• नारी स्वरूप | Kavita Nari Swaroop

    नारी स्वरूप ( Nari Swaroop )   नारी तू एक मगर रूप अनेक। नारी तुम्हारी हाथों में , घर बाहर दोनों सुसज्जित । मां काली सदृश नारी शक्तिशाली , महालक्ष्मी घर की बजट करती पेश । ऐसी प्रबल नारी को प्रणाम । गरिमय व्यक्तित्व को नमस्कार। नारी शक्ति का तू अभिमान है, जन-जन का तुम…

  • फेसबुक | Facebook par Kavita

    फेसबुक ( Facebook ) फेसबुक ,सामाजिक संवाद का अवतार वर्तमान समय प्रौद्योगिकी, मनुज जीवन अभिन्न अंग । भौगोलिक सीमाएं विलोपित, वसुधैव कुटुंबकम् मंत्र संग । मार्क जुकरबर्ग परम योगदान, श्री गणेश बेला दो हजार चार । फेसबुक, सामाजिक संवाद का अवतार ।। अभिव्यक्ति प्रस्तुति अनंत अवसर, लेख कहानी कविता माध्य । वीडियो रील अनूप युक्ति,…

  • जनता जनार्दन | Kavita Janta Janardan

    जनता जनार्दन ( Janta Janardan ) भोली भाली जनता भटक रही इधर उधर सीधी सादी जनता अटक रही इधर उधर बहुरुपिए बहका रहे बार-बार भेष बदल जाति जाल मे खटक रही इधर उधर नये इरादे नये वादे झूठे झांसों में झमूरे मदारी में मटक रही इधर उधर नोटंकी होती ग़रीबी हटाने की हर बार पांच…

  • त्रिकालदर्शी बाबा | Kahani Trikaldarshi Baba

    भारतीय समाज में पाखंड और अंधविश्वास इतना फैला है कि कौन सच्चा कौन झूठा इसका निराकरण करना बड़ा मुश्किल है। ऐसे लोग समाज में अंधविश्वास एवं पाखंड फैलाकर और गर्त में डाल देते हैं। यही कारण है कि भारत में वैज्ञानिक प्रतिभा का विकास नहीं हो पाता है। सुदेश नामक एक बालक समाज से ऐसे…

  • दिखती नहीं | Ghazal Dikhti Nahi

    दिखती नहीं ( Ghazal Dikhti Nahi )   ग़ालिबन उनके महल से झोपड़ी दिखती नहीं I इसलिए उनको शहर की मुफ़लिसी दिखती नहीं II लाज़िमी शिकवे शिकायत, ग़ौर तो फरमा ज़रा I आख़िरश उनकी तुम्हे क्यों बेबसी दिखती नहीं I पेट ख़ाली शख्त जेबें पैरहन पैबंद तर I फिर उसे संसार में कुछ दिलकशी दिखती…

  • शिकायत न शिकवा | Ghazal Shikayat na Shikwa

    शिकायत न शिकवा ( Shikayat na Shikwa ) चलो अब रहा तुम से वादा हमारा, पलटकर ना तुमको देखेंगे दोबारा ! मुसीबत में डाले खुदी को खुद से, दिखाया मुहब्बत ने कैसा नज़ारा ! टूटे है कहाँ से कैसे हम बताये, हुआ कैसा दिल का ख़सारा ख़सारा ! नहीं है शिकायत न शिकवा किसी से,…

  • चुनावी दंगल | Kavita Chunavi Dangal

    चुनावी दंगल ( Chunavi dangal ) देश चुनावी दंगल की चपेट में भाषणों,वायदों,कसमों के लपेट में मग्न हैं नेतागण लहरदार । जनता सुन रही मनभावन सम्बोधन टकटकी लगाए बैठे स्वप्नदर्शी की तरहा चुनावी हलचल की दलदल से आहत कराहते एक कुत्ता हुआ बेचैन भीड चीर कर लपका मंच को कुत्ते ने नेता को कोसा काटा…

  • वतन की ख़ातिर | Watan ki Khatir

    वतन की ख़ातिर ( Watan ki Khatir )   वतन की ख़ातिर लड़ने चले हम मुहब्बत देश से इतनी करे हम मिटे देंगे अदू अपने वतन के अमन के ही रखेंगे सिलसिले हम न सरहद पार दुश्मन कर सके है करेंगे बंद वो हर रास्ते हम कहाँ तू भागकर अब तो जायेंगा मिटा देंगे अदू…

  • समय के साथ | Kavita Samay ke Sath

    समय के साथ ( Samay ke Sath )   रहता है वक्त जब मुट्ठी में तब बढ़ जाता है अभिमान कुंजी ताली हाथ में अपने दुनिया लगती धूल समान बदल जाती सब बोली भाषा जुड़ती जाती नित नव आशा चल पड़ते हैं तब पाने को गगन बढ़ती रहती मन की अभिलाषा नज़रों से हो जाता…

  • मेघवाल समाज | Meghwal Community

    मेघवाल समाज मेघवाल क़ौम बड़ी मेह़़नतकश अध्यात्मिक दयालू प्रवृति की सादगी पसंद हुनरमंद रही है पुरूष ऊनी सूती की बुनाई का काम एंव यदाकदा चमड़े की जूतियां तक बनाने का कार्य कर अपने परिजन की जीविका उपार्जन करते है तथा महिलाऐं कपड़े पर अपनी हस्तकला में दक्ष कशीदाकारी (भरत) का बेजोड़ काम करती है ।…