In Ankhiyon ko

इन अँखियों को समझाओ तो | In Ankhiyon ko

इन अँखियों को समझाओ तो

 

किसे नहीं खेलें होली बताओ तो
पुछती है कोयल बताने आओ तो
सभी आये लेकिन वो नहीं आए
इन अँखियों को भी समझाओ तो।

इंतजार के दिन दिखाए बहुत तुम
नहीं चाहिए था, सताए बहुत तुम
कैसे करें तारीफ झूठे हम बोलो
कहाँ कहकर अपनाए बहुत तुम।

जैसे तैसे मेरे लट बिखरे पड़े हैं
दरवाजे पर हम तेरे लिए खड़े हैं
तुम तो आओगे हर हाल में घर
सपने एक नहीं मैंने कितने गढ़े हैं।

Vidyashankar vidyarthi

विद्या शंकर विद्यार्थी
रामगढ़, झारखण्ड

यह भी पढ़ें :-

चकई की वापसी | ललित

Similar Posts

  • और कितना गिरेगा तू मानव | Mannav kavita

    और कितना गिरेगा तू मानव ? *****   और कितना गिरेगा तू मानव? दिन ब दिन बनते जा रहा है दानव। कभी राम कृष्ण ने जहां किया था दानवों का नाश! उसी भूमि के मानवबुद्धि का हो रहा विनाश। जहां बुद्ध ने दानवों को भी मानवी पाठ पढ़ाए थे, अष्टांगिक मार्ग पर चलना सिखाए थे।…

  • हरिशंकर परसाई | Harishankar Parsai

    हरिशंकर परसाई ( Harishankar Parsai )    बाईस अगस्त चौबीस में लिया जन्म जिला होशंगाबाद, दस अगस्त पिचानवे पाई वफात रहे जीवन भर आबाद। हंसते हैं रोते हैं, जैसे उनके दिन फिरे हैं संग्रह कहानी, जवाला और जल, रानी नागफनी नावल है उनकी जुबानी। प्रेमचंद के फटे जूते,आवारा भीड़ के खतरे ये भी संग्रह निबंध…

  • दिवाली पर

    दिवाली पर मिष्ठान की तश्तरीअब भरी ही रहती हैरंगोली भरी दहलीज़ भीअब सूनी ही रहती है रामा श्यामा करना हमेंअब बोझ लगने लगाबुजुर्गों का आशीर्वादअब बोर लगने लगा यह काल का प्रभाव है याभविष्य पतन की दिशावर्तमान का झूठा सुख याकल के समाज की दुर्दशा दिवाली महज़ त्यौहार नहींसंस्कृति मिलन का रुप हैजीवन को अचूक…

  • अपने ही घर में बेगाने लगते हैं | Kavita Apne hi Ghar mein

    अपने ही घर में बेगाने लगते हैं ( Apne hi ghar mein begane lagte hain )    मान मर्यादा इज्जत पाने में जाने कितने जमाने लगते हैं। कैसी करवट ली वक्त ने अपने ही घर में बेगाने लगते हैं। जान छिड़कने वाले ही हमको जानी दुश्मन लगते हैं। मधुर मधुर मुस्कान बिखेरे भीतर काले मन…

  • नग्नता | Nagnata

    नग्नता ( Nagnata )    नग्नता का विरोध तो सभी करते हैं किंतु, अपने ही घर से उभरती नग्नता को रोक नही पाते मां और बाबूजी के स्थान पर मॉम और डैड सुनने से स्वाभिमान गौरवान्वित होता है….. यहां आओ बेटा ,बैठ जाओ खड़े हो जाओ की जगह कम कम , सिट हियर, या स्टैंड…

  • कल्पना की उड़ान | Kavita Kalpana ki Udaan

    कल्पना की उड़ान ( kalpana ki udaan )    कभी लड़को पर ना करना गुरुर, ख़्याल रखें यही एक बात जरुर। लालन-पालन करके किया बड़ा, धूम-धाम से उसकी शादी किया।। बिटियाॅं पे कोई दिया नही ध्यान, कहतें रहें घर पर है बहुत काम। मांँ के संग तुम करना सब काम, पढ़ना नहीं ये लड़की का…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *