुख दुख जीवन के पहलू आंधी तूफान आते जाते जो लक्ष्य साध कर चलते व़ो मंजिलों को पा जाते   शनै शनै…

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  • कोप कुदरत का
    कविताएँ

    कोप कुदरत का | Kavita

    ByAdmin May 18, 2021

    कोप कुदरत का ( Kop kudrat ka )   कुदरत कोप कर रही सारी आंधी तूफान और महामारी फिर भी समझ न पाया इंसां भूल हुई है अब हमसे भारी   खनन कर खोखली कर दी पावन गंगा में गंदगी भर दी पहाड़ों के पत्थर खूब तोड़े खुद ही खुद के भाग्य फोड़े   सड़के …

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  • जब मुहब्बत का खिला गुलशन नहीं
    शेरो-शायरी

    जब मुहब्बत का खिला गुलशन नहीं | Ghazal Jab Muhabbat ka

    ByAdmin May 18, 2021February 8, 2023

    जब मुहब्बत का खिला गुलशन नहीं ( Jab muhabbat ka khila gulshan nahi )   जब मुहब्बत का खिला गुलशन नहीं मेरा  खुशियों  से  भरा  दामन नहीं   दोस्ती  में  खाए  है  कितने  दग़ा अब किसी से मेरा मिलता मन नहीं   मैं जिससे आटा मगर कुछ ख़रीद लूँ पास  मेरे  तो  बचा  ही धन…

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  • तेरा होना मेरा होना
    शेरो-शायरी

    तेरा होना मेरा होना | Poem Tera Hona Mera Hona

    ByAdmin May 17, 2021February 8, 2023

    तेरा होना मेरा होना ( Tera hona mera hona )   भ्रम सा ही तो है तेरा होना मेरा होना अनसुलझे सवालों सा तू उलझे से जवाबों सी मैं उतार जामा यह फरेब का देख फिर क्या है तू क्या हूं मैं भरा भरा सा लगे फिर भी खाली सा तू खाली खाली सी मैं…

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  • बहु राज
    कविताएँ

    बहु राज || Kavita

    ByAdmin May 16, 2021

    बहु राज ( Bahu Raj )   छोटे-छोटे  जब  थे  लाल मात-पिता कितने खुशहाल !   जननी जनक दुलारे सुत को पुत्र प्रेम में हारे खुद को  !      पाल पोस कर बड़ा किया   पैर पर उनको खड़ा किया ! मन में जागे फिर नए सपने बहू  बिना घर सुने  अपने  !  घर…

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  • दोहा सप्तक
    कविताएँ

    दोहा सप्तक | Doha Saptak

    ByAdmin May 16, 2021May 16, 2021

    दोहा सप्तक ( Doha Saptak )   एक भयावह दौर से,गुजर रहा संसार। इक दूजे की मदद से,होगा बेड़ा पार। मानवता की सेवा में,तत्पर हैं जो लोग। दुआ कीजिए वे सदा,हरदम रहें निरोग। बेशक अवसर ढूंढिए,है यह विपदा काल। सौदा मगर ज़मीर का,करें नहीं हर हाल। सॉंसों के व्यापार में,जो हैं दोषी सिद्ध। पायें फॉंसी…

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  • रिश्तों के धागे
    शेरो-शायरी

    रिश्तों के धागे सब तोड़ते वो रहे | Shayari On Relations

    ByAdmin May 15, 2021

    रिश्तों के धागे सब तोड़ते वो रहे ( Rishton ke dhage sab torte wo rahe )   रिश्तों के धागे सब तोड़ते वो रहे और हम प्यार से जोड़ते वो रहे   रह गये है  हम आवाज देते यूं ही और मुंह हमसे तो मोड़ते वो रहे   प्यार के भेजते ही रहे फ़ूल हम…

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  • सीख लिया है
    कविताएँ

    सीख लिया है | Kavita

    ByAdmin May 14, 2021May 14, 2021

    सीख लिया है ( Seekh liya hai )   जिसने जितने दुःख दिये हैं मुझे आकर वे अपने अपने ले जाएं अब कोई ठिकाना नहीं है मेरे पास तुम्हारे दिए हुए दुःखों के लिए…   जो मेरे हिस्से आए हैं वे रख लिए हैं अपने पास उन्हीं को लगा कर सीने से जीवन गुजार दूँगा…

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  • चांद मुक्तक 
    मुक्तक

    चांद | Chand par muktak

    ByAdmin May 14, 2021December 3, 2022

    चांद मुक्तक  ( Chand Muktak )   चांद तारे बिछा देंगे हम राह में कुछ नया कर दिखा देंगे चाह में आओ मिलों हमसे मुस्कुरा कर गगन छू लेंगे हम आपकी पनाह में   बस जाओ मेरे दिल में, चमका दो किस्मत का तारा। महका दो जीवन की बगिया, खिला दो पुष्प ये प्यारा।  …

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  • उपभोक्ता की समस्या
    कविताएँ

    उपभोक्ता की समस्या | Kavita

    ByAdmin May 14, 2021May 14, 2021

    उपभोक्ता की समस्या ( Upbhokta ki samasya )   उद्योगों के विकास में औद्योगिक क्रांति देश में लाया| औद्योगिक क्रांति ने देश में उत्पादन को बढ़ाया| पर बड़े-बड़े कंपनियों ने ग्राहक को उपभोक्ता बनाया| इस उपभोक्ता को विज्ञापन ने खूब रिझाया| इस विज्ञापन ने बिना जरूरत के सामान को जरूरत बनाया| देश की प्रथम जरूरत…

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