Sapna Shayari

आंखों में जिसका सपना है | Sapna Shayari

आंखों में जिसका सपना है

( Aankhon mein jiska sapna hai ) 

 

आंखों में जिसका सपना है ?
दूर कहीं वो मुझसे रहता है

कौन करे किससे यार वफ़ा
उल्फ़त में होता धोखा है

छोड़ सताना तू मुझको ही
उल्फ़त में ही दिल टूटा है

हाल कहूँ मैं किससे दिल का
दोस्त न कोई भी मेरा है

शक न करो उल्फ़त में ही यूं
मुश्किल से रिश्ता जुड़ता है

कि दग़ाबाज़ फ़रेबी दिल का
देखा न कभी उस जैसा है

ऐ रब भेज कोई जीवन में
जीवन में आज़म तन्हा है

 

शायर: आज़म नैय्यर
(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

दुआ से | Dua se

Similar Posts

  • सुना दी हमने | Suna di Hamne

    सुना दी हमने ( Suna di Hamne ) शम्अ उल्फ़त की जला दी हमनेपर सज़ा दिल को सुना दी हमने राह हमदम की सजा दी हमनेउनकी दुनिया ही बसा दी हमने रोशनी की थी जिन्होंने शब भरउन चरागों को दुआ दी हमने बन गया ग़ैर ज़माना लेकिनयार की यारी निभा दी हमने दौर-ए-हिज़्रा में भी…

  • सुराही जाम टकराने लगे हैं

    सुराही जाम टकराने लगे हैं नज़र मंज़र ये क्या आने लगे हैंचमन में फूल मुरझाने लगे हैं सियासत चल रही है ख़ूब उनकीजो ख़ाबों से ही बहलाने लगे हैं वज़ीरों की सियासत देखियेगाबदलकर केचुली आने लगे हैं बनाकर गीदड़ों ने फौज अपनीवो शेरों पर ही गुर्राने लगे हैं भिखारी बन के जो आये थे कल…

  • हिमायत में आ गये

    हिमायत में आ गये सारे अज़ीज़ उनकी हिमायत में आ गयेमजबूर होके हम भी सियासत में आ गये हाँलाकि ख़ौफ़ सबको सितमगर का था बहुतकुछ लोग फिर भी मेरी वकालत में आ गये इतने हसीन जाल बिछाये थे आपनेहम ख़ुद शिकार होके हिरासत में आ गये सोचा नहीं नशे में हुकूमत के आपनेअहबाब इतने कैसे…

  • बेवफ़ाई किसी ने | Bewafai Ghazal

    बेवफ़ाई किसी ने ( Bewafai kisi ne )   बिगाड़ी किसी ने बनाई किसी ने कभी दिल्लगी कब निभाई किसी ने। फिज़ा में उदासी घुली आज़ क्यूं है कहीं की है फ़िर बेवफ़ाई किसी ने। अगर तल्ख़ियां हों रखो फ़ासले तुम मुझे बात ये थी सिखाई किसी ने। मुझे भूल कर ख़ुश नहीं संगदिल वो…

  • आज़मा के देख लिया | Aazma ke Dekh liya

    आज़मा के देख लिया ( Aazma ke dekh liya )    ख़ुदा बना के तुझे, सर झुका के देख लिया अना को ताक पे रख, सब भुला के देख लिया हुस्न ए मतला बड़े ख़ुलूस से उनको बुला के देख लिया हरेक नाज़ भी उनका उठा के देख लिया जुनून तोड़ चुका दम, वफा निभाने…

  • तेरे बग़ैर | Tere Bagair

    तेरे बग़ैर ( Tere Bagair ) वीरां यह गुलज़ार है तेरे बग़ैरकरना यह स्वीकार है तेरे बग़ैर हर नफ़स यह कह रही है चीख करज़िन्दगी बेकार है तेरे बग़ैर तेरी यह जागीर लावारिस पड़ीकौन अब मुख़्तार है तेरे बग़ैर मैं मदद को हाथ फैलाऊं कहाँसबके लब इनकार है तेरे बग़ैर क्या सजाऊं जाम पैमाने बताकिसको…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *