• Poem in Hindi on Lekhni | लेखनी

    लेखनी ( Lekhni )    जाती ही नही लेखनी कल्पना के लोक मे कैसे करूं श्रृंगार,समय के इस वियोग मे खमोशभाईं बच्चे,बेटियां भी हैं सहमी हुई अधरों पर आए हंसी कैसे,अपनों के शोक मे सुना था की ,देश को मिल गई है आजादी पर,हुए हैं आज़ाद कौन इस मुल्क में सिसक रही झोपड़ी,आज भी महलों…

  • बेहाल हर घड़ी | Behal har Ghadi

    बेहाल हर घड़ी ( Behal har ghadi )   बेहाल हर घड़ी बड़ी बेचैन जान है ये इश्क जानिए कि कड़ा इम्तिहान है। हैं मस अले तमाम ख़फा तिस पे वो हुए सर पर उठा के रखा हुआ आसमान है। सब मानते वो शख़्स नहीं ठीक है मगर हर दिल अज़ीज़ यूं है के मीठी…

  • भाई में फौजी बणग्यो

    भाई में फौजी बणग्यो   छोड़ गाॅंवा की खेती-बाड़ी भाई में फ़ौजी बणग्यो, मूॅंछ मरोड़ कर निकलूं हूॅं भाई में नौकरी लागग्यो। गैंती फावड़ों और खुवाडयो‌ं चलाबो अब भूलग्यो, सीमा पर करुं रखवाली बन्दूक चलाबो सीखग्यो।। कलतक कोई न पूछतो अब रुतबो म्हारो बढ़ग्यो, आबा लागी घणी-सगाईया आज में भी परणग्यो। जनटर मनटर बणर आउॅंला…

  • ढलती रात | Dhalti Raat

    ढलती रात ( Dhalti raat )   ढलती रात हुई अंधियारी, साहिब जी ना आए। धक-धक धड़के जिया हमारा, मन मेरा घबराए। सनम कहो रात कहां बिताए हाथों में मेहंदी रचके गौरी, कर कर सोलह सिंगार। कब आएंगे प्राण प्यारे, करती प्रियतम का इंतजार। ज्यों ज्यों रात बढ़े निशा, पून सन सन करती जाए। रस्ता…

  • आई लव यू | I Love You

    आई लव यू ( I love you )   आई लव यू के मर्म में, अपनत्व अमिय धार प्रेम जप तप लगन , तन मन मुदित भाव । निहार अक्स आकर्षण, जीवन सौम्य शीतल छांव । शब्द अर्थ अभिव्यंजना , हृदय श्रोत मधुरता अपार । आई लव यू के मर्म में,अपनत्व अमिय धार ।। अंतराल…

  • नया मोड़ | Naya Mod

    नया मोड़ ( Naya Mod )   आंखों में बसी है नमी खुदा क्यों हो रही हु मैं खुदसे जुदा चाहती हूं कोई दिल से लगाए हो रही हूं खुद मे ही जैसे गुमसुदा अजीब सा डर है दिल में समाया हुआ बोझ जिम्मेदारियों का भी आया हुआ रोने लगी हैं आंखें अब बहुत बस…

  • ज़िंदगी की रेस | Zindagi ki Race

    ज़िंदगी की रेस ( Zindagi ki race )    ज़िंदगी की रेस बहुत लंबी है, कभी धूप कभी छांव है, कभी फूलों भरी राह, तो कभी कांटों भरी राह में भी नंगे पांव है, कभी आज़ाद परिंदे सा, तो कभी हर तरफ़ बेड़ियां है, कभी हर तरफ़ खुशियों का सवेरा, तो कभी खुद से खुद…

  • कैसा धर्म | Kaisa Dharam

    कैसा धर्म ( Kaisa dharam )    भगवा तो कभी ‌हरा ओढ़ा दिया रंग हीन,उस दयादीन को कैसा कैसा जामा पहना दिया निर्गुण, निराकार को सब ने जाने क्या क्या अपनी मर्जी से आकार दिया सर्व भूत, सर्व व्यापी तुझे हमने कैद कर दीवारों में बांध दिया हे स्रष्टा ,जग केरचयिता तुझको ही सीमाओं से…

  • हिन्द का गौरव | Hind ka gaurav

    हिन्द का गौरव ( Hind ka gaurav )    भारत माता की सुरक्षा में जो लोग दे देते है जान, अमर हो जाते ऐसे लोग और ‌बन जाते है महान। अनेंक हुए ऐसे सैनानी जिन्होंने दिया है बलिदान, और कहलाएं ऐसे ही लोग भारत वर्ष की शान।‌। हिन्द का गौरव भी कहलाते ऐसे बहादूर जांबाज़,…

  • चाय भी क्या चीज है | Chai

    चाय भी क्या चीज है ( Chai bhi kya cheez hai )   चाय भी क्या चीज है, महफिलें महका देती है। बेगाने लोगों को भी, आपस में मिलवा देती है। वह भी क्या समां है, जब मिले हम तुम और चाय। कुछ इधर-उधर की बातें, गपशप और हैलो हाय। होठों की मिठास ही नहीं,…