Insaan

इंसान | Insaan

इंसान

( Insaan ) 

 

हर सू हैं झूठे इंसान
अब कम हैं सच्चे इंसान

मेरी मुट्ठी में भगवान
करता है दावे इंसान

अपनी ख़ुदग़र्ज़ी में अब
भूल गया रिश्ते इंसान

सोच समझ के कर विश्वास
अब कम हैं अच्छे इंसान

लोगों को जो चुभ जाये
शौक़ न वो पाले इंसान

जिस रस्ते पर दाग़ लगे
चले न उस रस्ते इंसान

एक ख़ुदा के हैं बंदे
दुनिया के सारे इंसान

देख न पीछे मुड़कर तू
बढ़ता चल आगे इंसान

इश्क़ ‘अहद’ है शय ऐसी
सुध-बुध खो नाचे इंसान !

 

शायर: :– अमित ‘अहद’

गाँव+पोस्ट-मुजफ़्फ़राबाद
जिला-सहारनपुर ( उत्तर प्रदेश )
पिन कोड़-247129

यह भी पढ़ें :

मेरे पास तुम हो | Ghazal on Ishq

Similar Posts

  • बस हमें ख़बर नहीं | khabar Shayari

    बस हमें ख़बर नहीं ( Bas hamen khabar nahin )    देख पाये जो उसे ,ऐसी हर नज़र नहीं हर जगह है वो ख़ुदा ,बस हमें ख़बर नहीं सब मरेंगे एक दिन ,बात है ये लाज़मी कोई इस जहान में, दोस्तो अमर नहीं दिल मिला है गर तुझे ,तो मिलेगा दर्द भी दर्द से तो…

  • चाहता है तिरंगा | Poem on Tiranga in Hindi

    चाहता है तिरंगा ( Chahta hai tiranga )   सर भी झुकते हैं लाखों नमन के लिए जान देते हैं जो भी वतन के लिए सिर्फ़ नारों से क्या होगा ऐ दोस्तो रौनक़े बख़्श दो अंजुमन के लिए मेरे बच्चों से उनकी ख़ुशी छीन ली और क्या चाहिए राहज़न के लिए पीठ पर गोलियाँ तुम…

  • कौन देता सहारा किसी को

    कौन देता सहारा किसी को कौन देता सहारा किसी कोलोग जीते हैं अपनी ख़ुशी को रश्क करने लगे तुझ से दुनियाइतना रंगीन कर ज़िन्दगी को इक मुसाफ़िर ने दिल में उतर करदिल से बाहर किया है सभी को मिन्नतें कर के तौबा भी कर लीछोड़िए आप अब बरहमी को झुक गये वक़्त के फ़ैसले पररोते…

  • सुकूँ | Ghazal Sukoon

    सुकूँ ( Sukoon ) कभी सच्चा ये मंज़र हो नहीं सकता ग़लत पथ पर कलंदर हो नहीं सकता अमर है इस जहां में प्यार सदियों से फ़ना ये ढाई आखर हो नहीं सकता दुआ माँ बाप की जिसने नहीं ली है सुकूँ उसको मयस्सर हो नहीं सकता मेरी इनकम ये मुझसे कहती है हर दिन…

  • मुंतज़िर रहता खुशी को | Ghazal Muntazir Rahta

    मुंतज़िर रहता खुशी को ( Muntazir Rahta ) मुंतज़िर रहता खुशी को मन बहुत कट रहा है गम भरा जीवन बहुत प्यार की खुशबू से मैं वीरान हूँ है कहीं उल्फ़त भरा गुलशन बहुत एक मैं हूँ प्यार से भीगा नहीं प्यार का बरसा कहीं सावन बहुत जिंदगी में भेज दे कोई हसीं जिंदगी में…

  • तुम्हारी बात का | Tumhari Baat Ka

    तुम्हारी बात का ( Tumhari Baat Ka ) तुम्हारी बात का जिस पर नशा है ।उठाने को तेरा घूंघट खड़ा है ।।१ नज़र भर देख भी ले जो तुम्हें अब ।कहाँ फिर होश में रहता खड़ा है ।।२ तुम्हें जो छू रही है बे-इजाजत ।वही मगरूर अब देखो हवा है ।।३ किसी के जो बुलाने…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *