• नेता जी | Mulayam Singh Yadav

    नेता जी! ( Netaji)  !! विनम्र श्रद्धांजलि!! ( धरती -पुत्र मुलायम सिंह जी को! )   लोहिया कै रहिया के देखाई अब नेताजी, यूपी की नइया के बचाई अब नेताजी। अमवाँ की बगिया से उड़ गयल सुगनवाँ, रोई- रोई बेहाल भयल सगरो जहनवाँ। सागर से मोतिया के ले आई अब नेताजी, यूपी की नइया के…

  • जंग का सुरूर | Jang ka Suroor

    जंग का सुरूर ( Jang ka suroor )    हर कोई नशे में चल रहा यारों, तभी तो ये जग जल रहा यारों। अश्क में उबल रही पूरी कायनात, देखो सुख का सूरज ढल रहा यारों। पिला रहे पिलानेवाले बनकर साक़ी, क्यों यूएनओ नहीं संभल रहा यारों। इजराइल,हमास,रूस,यूक्रेन,अमेरिका पे, रोज जंग का सुरूर चढ़ रहा…

  • ट्रैफ़िक जाम | Traffic Jam

    ट्रैफ़िक जाम ( Traffic Jam )   जब सड़कें नहीं चलती तब गलियाँ चलती हैं, जब गलियाँ भी नहीं चलती, तब लोग पैदल चलने लगते हैं। पैदल चलना केवल स्वास्थ्यकर ही नहीं होता बल्कि क्रांति का द्योतक होता है उस व्यवस्था के विरुद्ध जो सड़कें, गलियां जाम करने को मजबूर करते हैं, तब पैदल चलने…

  • जय भारत | Jay Bharat

    जय भारत ( Jay Bharat )    फिर से अलख जगाना होगा बुझती ज्योत को उठाना होगा संचार विहीन सुप्त चेतना हुयी प्राण सुधारस फिर भरना होगा.. छूट रहे हैं सब अपने धरम करम निज स्वार्थ ही है अब बना मनका मरी भावना रिश्तों मे अपने पन की घृणित कर्म नही हो,सनातन का.. हिंदी होकर…

  • बेमानी | Bemani

    बेमानी ( Bemani )   हक़ीक़त दिलों की यहाँ किसने जानी है, गहराई जितनी उतनी उलझी कहानी है। अक्सर सूरत में छिप जाते है किरदार वरन हर मुस्कुराते चेहरे की आँख में पानी है। अपने ही किस्से में मशगूल रहे इस कदर एहसासों की अनकही बातें किसने जानी है। हरी हो टहनी तो सह लेती…

  • सही मतदान | Matdan

    सही मतदान ( Sahi Matdan ) ( 2 ) शुचिता के प्रसून खिले,सजग सही मत प्रयोग से मतदान लोकतंत्र व्यवस्था, हर मतदाता परम अधिकार । उत्तम नेतृत्व चयन परम, अवांछित सदैव प्रतिकार । राष्ट्र निर्माण सक्रिय भागिता, उज्ज्वल भविष्य कल्पना योग से । शुचिता के प्रसून खिले, सजग सही मत प्रयोग से ।। जाति धर्म…

  • परिवार | Parivaar

    परिवार का सही मतलब तो पहले समझ में आता था। आजकल तो परिवार चार दिवारी में “हम दो हमारे दो” के बीच में सिमट कर रह गया है! पहले ना सिर्फ परिवार में लोग मिल-जुलकर रहते थे। बल्कि भजन और भोजन भी संग में होता था। फिर भी संयुक्त परिवार की मिसाल आज भी कई…

  • भावना | Bhavna

    भावना ( Bhavna )    भावनाएं ही मूल हैं जीवन की सार्थकता मे आपसी संबंधों का जुड़ाव लगाव,प्रेम,द्वेष ,ईर्ष्या,नफरत सभिक्रियाओं का उधमस्थल भावनाएं ही तो हैं …. भावना की मधुरता मे जहां रिश्ते फलते फूलते और पल्लवित होते हैं, वहीं मारी हुई भावनाएं इंसान को दानावपन की और अग्रसित करती हैं….. भावनाएं बंधन भी हैं…

  • मान्यवर कांशीराम साहेब | Poem in Hindi on Kanshiram

    मान्यवर कांशीराम साहेब ( Manyavar Kanshiram Saheb )   समाज सुधारक व राजनीतिज्ञ थें ऐसे दलितों के नेता, बहुजन नायक एवं साहेब से जिनको जनता जानता। वर्ण व्यवस्था में इन्होंने बहुजनों का एकीकरण किया, न्याय चाहिये तो शासक बनों यें था जिनका कहना।। १५ मार्च १९३४ में जन्में ०९ अक्टूबर २००६ निर्वाण, शोषित दलितों व…

  • मैं अपनों से हारा हूं | Main Apno se Hara Hoon

     मैं अपनों से हारा हूं ( Main apno se hara hoon )   हिम्मत हौसलों जज्बों की, बहती प्रेम धारा हूं। औरों से तो लड़ भी लेता, मैं अपनों से हारा हूं। मैं अपनों से हारा हूं पग पग पे बाधाओ से, लोहा लेना सीख लिया। तूफानों से टक्कर लेना, मुस्कुराना सीख लिया। बारूदों के…