• लवली | Kahani Lovely

    लवली कुछ गुमसुम सी बैठी है। उसे न जाने क्या हो गया है कि सारे घर में धमाल मचाने वाली किस सोच में डूबी है । मां को देखते ही प्रश्नों की झड़ी लगा देती है – अम्मा अम्मा आप क्यों मांग में सिंदूर लगाती हो ? मुझे क्यों नहीं लगाती ? हम कान क्यों…

  • होलिया में रंग कइसे बरसी | Holiya me

    होलिया में रंग कइसे बरसी?   सइयाँ जी हमार गइलन टर्की हो, होलिया में रंग कइसे बरसी। (4) केहू न केहू हमरे गलवा के रगरी, कब कै भरल बाटे हमरो ई गगरी। हमरो ई गगरी हो,हमरो ई गगरी, हमरो ई गगरी हो,हमरो ई गगरी, चोलिया से रंग कइसे छलकी हो, होलिया में रंग कइसे बरसी।…

  • मेरा अस्तित्व मेरी पहचान | Mera Astitva

    मेरा अस्तित्व मेरी पहचान ( Mera astitva meri pehchaan )   मेरा अस्तित्व मेरी पहचान, मेरा विश्वास मेरा अभिमान। मेरी हिम्मत हौसलों से डरते, बाधाएं आंधी और तूफान। मेरी धडकनें मेरी जान, सत्य सादगी है ईमान। मेरी कलम लिखती सदा, देश भक्ति स्वर राष्ट्रगान। मेरी सोच मेरे मन विचार, अपनापन और सदाचार। मेरे शब्दों में…

  • गीतों की गगरी | Geeton ki Gagari

    गीतों की गगरी ( Geeton ki Gagari ) गीतों की गगरी छलका कर,सर्वत्र सुधा बरसाता हूँ। अपने अधरों पर प्यास लिये, औरों की प्यास बुझाता हूँ।। मैं सोम-सुधा पीने वाला ,खाली है मेरा घट-प्याला । सजती रहती है नयनों में ,मेरे सपनों की मधुशाला । साँसों की तालों पर छेडूँ ,मधुरिम गीतों की स्वर माला…

  • सभी के लिए | Sabhi ke Liye

    सभी के लिए ( Sabhi ke Liye )   चमकना है अगर जीवन में तो हर ताप को सहना होगा कहीं राम को श्याम, तो कहीं श्याम को राम कहना होगा जीवन पथ पर चलना होगा मौसम में भी हर मौसम है शामिल युग में भी हर युग के कर्म हैं दया ,धर्म ,क्षमता ,आतंक…

  • ख़ुदग़र्ज़ | Khudgarz

    ख़ुदग़र्ज़ ( Khudgarz )   जिनको सिर्फ़ ख़ुद की आवाज़ सुनाई देती, जिन्हें सिर्फ़ अपना किया ही है दिखाई देता, ऐसे बेहिस लोगों से फिर क्या ही है बोलना, वही अंधों के आगे रोना अपना दीदा खोना, वो अपनी ही ख़्वाहिशातों के ग़ुलाम होते हैं, अपनी ग़लती पेभी शाबाशी सरेआम लेते हैं, अब हमें नहीं…

  • आओ गोरी खेले होली | Khelen Holi

    आओ गोरी खेले होली ( Aao Gori Khelen Holi )   आओ गोरी होली खेले फागुन का महीना आया। मदमाता मधुमास मोहक प्यार भरा मौसम छाया। रस रंग अबीर उड़े भरकर पिचकारी रंग लगाएं। प्रीत भरे तराने मनभावन फागुन की फुहार गाए। लाल गुलाल गाल लगाए नाचे झूमे हम मुस्काए। होली आई होली आई घर…

  • सोच की नग्नता | Soch ki Nagnata

    सोच की नग्नता ( Soch ki Nagnata )   भरी गागर में और जल भरता नहीं बदल गई हो दिशा जिसकी वो तना सीधे खड़ा रहता नहीं लाख चाहकर भी आप सोच किसी की बदल सकते नहीं मिले हो जो संस्कार गर्भ से ही युवापन के बाद उसे सुधार सकते नहीं परिवार, पड़ोस ही देता…

  • तेरा शेष बचे | Tera Shesh Bache

    तेरा शेष बचे ( Tera Shesh Bache )   मेरा सभी नष्ट हो जाये, तेरा शेष बचे। महाशून्य के महानिलय में, तेरी धूम मचे। तब कोई व्यवधान न होगा। मान और अपमान न होगा। सुख-दुख, आशा और निराशा का कोई स्थान न होगा। मन की सभी कामनाओं में, तू ही मात्र रचे। मेरा सभी नष्ट…

  • काली मिर्च | Kavita Kali Mirch

    काली मिर्च  ( Kali Mirch )    काली है वह रूप से लेकिन है बहुत गुणकारी, प्रकृति की जो देन है पीड़ा हर लेती वो भारी। हर घर में मिल जाती है वो आसानी से हमारी, ज़ायका खाने में बड़ा देती दूर करती बीमारी‌।। दक्षिण भारत में ख़ासकर जिसकी खेती होती, उसके उत्पाद से जनता…