बदलाव | Badlav
बदलाव ( Badlav ) ( 2 ) मतलब के निकल जाते ही मिलने का ढंग बदल जाता है व्यवहार बदल जाता है पल भर मे ही ईमान बदल जाता है… प्रेम के मिल जाते ही फूल बदल जाता है बदल जाती हैं भावनाएं वह पुराना दिल बदल जाता है…. मिल जाए यदि कोई पद ऊंचा…
बदलाव ( Badlav ) ( 2 ) मतलब के निकल जाते ही मिलने का ढंग बदल जाता है व्यवहार बदल जाता है पल भर मे ही ईमान बदल जाता है… प्रेम के मिल जाते ही फूल बदल जाता है बदल जाती हैं भावनाएं वह पुराना दिल बदल जाता है…. मिल जाए यदि कोई पद ऊंचा…
हर ज़ुल्म पर अब प्रहार होगा ( Har zulm par ab prahaar hoga ) हर जुल्म पे तेरे अब प्रहार होगा हाॅं एक वार पे तेरे सौ बार होगा है चुनौती तुझे हद में रहने की तेरे वार से वार मेरा दमदार होगा हर जुल्म पे तेरे अब प्रहार होगा … तेरी करतब,कलाकारी अब…
ज़िन्दगी कविता ( Zindagi Kavita ) महज सांसों का खेल ही नही जिंदगी महज जीने का नाम ही नहीं जिंदगी जिंदगी तो एक वृहद विस्तार है सृष्टि का महज सीमित दृष्टि का ही नाम नही जिंदगी जिंदगी आकाश है तो पताल भी है जिंदगी किसी के दायरे मे कभी कैद नही जिंदगी मौसम की तरह…
परिवर्तन की अठखेलियों में ( Parivartan ki athkheliyon mein ) परिवर्तन की अठखेलियों में, खुशियों की रवानी है शाश्वतता अहम श्रृंगार, सृष्टि अलौकिक नियम । आशा उमंग उल्लास अथाह, समृद्धि चाहना अत्युत्तम । पटाक्षेप कर सघन तिमिर, आलोक पथ बखानी है । परिवर्तन की अठखेलियों में, खुशियों की रवानी है ।। लोभ मद लालच…
उजाड़ो न दुनिया ! ( Ujado na duniya ) पैग़म्बरों की जमीं,अम्न बोते चलो, जंग को जहां से बचाते चलो। बंट गई है दुनिया आज दो धड़ों में, लगी आग को तुम बुझाते चलो। फासला बढ़ा है लोगों के अंदर, दिल की दूरियाँ को घटाते चलो। नहीं थम रहे हैं आँसू जहां के, उदासी…
बोलो अब किस डगर चले ( Bolo ab kis dagar chale ) इधर चले या उधर चले, बोलो अब किस डगर चले। कहो किधर रस्ता मंजिलें, कहो कारवां किधर चले। चुनावी मौसम अब आया, रंग बदलता हर साया है। वादों की भरमार हो रही, धुंआ धुंआ जग छाया है। प्रेम सुधा रसधार लिए, बोलो…
नग्नता ( Nagnata ) नग्नता का विरोध तो सभी करते हैं किंतु, अपने ही घर से उभरती नग्नता को रोक नही पाते मां और बाबूजी के स्थान पर मॉम और डैड सुनने से स्वाभिमान गौरवान्वित होता है….. यहां आओ बेटा ,बैठ जाओ खड़े हो जाओ की जगह कम कम , सिट हियर, या स्टैंड…
यह नक चढ़ी नाक ( Ya nak chadhi nak ) यह नक चढ़ी नाक गजब ढा गई। तेवर तीखे वह हमको दिखा गई। अंदाज मस्ताने नैना चले तीर से। आहट से लगा कि आंधी आ गई। यह नक चढ़ी नाक नखरो वाली। बड़े चाव से मुसीबत हमने पाली। मोरनी सी चाल घुंघरू पायल के।…
अगर साकी ( Agar Saqi ) बता देते तो अच्छा था कहाँ तेरी नज़र साकी तो फिर हम झट से कर देते पियाला भी उधर साकी ॥ दिया ना जाम वो जिसकी तमन्ना थी मिरे दिल में गिला क्या अब तिरे मय का नहीं होगा असर साकी ॥ छलक जाता जो पैमाना , क़यामत…
हमारी बेटी ( Hamari Beti ) सारी बेटी सबसे ज्यादा होनहार है भारत की बेटी, हम सब की बेटी और हैं सब भारत की बेटी। घर में आती जिस दिन जब जन्म लेती है बेटी, संसार और समाज का मान बढ़ाया करती है बेटी। सम्भालती है हमेशा हमारे घर की डोर सदा अपनी बेटी,…