काश! कर्म न जाने ,धर्म न जाने फिर सोचे यही बातकाश ! ये करता ,काश! वो करताकाश ! ये होता, काश ! वो होताकाश -काश कश्मकश में उलझा है इंसान ,माया के इस चक्रव्यूह में फंसा हुआ है नादान। सत्य ना बोले ,नित्य ना होवे,फिर सोचे यही बातकाश ये सुनता ,काश वो सुनताकाश ये होता,…