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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • किस अंदाज़ से मुख्तलिफ थे तुम हमसे
    शेरो-शायरी

    किस अंदाज़ से मुख्तलिफ थे तुम हमसे | Ghazal kis andaaz se

    ByAdmin July 14, 2020May 24, 2022

    किस अंदाज़ से मुख्तलिफ थे तुम हमसे ( Kis andaaz se mukhtaliph the tum humse )   राह भटक ही जाए साहिल ऐसी तो ना थी ढूंढ़ने से ना मिले मंजिल ऐसी तो ना थी   किस अंदाज़ से मुख्तलिफ थे तुम हमसे पेहले तुम भी कामिल ऐसी तो ना थी   उदासी है कैसे…

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  • ज़ुल्मत से ये रूह डर रहा है
    शेरो-शायरी

    ज़ुल्मत से ये रूह डर रहा है | Zulamt se ye rooh dar raha hai | Ghazal

    ByAdmin July 13, 2020May 24, 2022

    ज़ुल्मत से ये रूह डर रहा है ( Zulamt se ye rooh dar raha hai )   ❄️ ज़ुल्मत से ये रूह डर रहा है ख्वाब मेरे शौक़ से उतर रहा है ❄️ वही नदिना जी रहा है मुझमें जो मुझे हर रोज मार रहा है ❄️ नचाहते हुए तुझे मैंने चाहा है मेरी चाहत…

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  • सूरज के क़ज़ा होते ही
    शेरो-शायरी

    सूरज के क़ज़ा होते ही | Suraj ke qaza hote hi | Ghazal

    ByAdmin July 12, 2020May 24, 2022

    सूरज के क़ज़ा होते ही ( Suraj ke qaza hote hi )   सूरज के क़ज़ा होते ही चाँद जगमगा उठा होगा मगर हर घर, हर सेहर सो चूका होगा   में थक चूका हूँ इस आबरू के सिलसिले से ये मेरी बेबसी है की यहाँ एक और हादसा होगा   ज़रा देख हर आँखों…

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  • सैनिक
    कविताएँ

    सैनिक | Sainik kavita

    ByAdmin July 12, 2020May 24, 2022

    सैनिक  ( Sainik )    वो सैनिक है, वो रक्षक है || 1.न हिन्दू है न मुस्लिम है, वो केवल मानव राशी हैं | न दिन देखें न रात पता हो, वो सच्चे भारतबासी हैं | चाहे गर्मी हो या बर्फ जमे, अपना कर्तव्य निभाते हैं | खुद जान गंवा कर सीमा पर, हिन्दुस्तान बचाते…

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  • ज़िन्दगी का कोई बसेरा
    शेरो-शायरी

    ज़िन्दगी का कोई बसेरा | Zindagi ka koi basera | Ghazal

    ByAdmin July 12, 2020May 23, 2022

    ज़िन्दगी का कोई बसेरा ( Zindagi ka koi basera )   ज़िन्दगी का कोई बसेरा ढून्ढ रहा हूँ में तो बस ज़ीस्त का एक इशारा ढून्ढ रहा हूँ   एक सुर्खियों में बंधा हुआ शाम का तरन्नुम समाये सवेरा ढून्ढ रहा हूँ   उजालो से अब दिल उक्ता गया है में दिन में चाँद, सितारा…

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  • यकीन
    कविताएँ

    यकीन | Yakeen kavita

    ByAdmin July 11, 2020May 23, 2022

     यकीन  ( Yakeen )   ये मुझ पर सब का”यकीन”है || 1.नौ महीने कोख मे, मुझे पाला पोसा-मात ने | जन्म दिया पीडा सही, और दूध पिलाया मात ने | बचपन की अठखेलियां, गीला-सूखा सहती रही | आँख का उसके तारा हुँ, पूरे यकीन से कहती रही | ये मुझ पर मेरे माँ का “यकीन”है…

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  • शौक़, ना शौक़-ए-जुस्तुजू बाक़ी
    शेरो-शायरी

    ना शौक़, ना शौक़-ए-जुस्तुजू बाक़ी | Ghazal

    ByAdmin July 11, 2020May 23, 2022

    ना शौक़, ना शौक़-ए-जुस्तुजू बाक़ी ( Na shoq-na- shoq-e -justaju baki )   ना शौक़, ना शौक़-ए-जुस्तुजू बाक़ी बस दीदार-ए-यार से रहा रु-ब-रु बाक़ी   इस क़दर टूट कर नूर-ए-मुजस्सम को चाहना की रहे ना जिस्म में कोई क़तरा, कोई लहू बाक़ी   कट रही है ज़िन्दगी अपनी ही रफ़्तार में सफर मगर हमारा रहा…

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  • चूडियाँ
    कविताएँ

    चूडियाँ | Kavita choodiyaan

    ByAdmin July 11, 2020May 23, 2022

     चूडियाँ  ( Choodiyaan )   सोलह श्रंगारों मे “चूडी” || 1.चाँद सा गोल आकार, कुछ बड़ी कुछ छोटी सी | रंगीन कुछ सतरंगी सी, कुछ पतली कुछ मोटी सी | सोने पीतल और चाँदी की, कुन्दन काँच मोती की | हांथो मे बजती खन-खन, कलाई सजाती गोरी की | सोलह श्रंगारों मे “चूडी” || 2.लाल…

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  • हम जिस्म-ओ-जान से दिल के तलबगार है
    शेरो-शायरी

    हम जिस्म-ओ-जान से दिल के तलबगार है | Ghazal dil ke talabgar

    ByAdmin July 11, 2020May 23, 2022

    हम जिस्म-ओ-जान से दिल के तलबगार है ( Hum jism -o -jaan se dil ke talabgar )   खुसबू से पीछा छुड़ाने को बागों में टहलते है पस-ए-पर्दा आँखों का हम भी समझते है   ज़िन्दगी फ़क़त कुछ दिनों के यूँ ही गुजर जाएगा चलो बैठ कर कहीं इसको गुज़रते देखते है   हम जिस्म-ओ-जान…

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  • गीत लिखे हजार मगर
    शेरो-शायरी

    गीत लिखे हजार मगर | Geet likhe hajar magar

    ByAdmin June 27, 2020May 23, 2022

    गीत लिखे हजार मगर ( Geet likhe hajar magar )   गीत लिखे हजार मगर गाया ना जा सके दर्द मिले ऐसे की बताया ना जा सके इस ज़ुबानी फ़र्क़ की इम्तेहान में खुद को बचाया ना जा सके लिखा है कुछ तो मगर क्या लिखे ऐसे की जनाया ना जा सके शोर इतना हो…

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