बस,अब और नहीं बस,अब और नहीं,,तुम छिप जाओ,जाकर कहीं…बादलों की ओट में,,,क्योंकि….मुझसे सहन नहीं होताये व्यवहार तुम्हाराऔर तुम हो कि…प्यार के नाम परमुखौटे पर मुखौटे लगाकरप्रतिपल छल रहे हो मुझेऔर…साबित कर रहे होकि… तुम बेवफा होआखिर क्यों कर रहे हो तुम ऐसा…जाओ,छिप जाओकहीं बादलों की ओट में… उल्लू के पठ्ठे जी हाँ,,सबके पठ्ठे होते हैंजैसे…