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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • न ही देखा ऐसा चेहरा अल्लाह कसम
    शेरो-शायरी

    नही देखा ऐसा चेहरा | Chehra shayari

    ByAdmin September 4, 2020August 14, 2022

    नही देखा ऐसा चेहरा  ( Nahin dekha aisa chehara )   न ही देखा ऐसा चेहरा अल्लाह कसम था वो ही सुंदर इतना अल्लाह कसम   तोड़ गया है हर वादा चाहत का वो न वहीं निकला है सच्चा अल्लाह कसम   करना तू दोस्त वफ़ा मुझसे यारी में न कभी करना धोखा अल्लाह कसम…

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  • कोविड अस्पतालों की सच्चाई !
    व्यंग्य

    कोविड अस्पतालों की सच्चाई | Kavita

    ByAdmin September 4, 2020August 14, 2022

    कोविड अस्पतालों की सच्चाई ! ******* डेडिकेटेड कोविड अस्पताल! का कुछ ऐसा है हाल? न बेड है, न डाॅक्टर रहे देख हैं! कहीं पीपीई किट नहीं, तो कहीं जरूरी उपकरण ही नहीं! वेंटीलेटर की तो पूछो ही मत, जिला में नहीं,मीडिया का है अभिमत। वो बता रहे हैं, दिखा रहे हैं। जिला अस्पतालों में नहीं…

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  • प्यार को कब तक छुपाओगे मगर
    शेरो-शायरी

    प्यार को कब तक छुपाओगे मगर | Shayari pyar bhari

    ByAdmin September 3, 2020August 14, 2022

    प्यार को कब तक छुपाओगे मगर ( Pyar ko kab tak chupaoge magar )     प्यार को कब तक छुपाओगे मगर हाल दिल का कब सुनाओगे मगर   छोड़ो भी नाराजगी दिल से अपनें प्यार में कब तक सताओगे मगर   बेरुखी अब छोड़ दो दिल से जरा दिल मेरा कब तक जलाओगे मगर…

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  • मन मानता नहीं !
    शेरो-शायरी

    मन मानता नहीं | Poem man manta nahin

    ByAdmin September 3, 2020August 13, 2022

    मन मानता नहीं ! ( Man manta nahin )   उसी से मिलनें को मन मानता नहीं! मुहब्बत से वही जब बोलता  नहीं   वही ऐसे गुजरा है  पास से मेरे मुझे  जैसे वही के जानता नहीं   सफ़र यूं जीस्त का तन्हा नहीं कटता अगर वो साथ मेरा छोड़ता नहीं   नहीं होती जुदा…

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  • सत्यमेव जयते
    कविताएँ

    सत्यमेव जयते | Satyameva Jayate | kavita

    ByAdmin September 3, 2020August 13, 2022

    सत्यमेव जयते ( Satyameva Jayate ) ***** डाॅ० कफिल की रिहाई, मीडिया में है छाई। यह बात फिर उभरकर आई, सत्य परेशान हो सकता है- पराजित नहीं भाई । यह कोई नहीं बात नहीं सैकड़ों ऐसे किस्से है सदियों सुने , सुनाए जा रहे हैं। फिर भी वही गलती सब दोहराए जा रहे हैं। ताज़ा…

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  • पौधे देख सुन सकते हैं
    कविताएँ

    पौधे देख सुन सकते हैं | Poem on plant in Hindi

    ByAdmin September 3, 2020August 13, 2022

    पौधे देख सुन सकते हैं ( Paudhe dekh sun sakte hain ) *****   देख सुन और बात है करते! पौधे ! क्या आप हैं जानते ? क्या? हां ,सही सुना आपने- यह सत्य भी है भैया, यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न आस्ट्रेलिया की मोनिका गागलियानों ने है साबित किया। पहले तो थे यही जानते, पौधे हंसते…

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  • प्रकृति की सीख
    कविताएँ

    प्रकृति की सीख | Poem prakriti ki seekh

    ByAdmin September 3, 2020November 1, 2022

    प्रकृति की सीख ( Prakriti ki seekh )   बदलना प्रकृति की फितरत फिर क्यों इंसान हिस्सेदार हैं। प्रकृति के बदलने में कहीं ना कहीं इंसान भी बराबर जिम्मेदार हैं।   जैसे तप और छाया देना प्रकृति का काम हैं। वैसे ही कभी खुशी कभी गम, जिंदगी का नाम हैं।   कभी कबार पूछता, आसमां…

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  • सब मौन क्यों ?
    कविताएँ

    सब मौन क्यों | Poem sab maun kyon

    ByAdmin September 2, 2020August 13, 2022

    सब मौन क्यों ? ( Sab maun kyon ) *****  गिरी जीडीपी! बढ़ी महंगाई, डीजल पेट्रोल के मूल्य हैं हाई। कोरोना का हुआ आगमन, ताली थाली से हुआ स्वागतम! पहले शर्माया, फिर पूरी तैयारी कर आया। अब कहर ढा रहा है, दिनों-दिन रूला रहा है। बढ़ी हुई है बेकारी, चहुंओर है मारामारी। युवाओं की है…

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  • अनलाॅक 4.0
    कविताएँ

    अनलाॅक 4.0 | Kavita unlock 4.0

    ByAdmin September 2, 2020August 13, 2022

    अनलाॅक 4.0 ( Unlock 4.0 ) *** लाॅकडाउन से छुटकारा मिला है, कोरोना से नहीं! बाजार जाएं शौक से पर बरतें सावधानियां कई? बात नहीं है कोई नई, सारी हैं वही। लापरवाही पड़ सकती है भारी, निकल जाएगी सारी होशियारी। संक्रमण से रहना है बचकर, तो निकलो मास्क पहनकर। व्यक्तिगत दूरी का भी रखें ख्याल,…

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  • बादल
    कविताएँ

    बादल | Badal par kavita

    ByAdmin September 2, 2020August 10, 2022

    बादल ( Badal ) *** ओ रे ! काले काले बादल, बरस जा अब, सब हो गए घायल ! धरती अंबर आग उगल रहे, ऊष्मा से ग्लेशियर पिघल रहे! सूख गए हैं खेतों के मेड़, बरसो जम कर- अब करो न देर । ओ रे ! काले काले बादल… बरसो … हर्षे बगिया, हर्षे मुनिया।…

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