Shabd Pranay

शब्द प्रणय | Shabd Pranay

शब्द प्रणय 

( Shabd Pranay )

 

शब्द प्रणय में,संवर रही कविताई

उर भाव मृदुल मधुर,
श्रृंगार अनूप नित यथार्थ ।
संवाद अनुपम मोहक प्रभा,
साधन साध्य ध्येय परमार्थ ।
अथाह नैतिक तेजस्वी छवि,
संस्कारी अनुपमा जनमानस छाई ।
शब्द प्रणय में,संवर रही कविताई ।।

भव्य नवाचार अवबोधन ,
नवल धवल पथ प्रशस्त ।
निशि दिन सवित मार्गदर्शन,
बाधा समाधानिक शिकस्त।
नैराश्य तिमिर मूल पटाक्षेप,
आशा उमंग ज्योत जलाई ।
शब्द प्रणय में, संवर रही कविताई ।।

कर्म धर्म आस्था विश्वास,
सविनय सहृदय अभिनंदन ।
अर्थ पर्याय अमृत सुधा,
सर्वत्र सरित आनंद अभिवंदन ।
दैनिक जीवन शिष्टता अभिषेक,
व्यवहारिकी अंतर विमल मिताई ।
शब्द प्रणय में, संवर रही कविताई ।।

सहज सजग पुनीत दृष्टि ,
चाह स्वच्छ स्वस्थ परिवेश ।
नित्य प्रहरी स्नेह प्रेम बंधुत्व,
परिवार समाज संस्कृति देश ।
शंखनाद सेतु सकारात्मक सोच,
प्रीत रीत सदा निभाई ।
शब्द प्रणय में, संवर रही कविताई ।।

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

Similar Posts

  • सूर्य पर हनुमंती उड़ान | Aditya-L1 Mission

    सूर्य पर हनुमंती उड़ान ( Surya par hanumanti udaan )    इसरो के आदित्य एल 1 ( Aditya-L1 ) मिशन की श्री गणेश बेला पर अनंत हार्दिक शुभकामनाएं आज इसरो भर रहा, सूर्य पर हनुमंती उड़ान चंद्रयान तीन सफलता, अनंत खुशियां चारों ओर । अब लक्ष्य विशाल सौर पिंड, इसरो अदम्य साहस सराबोर । दिनकर गहन…

  • इन्वेस्टमेंट | Investment

    इन्वेस्टमेंट ( Investment )    स्टॉक मार्केट इन्वेस्टमेंट में बड़ी रिस्क होती है, किंतु हिंदी में निवेश में ज्ञान में वृद्धि होती है। एक ही शब्द के अलग-अलग मायने नज़र आते हैं, पर्यायवाची समानार्थी शब्दों में हम खो जाते हैं! तुकांत अतुकांत कहानी कविता ग़ज़ल लिखते हैं, दोहा छन्द चौपाई लेख धनाक्षरी में भी मन…

  • आओ म्हारा राजस्थान मं | Rajasthan diwas special kavita

    आओ म्हारा राजस्थान मं ( Aao mhara Rajasthan ma )   रंग रंगीलो प्यारो म्हारो धोरा रो राजस्थान वीरा री आ धरती मीठां मोरां रो राजस्थान   मरुधरा हेत घणो उमड़ै ईं धोरा री मुस्कान मं पलक पांवड़ा राह बिछावा आओ म्हारा राजस्थान मं   राणा सांगा कुंभा जनम्या राणा प्रताप री आन अठै जौहर…

  • लघुदीप | Kavita Laghudeep

    लघुदीप ( Laghudeep ) सघन तिमिर में तिरोहित कर देती है कक्ष में नन्हीं-सी लौ लघुदीप की। टहनी में आबद्ध प्रसुन बिखर जाते है धरा पर सान्ध्य बेला तक पर असीम तक विस्तार पाती है– उसकी गंध। रहता है गगन में चन्द्र पर, ज्योत्सना ले आती है उसे इला के नेहासिक्त अंचल तक बाँध उसके…

  • देवनागरी | Kavita Hindi Bhasha Par

    देवनागरी ( Devanagari )   करत कलोल बोल कोयल सी अनमोल, ढोल बावन ढंग की बजावति देवनागरी।     खड्ग उठाइ शव्द भानु के जगाई तब, सबही केज्ञान सिखावति देवनागरी।।     गगन जनन मन अति हरषत जब , अवनि के स्वर्ग बनावति देवनागरी।     घनन घनन घन दुंदुभी बजावन लागे, शेष हिंदी बूंद…

  • हिन्द का तिरंगा | Tiranga

    हिन्द का तिरंगा ( Hind ka tiranga )    हे ध्वज तेरा क्या बखान करूं तू लागे बड़ा चंगा, हिंदू-मुस्लिम सिख-ईसाई सबका प्यारा तिरंगा। नीले अंबर में लहराता हुआ तू लगता हमें प्यारा, सारे विश्व में गौरवान्वित करता हिंद का तिरंगा।‌। देश प्रेम का दे रहा है तू जन-जन को यह संदेश, मिल-झुलकर रहो आपस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *