• ज़माना है ना | Zamana hai Na

    ज़माना है ना! ( Zamana hai na )   हंसो यारो हंसो खुल के ,रुलाने को ज़माना है करो बातें बुलंदी की ,गिराने को ज़माना है ॥ नहीं होगा कोई भी खुश ,ऊंचाई देख कर तेरी गगन उन्मुक्त में उड़ लो, डिगाने को ज़माना है॥ लगाओ सेंध बाधाओं में, तोड़ो बेड़िआं सारी निरंतर चल पड़ो,पीछे…

  • मां का दर्द | Maa ka Dard

    मां का दर्द ( Maa ka dard )   संसार में कोई ऐसी दवा नहीं , जो मां का दर्द दूर कर सके। आठों पहर जो स्वयं को भुलाए, दूसरों के दुख की चिंता करती। उसकी भूख खत्म सी हो गई, बच्चों को पीड़ा से कराहते देख। मातृत्व के समान इस जग में, कोई और…

  • मोची | Mochi

    मोची ( Mochi )    पैरों से चलने में मजबूर, फिर भी प्रकृति में, मुस्कान भरी छाता बिखेरता , वह तल्लीन था अपने कार्य में, लगता था ऐसे कि वह , प्रभु के गांठ रहा हो जूते, उसका कार्य करने का ढंग, बड़ा ही प्रीत पूर्ण था, वह नहीं देखता कि , कौन छोटा कौन…

  • जो जग का करतार प्रभु | Jo Jag ka Kartar Prabhu

    जो जग का करतार प्रभु ( Jo jag ka kartar prabhu )   आस्था विश्वास श्रद्धा से, मनमंदिर में दीप जलाओ। उजियारा हो हृदय में, हरि भजन में मन लगाओ। नीली छतरी वाला ईश्वर, वो जगदीश्वर अंतर्यामी है। सारी दुनिया का रखवाला, सकल चराचर स्वामी है। नानी बाई को भात भरने, सांवरियो खुद आयो हो।…

  • भारतीय वायु सेना दिवस | Poem in Hindi on Indian Air Force Day

    भारतीय वायु सेना दिवस   हिंद की रज रज से,नभम स्पर्शम दीप्तम वंदन चतुर्थ वृहत सैन्य रूप, उत्साह साहस पर्याय । सदा रक्षित राष्ट्र स्वाभिमान, लिख कीर्तिमानी नव अध्याय । इक्कानवीं शुभ वात्सिकी, हर नागरिक अनंत अभिनंदन । हिंद की रज रज से,नभम स्पर्शम दीप्तम वंदन ।। चतुर्दश शतम अतुल्य विमान, एक्य लक्ष सप्तति सहस्त्रम…

  • स्वास्तिक | Swastika

    स्वास्तिक ( Swastika )    स्वास्तिक शुभता का परिचायक मृदु मृदुल अंतर श्रृंगार, सुख समृद्धि वैभव कामना । धर्म कर्म जीवन पर्याय , परम शीर्ष भाव आराधना । सुसंस्कार भव्य बीजारोपण, निज संस्कृति गुणगायक । स्वास्तिक शुभता का परिचायक ।। अभिवंदित पुरुषार्थ पथ, सौभाग्य दिव्य जागरण । विघ्न दुःख दर्द हरण, आनंदिता स्पर्शन आवरण ।…

  • गांव की झोपड़ी | Gaon ki Jhopdi

    गांव की झोपड़ी ( Gaon ki jhopdi )    गांव की झोपड़ी हो गई आज बदहाल है। सूना हुआ आंगन सारा बदल गई चाल है। बहती बयार प्यारी सी किलकारी गूंजती। टूट गए तार सारे अब बदला सुर ताल है। लगता था जमघट जहां गांव के लोगों का। बुजुर्गों का दबदबा था इलाज हर रोगों…

  • समझदार कौन | Samajhdar Kaun

    समझदार कौन ( Samajhdar kaun )   लहू लुहान पैरों का दर्द हाथों मे पड़े छाले माथे से टपकती स्वेद की बूंदे धौकनी सी धड़कती छाती का हिसाब शायद ईश्वर की किताब मे भी नही औलादें तो अभी व्यस्त हैं अपनी ही औलादों को खुश रखने मे… औलादों ने शायद छोड़ दिया है खुद को…

  • प्यार में | Pyar Mein

    प्यार में ( Pyar Mein )    प्यार में वो हुआ जुदा आज़म कर गया खूब दिल ख़फ़ा आज़म ग़ैर आँखें वो कर गया है आज वो रहा अब न आशना आज़म ज़हर मुझको मिला जफ़ा का ही प्यार की कब मिली दवा आज़म जुल्म सहता रहा मुहब्बत के कब वफ़ा में मिली वफ़ा आज़म…

  • पितृ पक्ष से इतर एक पक्ष | Pitru Paksha se Itar

    हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का अत्याधिक महत्व है। इस दौरान लोग अपने पितरों का पिंडदान करके उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। हर वर्ष हम पितरों की प्रसन्नता प्राप्ति और दुखों से मुक्ति पाने का पर्व श्राद्ध 15 दिनों तक मनाते है। सभी सनातन धर्मावलम्बियों को अपने पितरों की कृपा-आशीर्वाद पाने…