कहानियां

  • डिग्रीवाद | Degreebaad

    सुभाष एक विद्यालय में शिक्षक हैं। एक दिन प्रबंधक ने उन्हें बुलाकर कहा ,-“इस बार विद्यालय का रिजल्ट शत प्रतिशत होना चाहिए। यदि हम ऐसा कर देते हैं तो हमारे विद्यालय का नाम बहुत बढ़ जाएगा। इसी के साथ एडमिशन की संख्या भी बढ़ जाएगी।” आगे प्रबंधक ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए…

  • अरे पीयूष पहचाना मुझे | Pehchana Mujhe

    बात बहुत पुरानी हैं, मैं वृंदावन में बाँके बिहारी के दर्शन करने के लिये अकेला ही जा रहा था,सामने से आ रही एक बहुत सुंदर सी गाड़ी जिसको एक महिला चला रही थी, अचानक मेरे पास आ कर रुकी, शीशा नीचे करके बोली आप पीयूष हैं ना, मैं बोला, हाँ मैं पीयूष हूँ । उसने…

  • उजाले की ओर | Ujale ki Aur

    मनीष और उसकी बहन साक्षी दोनों ही शिक्षक हैं। उनमें समाज में व्याप्त मूढताओं पर अक्सर बहस किया करते थे। उन्हें लगता था कि बच्चों को स्कूल में यदि हम रोजाना कुछ न कुछ अंधविश्वास के बारे में जानकारी देते हैं तो वे धीरे-धीरे उनमें असर होने लगेगा। अगले दिन जब मनीष विद्यालय गया तो…

  • टोना- टोटका | Tona- Totka

    अनिल जी एक विद्यालय में प्रधानाध्यापक हैं। वे समाज में व्याप्त रूढ़ियों से बच्चों को बचाने के लिए अक्सर वे बच्चों से इस विषय पर चर्चा करते रहते हैं। एक दिन उन्होंने देखा कि बहुत से बच्चे काली-काली ताबीज गले में बांधे हुए हैं। कुछ हाथ में भी बांधे हैं। उन्होंने सुमित नाम के लड़के…

  • मौत के सौदागर | Maut ke Saudagar

    “ऐ कौन है जो मुझसे टक्कर ले सकें,! किसी माई के लाल में हिम्मत नहीं हैं कि मुझसे मुकाबले कर सकें।” सुदेश चौराहे पर आऊ बाऊ बक रहा था। रोज सायं काल में 9:10 बजे रात तक वह चौराहे पर नशे में घूमता रहता है। इसका अधिकांश समय नशे में ही डूब जाता है। वह…

  • लाइसेंसी लुटेरे | Licensee Lootere

    “अम्मा सुनो ना! राहुल का एक्सीडेंट हो गया है!” उसकी बहन बदहवास अपनी मां से कह रही थी। पूरे घर में अफरा तफरी मच गई। उस समय घर में ना राहुल के पिता थे ना ही उसके चाचा। घर में बस उसकी मां, बड़ी बहन एवं दादी थी। क्या करें ? कैसे करें? किसी को…

  • बंधन | Bandhan

    पात्र = 20 वर्ष की नवयौवना किट्टो (नायिका) 21 वर्ष रॉय (विलेन) 22 वर्ष साहित्यिक नवयुवक (नायक) किट्टो 20 वर्ष की खुशमिजाज एक चुलबुली अपनी मुस्कान की खुशबू से फूलों की भाति सबके दिलों में एक उमंग जगा देने वाली नवयौवना। उसके केशों की लट हवा के झोंके से कभी माथे के इस ओर आ…

  • शुभ अशुभ | Shubh Ashubh

    परमात्मा का बनाया प्रत्येक दिन शुभ होता है इसलिए प्रत्येक दिन ही एक से बढ़कर एक सुंदर और पवित्र दिन है ईश्वर महान है इसलिए उसकी कृतियां भी महान है। पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य कहते हैं कि मनुष्य को चाहिए प्रत्येक दिन को शुभ माने। शुभ कर्मों के लिए हर दिन शुभ का है और…

  • अंधश्रद्धा | Andhashraddha

    हिंदू समाज में जितनी अंध श्रद्धा है उसका क्या कहा जाए? अपने सैकड़ो देवी देवताओं को छोड़कर के न जाने लोग क्यों मजारों पर जाते हैं। हमारे गांव के पास सिकंदरा नामक जगह में एक गाजी मियां की मजार है। जहां पर आसपास के गांव के हिंदुओं को जब तक इतवार और बुधवार को सिन्नी…

  • मूहूर्तवाद | Muhurtvad

    आज जहां देखो वही मुहूर्त बताने वाले भविष्यवक्ताओं की लाइन लगी हुई है। सुबह-सुबह जब हम टीवी खोलते हैं तो यह भविष्यवक्ता जिनके खुद के भविष्य का कुछ नहीं पता संसार के भविष्य को बताते फिरते हैं। इन भविष्यवक्ताओ ने जितना नुकसान किया है हो सकता है और किसी ने नुकसान नहीं किया हो। देश…