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  • पर्वत प्रदेश में पावस | Kavita

    पर्वत प्रदेश में पावस ( Parvat Pradesh Mein Pavas )   पावसी बूंदे पड़ते ही पर्वत झूमने है लगते.. पेड़  पौधे  फूल  सभी  मुस्कुराने  है लगते .. चट्टानों पर छा जाती है चाहुओर हरियाली मानो उपवन में कोई मोर नाचने है लगते।   रिमझिम बूंदें है गाती  भीगती है चोटियां… छनन छनन खलल खलल गाती…

  • कलम की आवाज | Kavita

    कलम की आवाज ( Kalam ki aawaj ) ( मेरी कलम की आवाज सर्वश्रेष्ठ अभिनेता दिलीप साहब जी को समर्पित करती हूं ) “संघर्षों से जूझता रहा मगर हार न मानी, करता रहा कोशिश मगर जुबां पर कभी न आई दर्द की कहानी”। कुल्हाड़ी में लकड़ी का दस्ता न होता तो लकड़ी के काटने का…

  • दोहा दशक | Doha Dashak

    दोहा दशक ( Doha Dashak )   फिर  चुनावी  मौसम  में, बारूदी  है  गंध। खबरों का फिर हो गया,मजहब से अनुबंध।   अपनों  से  है  दूरियां,उलझे हैं संबंध। भावों से आने लगी,कड़वाहट की गंध।   ढूंढ़ रहे हैं आप जो,सुख का इक आधार। समझौता  हालात  से, करिए  बारंबार।   उसका ही संसार में,है जीवन अति…

  • आषाढ़ के बादल | Kavita

    आषाढ़ के बादल ( Ashadh ke baadal ) उमड़ घुमड़ कर आ गए आषाढ़ के बादल अंबर  में  घिर  छा गए  आषाढ़  के  बादल रिमझिम मूसलाधार बरसता घनघोर घटा छाए कड़ कड़ करती दामिनी काले बदरा बरसाए गड़ गड़ कर गर्जन करते आषाढ़ के बादल झील ताल तलैया भरते आषाढ़ के बादल हरियाली खेतों में…

  • उजाले मिट नहीं सकते | Kavita

    उजाले मिट नहीं सकते ( Ujale mit nahin sakte )   हटा लो दीप द्वारे से, उजाले ये नही करते। जला लो मन में दीपों को,उजाले मिट नही सकते। जो जगमग मन का मन्दिर है,कन्हैया भी वही पे है, अगर श्रद्धा भरा मन है, तो फिर वो जा नही सकते। हटा लो दीप द्वारे से,…

  • पहचान | Kavita

    पहचान ( Pehchan )   प्रेम के मोती लुटाओ प्रतिभा कोई दिखाओ पहचान  जग  में  कोई  नई  बनाईए सफलता मिल सके पर्वत भी हिंल सके जंग  भरी  दुनिया  में  हौसला  बनाइए लगन से मेहनत रंग जरूर लाएगी पहचान जग में आप ऐसी बनाईए पूर्वजों की साख में चार चांद लग जाए कर्म  पथ  पर  अपनी …

  • पहली बारिश | Kavita

    पहली बारिश   ( Pehli Baarish )   बचपन की यादों को समेट रही हूं पहली बारिश की यादे सहेज रही हूं बारिश का पानी सखी सहेली कागज की नाव छपाक सी मस्ती बेफिक्र ज़माना वक्त सुहाना हौले हौले से सपने भीग जाना पिता की मुस्कान मां को चिंता पहली बारिश का अहसास अनोखा ना…

  • कुछ अनकही बातें | Kuch Ankahee  Baatein

    कुछ अनकही बातें (Kuch Ankahee  Baatein )   कुछ अनकही बातें, कुछ पुरानी यादें कहां से आती हैं कहां चली जाती हैं कुछ नही समझ आता क्या होता हैं कभी कभी। कुछ अनजान रास्ते और अनजान राहे जाना कहां हैं समझ नही आता बीच राह मैं खड़े खड़े मन बड़ा घबराता रास्ते पर खड़े खड़े…

  • बहुत समझाया बहुत मनाया | Suneet Sood Grover Shayari

    बहुत समझाया, बहुत मनाया ( Bahot Samjhaya Bahot Manaya )   बहुत समझाया, बहुत मनाया डराया भी ,धमकाया भी वक़्त की नज़ाकत समझो फासलों को नजदीकियां… पर वे तो ऐसे थे एक हुए बगावत के सुर बोल रहे एक एक करते थे जुट हुए धरने पर वो जैसे  बैठे हुए … अशआर कभी कोई नज़्म…

  • कभी अपनों ने ही समझा नहीं है | Udasi Bhari Shayari

    कभी अपनों ने ही समझा नहीं है ( Kabhi apno ne hi samjha nahin hai )   कभी अपनों ने ही समझा नहीं है ! दिल उनसे इसलिए अब मिलता नहीं है   गली में इसलिए छाया अंधेरा कभी तक चाँद वो  निकला नहीं है   मुहब्बत की क्या होती गुफ़्तगू फ़िर कभी वो  पास…