Holi Ke Rang

होली के रंग अपनों के संग | Holi Ke Rang

होली के रंग अपनों के संग

( Holi Ke Rang Apno ke Sang )

 

प्रीत पथ अप्रतिम श्रृंगारित,
नयनन खोज निज संबंध ।
उर सिंधु अपनत्व प्रवाह,
पुलकित गर्वित जीवन स्कंध ।
उत्सविक आह्लाद चरम बिंदु,
मंगल कामना परिवेश उत्संग ।
होली के रंग, अपनों के संग ।।

चरण वंदन आशीष वृष्टि,
सम वय सेतु हास्य परिहास ।
परिवार समाज राष्ट्र अंतर,
समता समानता हर्ष उल्लास ।
गुलाल अबीर रंग मध्य साध्य,
मुख प्रभा अथाह उत्साह उमंग
होली के रंग,अपनों के संग ।।

लाल वर्ण ऊर्जा उपवन,
हरित सदा प्रकृति स्नेही ।
नारी काया भूषण प्रियल,
पित उपासना घर द्वार गेही ।
नारंगी मिलनसारिता धारी,
गुलाबी प्रेम खुशी दया कंग ।
होली के रंग, अपनों के संग ।।

नील मंडल आध्यात्म ओज,
उज्ज्वल भविष्य राह बैंगनी ।
श्वेत शांति कृष्ण लालित्य संयमी,
केसरिया उर राष्ट्रभक्ति रागिनी ।
सर्व वर्ण सुख वैभव आनंद पुंज,
जीवन पथ नित मस्त मलंग ।
होली के रंग, अपनों के संग।।

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

Similar Posts

  • अहंकार | Ahankaar par kavita

    अहंकार ( Ahankaar )    किस बात का गुरूर,क्यों नर मगरूर तू। क्या तुमने कर दिया, क्यों नशे में चूर तू। गर्व ही करना कर, वतन की शान पर। बोल मीठे बोल प्यारे, हो जा मशहूर तू। मत कर अभिमान, नशे में होकर चूर। चंद सांसों का खेल है, जी ले भरपूर तू। हम हैं…

  • मधु-मक्खी | Madhumakhi par kavita

    मधु-मक्खी ( Madhumakhi )   मधु-मक्खी की महानता …..| 1.सौ शहर-सौ खेत गई, सौ कलियों से मुलाकात हुई | साथ मे लाखों साथी लेकर, सौ गलियों से शुरुवात हुई | मुख मे मधुरस भरकर, पहुँच गई अपने ठिकाने मे | दिन-रात मेहनत करती, लगती हैं शहद जुटाने मे | मधु-मक्खी की महानता …..| 2.फूलों से…

  • अलविदा | Alvida

    अलविदा ( Alvida )   मैने पल-पल गुजारा है, तेरे संग-संग बिताया है। तुझे अलविदा क्या कहना, तू दिल में समाया है। तुझे अलविदा…।। कुछ खट्टी मीठी बातों में, जिन्दगी को गुजारा है। यादों के सहारे जो मैने, हर पल दिल लगाया है। क्या परायों की आस करे, मेरे अपने तो अपने है, अपने के…

  • बच्चों के रिजल्ट आने लगे हैं | Bacchon ke Results

    बच्चों के रिजल्ट आने लगे हैं ( Bacchon ke results aane lage hain )    ना निराश, उदास हो अभी सफर है बाकी जो हार जाओ तुम उदास हो ना जाना रास्ते तो अनेक है उस पर बढ़ जाना असफलता होती है सफलता का पैमाना गिर गए डर ना जाना पूरी ताकत से उठना फिर…

  • बेटी का घर | Beti ka Ghar

    बेटी का घर ( Beti ka ghar )    बेटी का नहीं होता कोई अपना घर न्यारा, घर चाहे पिता का हो या पति का, होता है पराया। “पराये घर जाना है” से शुरू होकर, “पराए घर से आई है” पे खत्म हो जाता है ये फ़साना। जिसको बचपन से था अपना माना, बड़ा मुश्किल…

  • हक की बात | Haq ki Baat

    हक की बात ( Haq ki Baat ) पत्थर के सब देवता, पत्थर के जो लोग। होते सौरभ खुश तभी, चढ़ जाता जब भोग।। देकर जिनको आसरा, काटा अपना पेट। करने पर वो हैं तुले, मुझको मलियामेट।। टूटे सपना एक तो, होना नहीं उदास। रचे बढ़े या फिर करे, कोई नया प्रयास। अपने हक की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *