Badalte Dekha

बदलते देखा | Badalte Dekha

बदलते देखा

( Badalte dekha )

 

हमने मौसम को कई रंग बदलते देखा
वक्त हाथों से कई बार निकलते देखा।

जिन निगाहों में थी आबाद मुहब्बत मेरी
ग़ैर का ख़्वाब उसी आंख में पलते देखा।

जो मेरा दोस्त था वो आज मुख़ालिफ़ यारो
बात बेबात ज़हर उसको उगलते देखा।

वो मुसव्विर हो सिकंदर हो या के हो शायर
हुस्न की ताब से हर शख़्स पिघलते देखा।

वसवसों और बदगुमानियों से बचना तुम
आतिशे शक से कई रिश्तों को जलते देखा।

बन के फ़िर ‘औन नहीं आंकना कमतर सब को
हमने सूरज को यहां शाम को ढलते देखा।

ज़िक़्र मेरा हो तो मौज़ू ही बदल देता है
उस दिवाने को नयन आज सॅंभलते देखा।

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

नये इस साल में | Naye is Saal Mein

Similar Posts

  • तेरी दीद के बाद | Teri Deed ke Baad

    तेरी दीद के बाद ( Teri deed ke baad ) जहां में कुछ नहीं नायाब तेरी दीद के बाद कहाँ से आये कोई ख़्वाब तेरी दीद के बाद है बेख़बर दिल-ए-बेताब तेरी दीद के बाद जमाल-ए-मस्ती-ए-गरक़ाब तेरी दीद के बाद बनाने वाले ने तुझको बना के जब देखा बनाये फिर कई गिर्दाब तेरी दीद के…

  • आप भी | Ghazal Aap Bhi

    आप भी ( Aap Bhi ) ह़ुज़ूर आप भी कैसा कमाल करते हैं। ज़रा सी बात पे लाखों सवाल करते हैं। सितम ये कैसे वो ज़ोहरा जमाल करते हैं। हर एक गाम पे हम से क़िताल करते हैं। अजीब ह़ाल रक़ीबों का होने लगता है। वो जब भी बढ़ के हमारा ख़याल करते हैं। हमेशा…

  • हमको नसीब अपना यहाँ ग़मज़दा मिला

    हमको नसीब अपना यहाँ ग़मज़दा मिला हमको नसीब अपना यहाँ ग़मज़दा मिलाहर रोज़ इक नया ही हमें मसअला मिला उल्फ़त कहाँ थी अपनों से तेग़-ए-जफ़ा मिलाचाहत बहुत थी यार न हर्फ़-ए-दुआ मिला नालायकों को जब किया घर से है बेदखलअपना ही ख़ून हमको ये फिर चीख़ता मिला बूढ़े शजर को छोड़ के सब लोग चल…

  • रोज़ होठों पर ये दुआ आज़म | Hothon Par ye Dua Aazam

    रोज़ होठों पर ये दुआ आज़म ( Roz hothon par ye dua Aazam )    प्यार में वो हुआ जुदा आज़म कर गया खूब दिल ख़फ़ा आज़म ग़ैर आँखें वो कर गया वो आज वो रहा अब न आशना आज़म ज़हर मुझको मिला जफ़ा का ही प्यार की कब मिली दवा आज़म जुल्म सहता रहा…

  • देख तो सही | Dekh to Sahi

    देख तो सही ( Dekh to Sahi ) कोई भी रह न जाए कसर देख तो सहीचल छोड़ बात चीत मगर देख तो सही रख कर मुझे वो ढूँढ रहा है यहाँ वहाँचिल्ला रहा हूँ कब से इधर देख तो सही नाज़ुक सी शै पे बार-ए-क़यामत है किसलिएयारब तरस खा सू-ए-कमर देख तो सही हैरत-ज़दा…

  • वो नहीं | Ghazal Wo Nahi

    वो नहीं ( Wo Nahi ) ये असल है वो नहीं ये नकल है वो नहीं घास वो गेहूं है ये ये फ़सल है वो नहीं आदमी दोनों हैं पर ये सरल है वो नहीं फर्क दोनों में है क्या ये तरल है वो नहीं फूल हैं दोनों “कुमार” ये कमल है वो नहीं कुमार…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *