• आदमी बड़ा चाटुकार है | Aadmi Bada Chatukar

    आदमी बड़ा चाटुकार है! ( Aadmi Bada Chatukar Hai ) आदमी बड़ा चाटुकार है- स्वार्थ देखा नहीं; कि, झटपट चाटने लगता है। ऐसी-ऐसी चाटुकारी… आदमी-आदमी लेकर बैठा है; कि, वक्त आने पर… आदमी, आदमी को चाट लेता है। चाटुकारों की इस दुनिया में, आदमी इतना चाटुकार है- अपना काम निकल जाये, इसकी ख़ातिर… थूक तक…

  • मैं और मेरी तनहाई | Main aur Meri Tanhai

    मैं और मेरी तनहाई ( Main aur Meri Tanhai )   मिलने को तो मिला बहुत, पर मनचाहा न मिला। निद्रालस नयनों को सपनों ने है बहुत छला। बनते मिटते रहे चित्र कितने ही साधों के। दण्ड भोगता रहा न जाने किन अपराधों के, साॅसों की पूंजी कितनी ही, मैंने व्यर्थ गंवाई। बहुत बार भयभीत…

  • कैसे उड़े अबीर | Ude Abir

    कैसे उड़े अबीर ( Kaise Ude Abir )   फागुन बैठा देखता, खाली है चौपाल । उतरे-उतरे रंग है, फीके सभी गुलाल ।। ●●● सजनी तेरे सँग रचूँ, ऐसा एक धमाल । तुझमे खुद को घोल दूँ, जैसे रंग गुलाल ।। ●●● बदले-बदले रंग है, सूना-सूना फाग । ढपली भी गाने लगी, अब तो बदले…

  • मस्ती | Masti

     मस्ती  ( Masti )   रहा नहीं वह दौर अब कि आकार पूछेंगे कुछ आपसे आप बैठे रहे यूं ही हो गए हैं वह घोड़े रेस के सलाह लेने की आदत नहीं देने के फितरत है उनकी पढ़ी होंगी आप किताबें वो माहिर हैं डिजिटल के सिमट रही खबर आपकी अखबार के पन्नों में हो…

  • माई का आशियाना | Mai ka Ashiyana

    एक माई थी। जिसका अपना कच्चा मकान टूट कर गिर गया था। उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि घर को बना सके। जिसके कारण वह मड़ैया बनाकर किसी प्रकार गुजर बसर कर रही थी। पति को गुजरे धीरे-धीरे दशकों हो गए थे। जो भी कमाई हो रही थी। किसी प्रकार से घर में नून…

  • खेलत कन्हाई है | Khelat Kanhai hai

    खेलत कन्हाई है ( Khelat Kanhai hai )   नटवर नागर है तू प्रेम भरी सागर तु ग्वाल बाल संग फाग खेलत कन्हाई है छोरा छोरी जोरा जोरी’ मोरी है कलाई मोड़ी राधा रानी संग ‘रास खेलत कन्हाई हैं रंग डारे अंग अंग’ लहंगा व चोली तंग कान्हा खेले होरी’नाहीं मानत कन्हाई है गारी देवे…

  • बदगुमानी के धागे | Badgumani ke Dhage

    बदगुमानी के धागे ( Badgumani ke Dhage )   बदगुमानी के कुछ धागे गुथे-गुथे स्मृतियों के मोती बिखरे हुए जैसे किसी मियाद के किसी पृष्ठ में रखा सूखा गुलाब कोई अतीत-सा प्रतिचित्र कुछ चंद नज़्म कहीं रूठी-सी आधी अधूरी-सी। अनायास लिखते-लिखते कहीं से कोई सदा मन के शांत कोने में गुजर जाती है। ये तन्हा-सा…

  • पुनर्जन्म | Kahani Punarjanm

    ( 2 )  धीरे-धीरे महीने हो गए थे ।अभी बच्चे की आंख नहीं खुली ।उसके माता-पिता अपलक निहार रहें थे। उन्हें कुछ नहीं समझ में आ रहा था कि क्या किया जाए। बच्चे का शरीर सूख कर काटा हो चुका था। फिर भी माता-पिता की आशा थी कि मेरे लाल को कुछ नहीं होगा। मनुष्य…

  • सताया न कर | Sataya na Kar

    सताया न कर ( Sataya na Kar )   ज़ब्त रब का कभी आज़माया न कर बेवज़ह मुफ़लिसों को सताया न कर। है खफ़ा तो पता ये उसे भी लगे ख़ुद ब ख़ुद आदतन मान जाया न कर। रंजिशें दरगुज़र भी किया कर कभी तल्ख़ियां बेसबब यूं बढ़ाया न कर। तोड़ कर ख़्वाब ग़र तू…

  • हिफ़ाज़त वतन की | Watan par Shayari

    ( हिफ़ाज़त वतन की ) Watan par Shayari   करो हर क़दम पे हिफ़ाज़त वतन की करो सब वफ़ा से मुहब्बत वतन की अदू ख़ौफ़ खाए सदा भारत से ही बनो वो हमेशा ही ताक़त वतन की करे है मदद इक दूसरे की हमेशा बड़ी अच्छी है ही शराफ़त वतन की चलेगी मेरी सांस जब…