Shaadi ki Salgirah par Kavita

शादी की सालगिरह | Shaadi ki Salgirah par Kavita

शादी की सालगिरह

( Shaadi ki salgirah ) 

 

आज हमारी है साथियों वो शादी की सालगिरह,
जोड़ी सलामत रहें हमारी दुआएं देना इस तरह।
कभी ना उतरे हम दोनों का चढ़ा प्रेम का बुखार,
खुशियों का यह सांसारिक मिलन रहें इस तरह।।

ग़म का साया कभी न आएं खुशियों बीच हमारे,
हर दिन नई ख़ुशी मनाएं वो पलको बीच हमारे।
यह ईश्वर की सब देन है जो जोड़ी बनायें हमारी,
ऐसे ही सलामत रखना प्रभु हरिनारायण हमारे।।

भेजा है जो बधाई सन्देश एवं शुभकामनाएं हमें,
जल्दी बताएं पार्टी करनी है आप सभी की हमें।
केक कटेगा डांस भी होगा झूम उठेगा पूरा जहां,
नाम नोट करवा दो सभी एवं नंबर भी देना हमें।।

मेरे विवाह की आज है यह उन्नतीसवीं वर्ष-गांठ,
रुखा सूखा जो मिला हम मिलकर खाएं है बांट।
सुख-दुःख कई आतें रहें और दोनों ही सहते रहें,
प्रेम, प्यार से दिन गुजारें सर्वदा रहा घर में ठाठ।‌।

सुनें कम-सुनाएं ज्यादा ऐसा भी बहुत बार हुआ,
कभी हमारा कभी इसका दिमाग अपसेट हुआ।
लेकिन ईश्वर की कृपा से यें रिश्ता बरकरार रहा,
आनें वाले वक़्त के लिए करना आप सब दुआ।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

 

 

Similar Posts

  • हार हो गई | Haar ho Gai

    हार हो गई ( Haar Ho Gai ) सारी मेहनत बेकार हो गईइस बार भी हार हो गईकोशिश की थी बहुत हमनेमगर बेवफा सरकार हो गई । बड़ी मेहनत से उसको पाया थाबड़ी मुश्किल से करीब लाया थाअचानक वह फरार हो गईकिस्मत फिर दागदार हो गई । पास आकर वो चली गईकिस्मत फिर से छली…

  • भीग गया अंग फागुन के रंग | Kavita Phagun ke Rang

    भीग गया अंग-अंग फागुन के रंग ( Bheeg gaya ang-ang phagun ke rang )    भीग गया सारा अंग-अंग फाल्गुन के यह रंग, मस्त फुहारें फाग मस्ती में झूम रहें सभी संग। हर मुखड़े पर रंग लगा किसी के लगी गुलाल, धूम-मचाती होली आई बाज रहें है देखो चंग।। एक थाली गुलाल रखी दूसरी में…

  • संभल जा ज़रा | Kavita sambhal ja zara

    संभल जा ज़रा ( Sambhal ja zara ) ए-दोस्त… संभल जा ज़रा पछताएगा,रोएगा अपने किए दुष्कृत्यों पर फिर सोच सोच कर…. अभी समय है बच सकता है तो बच बचा सकता है तो बचा अपनों के अहसासों को अपनों के अरमानों को….. तुमसे ही तो सारी उम्मीदें हैं तुम ही तो पालनकर्ता हो अब तुम…

  • दो घड़ी ठहर जा जिंदगी | Zindagi Par Kavita

    दो घड़ी ठहर जा जिंदगी ( Do ghadi thahar ja Zindagi   हो रही बरसात प्रेम की, नेह दिलों में छा गया। सबसे हिलमिल जीने का, हमें सलीका आ गया।   मधुर प्रीत की वजे बांसुरी, कर लूं थोड़ी बंदगी। दीप जला मनमंदिर में, दो घड़ी ठहर जा जिंदगी।   मुसाफिर मंजिल का, मनमौजी मुस्काता…

  • मकर संक्रांति का आगमन

    मकर संक्रांति का आगमन पूस माह कीठंडी ठिठुरती रातेंऔर मकर संक्रांति काआगमन,लोहड़ी, बिहू, उगादि, पोंगलदेते दस्तक दरवाजों पर,मन प्रसन्न हो उत्सवके जश्न में जुट जाता,समझा जातातिल, गुड़, खिचड़ी,दान- धर्म – पुण्यके महत्व को।छोड़ सूर्यदेव दक्षिणायन को,प्रस्थित होते उत्तरायण में।थमें हुए समस्त शुभ-कार्यप्रारम्भ होतेइस दिन से।इसी दिन त्यागी देह,भीष्म पितामह ने,माँ यशोदा नेव्रत अनुष्ठान किया।माँ गंगा…

  • एक तरफा प्रेम कहानी | Ek Tarfa Prem Kahani

    एक तरफा प्रेम कहानी ( Ek tarfa prem kahani )   वह केसर की क्यारी थी, लड़की नहीं फुलवारी थी। चाहता था जान से ज़्यादा मुझको लगती न्यारी थी। आँखें उसकी कजरारी थी, पहनी शिफॉन की साड़ी थी, हम कर चुके थे अपना इज़हार उसकी कहने की बारी थी। तुम्हारी नहीं हमारी थी, अप्सरा से…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *