Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • होली पर्व | Holi Parv
    कविताएँ

    होली पर्व | Holi Parv

    ByAdmin March 16, 2024March 17, 2024

    होली पर्व ( Holi Parv )  ( 2 ) होली पर्व धर्म से निष्काम बनती आत्मा । होली पर्व पर धर्म से पल – पल होती विकसित आत्मा । होली पर्व पर धर्म से मन में समता सरसाये । होली पर्व पर धर्म से शुद्ध भावों के फूल खिले । होली पर्व पर धर्म से…

    Read More होली पर्व | Holi ParvContinue

  • Nawal Dhara
    कविताएँ

    ये नवल धरा है रसिकों की | Nawal Dhara

    ByAdmin March 16, 2024

    ये नवल धरा है रसिकों की  ( Ye Nawal Dhara Hai Rasiko Ki )    तुम लक्ष्मीकांत मैं रमाकांत, तुम गुणी पूज्य मैं भी हूं शांत। तुम हंसी ठहाकों की दुनिया, महफ़िल में रंग जमा जाना। ये नवल धरा है रसिकों की, तुम आकर पुष्प खिला जाना। मैं मनमौजी मतवाला गीतों में, फागुनी रस राग…

    Read More ये नवल धरा है रसिकों की | Nawal DharaContinue

  • दिल तो दिल है | Dil to Dil Hai
    ग़ज़ल

    दिल तो दिल है | Dil to Dil Hai

    ByAdmin March 16, 2024

    दिल तो दिल है ( Dil to Dil Hai )   चुभा हुआ है जो काँटा निकल भी सकता है ये दर्दनाक सा मंज़र बदल भी सकता है निज़ाम और भी चौकस बना दिया जाये तो हादसा कोई होने से टल भी सकता है इशारा देखिए हाकिम के आप लहजे का वो सारी भीड़ को…

    Read More दिल तो दिल है | Dil to Dil HaiContinue

  • Holi Aayi re Bhola Bhandari
    गीत

    होळी आई रे भोळा भंडारी | Holi Aayi re Bhola Bhandari

    ByAdmin March 15, 2024March 16, 2024

    होळी आई रे भोळा भंडारी ( Holi Aayi re Bhola Bhandari ) राजस्थानी धमाल   होळी आई रे भोळा भंडारी, भस्म रमा। होळी आई रे भांग घोटकर पीगो शंकर, आक धतूरा खागो। नाग लपेटयां नंद द्वार प, नीलकंठ जद आगो। कृष्ण कन्हैयो मदन मुरारी, मुरली मधुर बजाई रे। होळी आई रे भूत प्रेत पिशाच को…

    Read More होळी आई रे भोळा भंडारी | Holi Aayi re Bhola BhandariContinue

  • dvand
    कहानियां

    द्वंद | Dvand

    ByAdmin March 15, 2024

    वैसे वह एक हट्टा कट्टा नौजवान है । उसे जिम जाने का शौक बचपन से है । क्या मजाल किसी को की उसको कोई नीचा दिखा कर चला जाए? मोहल्ले में ऐसी धाक जमाया है पट्ठा कि पूछो मत। सब उसे देवता समझते हैं देवता। परंतु इस देवता के हृदय में जलने वाली अग्नि को…

    Read More द्वंद | DvandContinue

  • Jijeevisha
    कविताएँ

    जिजीविषा सदा विजयंत | Jijeevisha

    ByAdmin March 15, 2024

    जिजीविषा सदा विजयंत   मानव जन्म सृष्टि पटल, अलौकिक अनुपम छवि । देवत्व प्रभा मुखमंडल, ओज पुंज सदृश रवि । स्नेह दया सहयोग मूल, सदा गमन नैतिकता पंत । जिजीविषा सदा विजयंत ।। दुःख कष्ट सम धूप छांव , प्रति पल परिवर्तन कारी । सुख आनंद नेह संविदा, धर्म आस्था अंतर धारी । जीव जंतु…

    Read More जिजीविषा सदा विजयंत | JijeevishaContinue

  • Gumnaam
    कविताएँ

    गुमान | Gumnaam

    ByAdmin March 15, 2024

    गुमान ( Gumnam )   रखिए ना गुमान किसी की मित्रता पर एक प्रतिशत ही होंगे खड़े जरूरत पर लेखक हो या शिक्षक करते हैं नमन केवल दरश पर अजीब सा बन गया है ढांचा समाज का मतलब से ही व्यवहार है आज का हमदर्दी के बोल ही रहते है अधर पर वक्त पर निकलता…

    Read More गुमान | GumnaamContinue

  • Aadmi ko Aadmi ka Sath
    कविताएँ

    आदमी को आदमी का साथ देना चाहिए | Aadmi ko Aadmi ka Sath

    ByAdmin March 14, 2024March 16, 2024

    आदमी को आदमी का साथ देना चाहिए ( Aadmi ko Aadmi ka Sath Dena Chahiye )   गिर पड़े लाचार कोई हमें हाथ देना चाहिए। आदमी को आदमी का साथ देना चाहिए। महक जाए महफिल सारी देख मुस्कान को। खुशियां झोली में सबकी नाथ देना चाहिए। झर झर मीठी वाणी है अघरों से रसधार बहे।…

    Read More आदमी को आदमी का साथ देना चाहिए | Aadmi ko Aadmi ka SathContinue

  • Koi Humko Rah Bata De
    कविताएँ

    कोई हमको राह बता दे | Koi Humko Rah Bata De

    ByAdmin March 14, 2024

    कोई हमको राह बता दे ( Koi Humko Rah Bata De )   कोई हमको राह बता दे, मिल जाए सुख चैन जहां। खुशियों के पल हमें ढूंढने, जाए तो हम जाएं कहां। बोलो नदिया पर्वत बोलो, नील गगन के सब तारे। अपनापन अनमोल खो रहा, रिश्ते टूट रहे सारे। प्यार भरे दो बोल मीठे,…

    Read More कोई हमको राह बता दे | Koi Humko Rah Bata DeContinue

  • Fareb
    कविताएँ

    फरेब | Fareb

    ByAdmin March 14, 2024

    फरेब ( Fareb )   गहराई मे डूबने से अच्छा है किनारे ही रह लिया जाय हालात ठीक नहीं हैं इस दौर के अब खामोश ही रह लिया जाय मर सी गई हैं चाहतें दिल की तलाशते हैं लोग वजह प्यार की फरेब मे ही लिपटा है शहर सारा खुद ही खुद मे क्यों न…

    Read More फरेब | FarebContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 269 270 271 272 273 … 838 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search