Poem in Hindi on Krodh

क्रोध को त्यागें | Poem in Hindi on Krodh

क्रोध को त्यागें

( Krodh Ko Tyage )

आज दर्द हमारा यहाँ जानें कौन,
एवम हमको आज पहचानें कौन।
क्यों कि बैंक से ले रखा है यें लोन,
इसलिए रहता मैं अधिकतर मौन।।

रखता फिर भी दिल में एक जोश,
कोई गलती करें तो करता विरोध।
कमाकर चुकाऊंगा खोता ना होश,
कभी किसी पर नही करता क्रोध।।

क्रोध से टूटे कई रिश्तें नातें दोस्त,
क्रोध से फूटे भाग्य एवं खोते होश।
इस क्रोध को त्यागें व रखें सन्तोष,
ना रखना मन में द्वेश और ये रोष।।

मीठे प्यारे सब-से बोलों तुम बोल,
कर लो शब्दों का पहले तुम तोल।
धन, लोभ ,लालच और यह माया,
काम ना आता विपदा में ये साया।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

 

 

Similar Posts

  • टूटे दिल की पीर | Toote Dil ki Peer

    टूटे दिल की पीर ( Toote dil ki peer )    टूटे दिल की पीर भला अब कौन जाने। कौन सुनेगा फरियाद दर्द भरे अफसाने। कौन जाने हाल उन बुड्ढे मां और बाप के। आने लगे औलाद को जूते अब नाप के। कौन सुनेगा किसको सुनाएं दर्द दबाए बैठे हैं। कौन जाने अश्कों के मोती…

  • ज़िन्दगी तेरे रंग हज़ार | Zindagi Tere Rang Hazaar

    ज़िन्दगी तेरे रंग हज़ार ( Zindagi Tere Rang Hazaar ) ज़िन्दगी तेरे, रंग हज़ार ।किसी में नफ़रत , किसी में प्यार । कहीं है पतझड़ ,कहीं बहार ।किसी में जीत , तो किसी में हार । कहीं सुकून तो , कहीं तनाव ।हर पल रंग ,बदलती ज़िन्दगी । कभी सुख, देती बेशुमार ।कभी कभी ,…

  • चांद पर भारत | Chand par Bharat

    चांद पर भारत! ( Chand par Bharat )    आशियाना चांद पे मिलके बनायेंगे, दूसरे ग्रहों पे भी कदम हम बढ़ाएंगे। गिर करके उठना दुनिया की रीति है, हौसले से फासले खुद हम घटाएंगे। अश्कों से जंगल होता हरा नहीं, हकीकत की दुनिया वहां अब बसायेंगे। महकेंगी सांसें पर अभी है तपाना, नए मंजरों पे…

  • महिमा | Mahima

    महिमा नारी संसार का मूल स्थान हैनारी वचन है वन्दन है और–मां भगवती का वरदान है! नारी देश की प्रगति का आधार हैनारी ओम् है अन्नपूर्णा है और–मां दुर्गा का अवतार है! नारी खेतों में लहलहाती फसल हैनारी श्रम है साधना है और —मां सीता का संबल है! नारी घर – परिवार की शान हैनारी…

  • खुद भी हिंदी बोलिये | 14 September Hindi diwas par kavita

    खुद भी हिंदी बोलिये ( Khud bhi hindi boliye )   खुद भी हिंदी बोलिये, औरों को दो ज्ञान। हिंदी में ही है छिपा, अपना हिंदुस्थान।।   चमत्कार हर शब्द में, शब्द शब्द आनंद। विस्तृत है साहित्य भी, दोहा रोला छंद।।   सब भाषा का सार है, सबका ही आधार। माँ हिंदी की वंदना, सुधि…

  • नंदवन के घर आनंद लाल

    नंदवन के घर आनंद लाल दयावान ही चक्रधारी है ,मुरलीवाला ही चमत्कारी है lराधा – कृष्ण – रुक्मणि है ,तरल लीला , कृष्ण लीला lसखी राधा तो सखा सुदामा l मुरली अगर सुरों की लीला ,तो मेघ सजे वर्षा की लीला lउँगली बनी गोवर्धन लीला ,कद्रू पुत्र यमुना कुंड लीला lआलम, मीरा, सुर में भी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *