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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Rajasthan Sthapana Divas
    विवेचना

    राजस्थान स्थापना दिवस | Rajasthan Sthapana Divas

    ByAdmin March 22, 2024

    राजस्थान राज्य विविधताओं में एकता का प्रतीक है। यहाँ विभिन्न धर्म के लोग अनुयायी भिन्न – भिन्न भाषा बोलते हुए भी सद्भावना प्रेम से अपना जीवन यापन करते हैं। 30 मार्च को राजस्थान का स्थापना दिवस भी कहा जाता है। इसलिये हर वर्ष यह आज के दिन राजस्थान स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता…

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  • Khudgarzi
    कविताएँ

    खुदगर्जी | Khudgarzi

    ByAdmin March 22, 2024

    खुदगर्जी ( Khudgarzi )   चाहते हो मोल कामयाबी का तो करो कुछ ,कि और भी हों आपसे बनकर तो देखो रहनुमा तुम करोगे राज दिलों में सभी के तुम जीत कर भी हार जाते हैं वो करते हैं गिराकर जो जीत हासिल या छोड़कर साथी को अपने वे हारे हुए हि हैं हर दौड़…

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  • Shabd Pranay
    कविताएँ

    शब्द प्रणय | Shabd Pranay

    ByAdmin March 22, 2024March 22, 2024

    शब्द प्रणय  ( Shabd Pranay )   शब्द प्रणय में,संवर रही कविताई उर भाव मृदुल मधुर, श्रृंगार अनूप नित यथार्थ । संवाद अनुपम मोहक प्रभा, साधन साध्य ध्येय परमार्थ । अथाह नैतिक तेजस्वी छवि, संस्कारी अनुपमा जनमानस छाई । शब्द प्रणय में,संवर रही कविताई ।। भव्य नवाचार अवबोधन , नवल धवल पथ प्रशस्त । निशि…

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  • Poem Hey Kavi
    कविताएँ

    हे कवि कुछ ऐसा गीत लिखो | Poem Hey Kavi

    ByAdmin March 22, 2024

    हे कवि कुछ ऐसा गीत लिखो ( Hey Kavi Kuch Aisi Geet Likho )    आशा को नव-विश्वास मिले। प्राणों को प्रखर प्रकाश मिले। टूटती आस्था को संबल, भावों को विशद विकास मिले। मिट जाय जगत से नग्न कुरुचि, तम पर प्रकाश की जीत लिखो। हे कवि! कुछ ऐसा गीत लिखो। मिट जाय दंभ की…

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  • विश्व कविता दिवस | World Poetry Day
    कविताएँ

    विश्व कविता दिवस | World Poetry Day

    ByAdmin March 22, 2024

    विश्व कविता दिवस  ( World Poetry Day )   अल्फाज़ का जामा तो मैंने पहनाया था जज्बात को ,एहसासों को तो मैंने ही पिरोया था दिल से निकाल पन्नों पर तो मैंने उकेरा था तुझसे कैसे ये मेरे रूबरू हुये मेरे ही दिल में रहे और चोरी किये या था तुझको पता कि ये थे…

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  • कविता कभी हँसाती कभी रुलाती | Kavita Kabhi Hasati
    कविताएँ

    कविता कभी हँसाती कभी रुलाती | Kavita Kabhi Hasati

    ByAdmin March 22, 2024March 22, 2024

    कविता  ( Kavita )   कविता कभी हँसाती है, कविता कभी रुलाती है, सामाजिक कुरीतियों पर कविता प्रहार कराती है! कविता संवेदना लाती है, कविता वेदना दिखाती है, समाज को जागरूक करके कविता चेतना दर्शाती है। कविता प्रेम बरसाती है, कविता समर्पण जगाती है, प्रतिशोध की ज्वाला जला कविता अगन भड़काती है। कविता आत्ममंथन है,…

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  • Kavita Adhurapan
    कविताएँ

    अधूरापन | Kavita Adhurapan

    ByAdmin March 21, 2024

    अधूरापन ( Adhurapan )   कर लो कितनी है पूजा अर्चना नहा लो भले गंगाजल से सोच मगर मैली ही रही रहोगे दूर ही तुम कल के फल से से परिधान की चमक से व्यवहार में चमक आती नहीं कलुषित विचारों के साथ कभी बात सही समझ आती नहीं पढ़ना लिखना सब व्यर्थ है भर…

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  • Kaisa yeh Zamana
    शेरो-शायरी

    कैसा यह ज़माना | Kaisa yeh Zamana

    ByAdmin March 21, 2024

    कैसा यह ज़माना ( Kaisa yeh Zamana )   देखो न अब आ गया है यह कैसा ज़माना, हर कोई जुटा है छिनने में दूसरों का दाना, काटके दरख़्तों को बनाया अपना बिछौना, बेघर कर छिन लिया परिंदों का आशियाना, सुबह घर से निकले तो शाम को लौटेंगे ही, घरका हश्र देख रुके कैसे उनका…

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  • खेवनहार | Sansmaran Khevan Haar
    संस्मरण

    खेवनहार | Sansmaran Khevan Haar

    ByAdmin March 21, 2024

    आज मैं एक विद्यालय में गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य जी सिगरेट के कस ले रहे थे। तब से दूसरे अध्यापक भी बीड़ी का बंडल निकाल कर बांटने लगते हैं। और फिर शुरू हो जाता है जाम का दौर। ऐसा लगता है कि भठ्ठे की चिमनी विद्यालय में लग गई हो। धुआं से पूरा प्रधानाचार्य कक्ष…

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  • क्या खोया, क्या पाया
    कविताएँ

    क्या खोया क्या पाया | Kya Khoya Kya Paya

    ByAdmin March 20, 2024March 20, 2024

    क्या खोया क्या पाया ( Kya Khoya Kya Paya )   उन गलियों से जब भी गुजरी आँखों मे अश्रुधार लिये सोच रही थी चलते-चलते कि—- यहाँ मैंने क्या खोया, क्या पाया है। पाकर सब कुछ फिर सब कुछ खोना क्या यही जिंदगी का फ़लसफ़ा है जब है फिर ये खोना या फिर पाना तो…

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