• इन अँखियों को समझाओ तो | In Ankhiyon ko

    इन अँखियों को समझाओ तो   किसे नहीं खेलें होली बताओ तो पुछती है कोयल बताने आओ तो सभी आये लेकिन वो नहीं आए इन अँखियों को भी समझाओ तो। इंतजार के दिन दिखाए बहुत तुम नहीं चाहिए था, सताए बहुत तुम कैसे करें तारीफ झूठे हम बोलो कहाँ कहकर अपनाए बहुत तुम। जैसे तैसे…

  • होली के रंग अपनों के संग | Holi Ke Rang

    होली के रंग अपनों के संग ( Holi Ke Rang Apno ke Sang )   प्रीत पथ अप्रतिम श्रृंगारित, नयनन खोज निज संबंध । उर सिंधु अपनत्व प्रवाह, पुलकित गर्वित जीवन स्कंध । उत्सविक आह्लाद चरम बिंदु, मंगल कामना परिवेश उत्संग । होली के रंग, अपनों के संग ।। चरण वंदन आशीष वृष्टि, सम वय…

  • होली की हलचल | Kavita Holi ki Halchal

    होली की हलचल ( Holi ki Halchal )   रंग -रंगीली होली आई रंगों की बौछार लाई उमंग की उफान उठाई उल्लास दिल में उगाई मजीर मन में बजाई बढ़उ देवर को बनाई रंगों की फुहार में भींगी है राधा कान्हां संग टेसू की बौछार में बौराया है बरसाना सारा डफ-मजीरे की थाप पर डूबा…

  • दास्तान ए दिल | Dastan-e-Dil

    दास्तान ए दिल ( Dastan-e-Dil )   चले जाओगे इक रोज दूर मुझसे चले जायेंगे दूर हम भि तुझसे फ़क्र है तब भी मुझे तुझ पर यादों में हम जरूर आयेंगे निभा लो आज जैसा भि चाहो करें क्या शिकवा गिला तुमसे भले सिवा दिल के हमारे न हुए इक रोज हम भी रूह में…

  • नन्हीं लाडली | Nanhi Ladli

    नन्हीं लाडली ( Nanhi Ladli ) अम्मा की लाडली…अब्बा की प्यारी थी मैं, थोड़ी नटखट सी…थोड़ी गुस्से वाली थी मैं, मेरे अपनों के दिलों पे बस मेरा ही राज़ था, उनके होंठों पर मुस्कान बनके खिली थी मैं, न जाने कितनी ही हसरतें पलकों पे सजे थे, जब अब्बा की दहलीज़ छोड़के चली थी मैं,…

  • राग रंग अनुपमा | Kavita Rag Rang Anupama

    राग रंग अनुपमा ( Rag Rang Anupama )   राग रंग अनुपमा, होली के पावन पर्व पर लोक आभा मोहक सोहक, सर्वत्र आनंद अठखेलियां । प्रेम बसंती चरम बिंदु, सुलझन गुत्थी पहेलियां । जननी जन्म धरा आह्लाद, लौटते कदमों पर गर्व कर । राग रंग अनुपमा, होली के पावन पर्व पर ।। अंतर्संबंध नेह अभिव्यंजना…

  • चकई की वापसी | ललित

    होली अंक के लिए रचनाएं मंगा कर जगह नहीं देना भी एक होली है। किसी के लिए उत्साह की होली तो किसी के लिए धुआं- धुआं कर जलने की होली। चिंता नहीं बस फिक्र कीजिए ना जनाब, चिंता कीजिएगा तो सूख कर लकड़ी हो जाइएगा, कोई काम नहीं आएगा।क्योंकि यहांँ मुँह देख कर गुलाल लगाया…

  • पर्व पर गर्व | Kavita Parv par Garv

    पर्व पर गर्व  ( Parv par Garv )   भले जली होलिका आज भी जल रही है जिंदा है आज भी हिरण कश्यप रावण आज भी जिंदा है बच गया हो प्रहलाद भले बच गई हों सीता भले अहिल्या को मिल गई हो मुक्ति तब भी आज भी स्थिति वही है खुशियां मनाएं किस बात…

  • रंगीन है मौसम | Rangeen hai Mausam

    रंगीन है मौसम ( Rangeen hai Mausam )   रंगीन है मौसम रंगीला है आलम फूलों से कलियों से कुछ रंग ले उधार इंतजार में तेरे मैं बैँठी तन मन संवार धीरे से हौले से चोरी से सबसे छुपते से ज़रा सा रंगवा लो खुदको थोड़ा सा रंग जाओ मुझको विरह की बदरंगियों को इँद्रधनुषी…

  • मन्नत | Poem Mannat

    मन्नत ( Mannat )   खूबसूरत है वो कुदरत मखमली लिबास हो जिसका, क्या मन्नत मांगू उस कुदरत से नाम ओंठो पर जिसका। मैं बात करूं तो कुदरत भी हैरानी की नज़र देखती है, छेड़-छाड़ हो रहा है कुदरत से क्या मायना रखती है। ग़ैर मुहज़्ज़ब है वो लोग जो कुदरत को अनदेखा करें, फ़ाजिर…