Author: Admin

  • मां दुर्गा के प्रथम रूप | Maa Durga ke Pratham Roop

    मां दुर्गा के प्रथम रूप ( Maa durga ke pratham roop )    मां दुर्गा के प्रथम रूप पर, सारा जग बलिहारी शैलपुत्री मंगल आगमन, सर्वत्र आध्यात्म उजास । नवरात्र शुभ आरंभ बेला, परिवेश उमंग उल्लास । योग साधना श्री गणेश, साधक मूलाधार चक्र धारी । मां दुर्गा के प्रथम रूप पर, सारा जग बलिहारी।।…

  • लड़खड़ाये आज फिर | Ladkhadaye aaj Phir

    लड़खड़ाये आज फिर  ( Ladkhadaye aaj phir )    लड़खड़ाये आज फिर ये क्या हो गया। संभाल न पाया आज ये क्या हो गया। धीरज रहा न धर्म बचा बेचैनी सी छाई। स्वार्थी इंसां हुआ कैसी ये आंधी आई। टूटी माला आज फिर ये क्या हो गया। बिखर चले मोती फिर ये क्या हो गया।…

  • नवरात्र के प्रसाद में | Navratra

    नवरात्र के प्रसाद में ( Navratra ke Prasad mein )    सृजनात्मकता प्रस्सपुरण,नवरात्र के प्रसाद में परम काल चेतना जागरण, रज रज मांगलिक भोर । नव नौ रूप मां अनूप दर्शन, शक्ति भक्ति अलौकिक छोर । तमोगुणी शोध विवेचना, जय माता दी संवाद में । सृजनात्मकता प्रस्सपुरण, नवरात्र के प्रसाद में ।। आराधना शीर्ष स्पर्शन,…

  • मां नवदुर्गा | Maa Navdurga

    मां नवदुर्गा ( Maa Navdurga )  ( 1 )   नौ रूप में नौ दिनों तक होती माता की आराधना, जो भी पूजे इनको होती उसकी पूरी हर मनोकामना। समूचे जगत में फैली हुई है तेरी अनुपम महिमा, न होता कल्याण किसी का तेरी कृपा के बिना। हे माता शेरावाली हे माता जोतावाली, पूरी कर…

  • बात एक कॉल की | Baat ek Call ki

    बात एक कॉल की ( Baat ek call ki )    14 अक्टूबर 14:14 पर कॉल आया, उसी पर मैंने यह हास्य व्यंग बनाया । एक दिन दोपहर में आया मुझे फोन, घंटी उसकी सुनकर हो गया मैं मौन। देखा मोबाइल तो नॉर्मल कॉल आया था, पूजनीय सतीश जी ने कॉल लगाया था। कुछ पल…

  • वेश्याएं | Veshyaen

    वेश्याएं ( Veshyaen )    उनकी गलियों में, दिन के उजाले में जाना, सभ्य समाज को, अच्छा न लगता, इसलिए छद्म वेश में , रात्रि के अंधियारे में , छुप-छुप कर वह जाता है , सुबह दिन के उजाले में, सभ्यता का लबादा ओढ़े , सदाचरण पर भाषण देता, लोग उसे देवता समझ , फूल…

  • दशानन | Dashanan

    दशानन ( Dashanan )  ( 2)  जली थी दशानन की नगरी कभी कभी हुआ था वध रावण के तन का जला लो भले आज पुतले रावण के उसने चुन लिया है घर आपके मन का.. मर गया हो भले वह शरीर के रूप मे किंतु कर रहा रमन विभिन्न स्वरूप मे बसा ,हुआ खिल खिला…

  • प्रभु तुम आए | Prabhu tum Aaye

    प्रभु तुम आए ( Prabhu tum aaye )    प्रभु तुम आए , दीन हीन बनकर , हमारे द्वार, मैंने तुझे दुत्कारा , जलील किया, तुम कुछ ना बोले , मेरी सारी नादानियों को, सहते रहे, फिर लौट गये। मैं मंदिरों में , तुझे ढूंढता रहा, परंतु मंदिर के बाहर, कोढी का रूप रखकर ,…

  • राधा कान्हा के द्वार | Radha Kanha ke Dwaar

    राधा कान्हा के द्वार ( Radha kanha ke dwaar )    फिर से  खड़ी  हुई  है  राधा  आ कान्हा के द्वार । माँग  रही है  उससे  अपने , सारे  ही  अधिकार ।। वापस करे कन्हैय्या गोकुल से चोरी की खुशियाँ और चुकाए  वृन्दावन का, पिछला  सभी उधार ।। महका रचा बसा खुशबू सा फिर भी…

  • मुझे मत तौलों | Mujhe mat Toulo

    मुझे मत तौलों ( Mujhe mat toulo )   मुझे मत तौलों , ईश्वरत्व से, मैं मनुष्य ही बने रहना चाहता हूं, जिसके हृदय में हो , मां जैसी ममता , पिता जैसा साथी, बहन जैसा स्नेह , जो हर दुखित प्राणी के, आंसुओं को पोछ सके , जिसके अंतर में हो , पद दलितों…