• जीवन यह अनमोल | Jeevan ye Anmol

    जीवन यह अनमोल  ( Jeevan ye anmol )   भर सकते हो तो भर जाओ फूलों में कुछ रंग अगर नहीं तो ना फैलाओ यहाॅं वहाॅं दुर्गंध, बांट सको तो प्यारे बांटों प्यार सभी के संग अगर नहीं तो नहीं मिलाओ प्रेम रंग में भंग, बोल सको तो बोलो मीठी कोयल जैसी बोल अगर नहीं…

  • कुछ | Kuch

    कुछ ( Kuch )    चल आज कुछ सुनाती हूं लफ्जों मे अपने बया करती हूं ज़िंदगी का यह बहुत प्यारा अहसास है दूर होकर भी सब के दिल के पास है मानो खुशियों का मेला है, यह जीवन भी कहां अकेला है सब ने गले से लगाया है मुझे तोहफों से सजाया है मुझे…

  • मोहिनी नारी | Mohini Nari

    मोहिनी नारी ( Mohini nari )   आयुद्धों से भरे हुए भण्डार है मोहिनी नारी के। नयना तीर कमान बिछाये जाल है मोहिनी नारी के। माया ममता महबूबा से भाव है मोहिनी नारी के। अभी तो है शुरूवात अनेको रंग है मोहिनी नारी के। शतरूपा से शुरू हुआ संसार है मोहिनी नारी के। त्रिदेवी का…

  • जान से प्यारा वतन | Jaan se Pyara Watan

    जान से प्यारा वतन ( Jaan se pyara watan )   मुझे तो जान से प्यारा वतन है ? हसीं उल्फ़त भरा मेरा चमन है लड़े हैं दुश्मनों से सबकी खातिर कि मेरा सैनिको को ही नमन है बहारों में बहे जिसकी मुहब्बत हमारा मुल्क वो देखो फ़बन है कहीं होगी अदावत, तल्ख़ बातें मुहब्बत…

  • तमन्नाएं | Tamannayen

    तमन्नाएं ( Tamannayen )  निकला था आकाश को छू लेने की ख्वाहिश मे तमन्ना थी सितारों के साथ बादलों संग खेलूं चांद की धरती पर सूरज से बाते करूं पर, अचानक ही धरती डोल गई,और मैं गिरा गहरी खाई मे बहुत देर बाद समझा की मैं हनुमान नही था ऐसे ही ठंड की कंपकंपाती रातों…

  • मौसम ने बदला मिजाज़ | Mausam ne Badla Mizaaj

    मौसम ने बदला मिजाज़ ( Mausam ne Badla Mizaaj )   मौसम ने बदला अपना मिज़ाज हमने भी बदला अपना अन्दाज़। ऋतु यह आई सर्दी ली अगडाई हम सबके मन को ये बहुत भाई।। निकाल लिऐ सब कम्बल, रजाई मौसम भी बदला अब सर्दी आई। गैस चूल्हा आज हमको ना भाऐ लकड़ी जलाकर ये खाना…

  • एक तरफा प्रेम कहानी | Ek Tarfa Prem Kahani

    एक तरफा प्रेम कहानी ( Ek tarfa prem kahani )   वह केसर की क्यारी थी, लड़की नहीं फुलवारी थी। चाहता था जान से ज़्यादा मुझको लगती न्यारी थी। आँखें उसकी कजरारी थी, पहनी शिफॉन की साड़ी थी, हम कर चुके थे अपना इज़हार उसकी कहने की बारी थी। तुम्हारी नहीं हमारी थी, अप्सरा से…

  • दरिद्रता | Daridrata

    दरिद्रता ( Daridrata )   सुबह सबेरे तड़तड़ाहट की आवाज कानों में पड़ते ही नीद टूटी,मैं जाग पड़ा, देखा कि लोग सूप पीट पीट कर दरिद्र” भगा रहे थे घर के कोने-कोने से आंगन बाग बगीचे से, मैं समझ न पाया दरिद्र कहां है? कौन है? भागा या नहीं! दरिद्र मनुष्य खुद अपने कर्म से…

  • तुलसी विवाह | Tulsi Vivah

    तुलसी विवाह ( Tulsi vivah )   भजन कर भाव भक्ति से, शालिगराम आए हैं। सजा लो सारे मंडप को, प्रभु अभिराम आए हैं। सजी तुलसी होकर तैयार, तुझे वृंदावन जाना है‌। वृंदा कर सोलह श्रृंगार, द्वारिका नाथ रिझाना है। ठाकुर जी हो रथ पे असवार, बाराती झूमते गाते। बजे शहनाई तुलसी द्वार, चेहरे सबके…

  • एहतियात | Ehtiyat

    एहतियात ( Ehtiyat )   जिंदगी सफर ही नही एक विद्यालय भी है जहां हर लम्हे देने होते हैं इम्तिहान कर्म के अलावा भी भरने होते होते हैं सहायक पन्ने कभी वक्त साथ नही देता कभी हम पहचान नहीं पाते बगल से होकर निकल जाती हैं राहें और हम भटक कर ,आ जाते हैं फिर वहीं…