• श्राद्ध | Shraddh

    “हेलो पण्डित जी प्रणाम!…… मैं श्यामलाल जी का बेटा प्रकाश बोल रहा हूं, आयुष्मान भव बेटा!….. कहो कैसे याद किया आज सुबह सुबह। जी पण्डित दरअसल बात ये है कि हमारे पिताजी का स्वर्गवास हुए एक साल हो गए हैं और उनका श्राद्ध का कार्यक्रम हम धूमधाम से मना रहे हैं जिसमें मैंने नाते रिश्तेदारों…

  • इंसान हूॅं मैं इंसान हूॅं | Insaan Hoon Main

    इंसान हूॅं मैं, इंसान हूॅं ( Insaan hoon main, insaan hoon )  इंसान हूॅं मैं, इंसान हूॅं । जितना खुश उतना ही परेशान हूॅं।। इंसान हूॅं मैं, इंसान हूॅं… इक उमर तक नहीं सौ साल तक लड़ता रहा हूॅं, मैं हर हाल तक कभी ढूढता हूॅं गुलिस्तां-अमन कभी फूंक देता हूॅं हॅंसता चमन अनजान हूॅं…

  • सफ़र | Safar

    सफ़र ( Safar )  कितना लंबा है; कोई नही जानता! कब बदलाव होना है; किसी को पता नहीं चलता! सफ़र बस ये चलता रहता है; शायद ये भी कोशिश! हां बस कोशिश ही कर पाता है; दूर से उस रोशनी को पाने की! हां जो उसके सफ़र को लोगों से अलग बनाती है। जो हां…

  • सुन खरी-खरी | Sun Khari-Khari

    सुन खरी-खरी! ( Sun khari-khari )    खामियाँ निकालने में साँसें तेरी नप जाएँगी, रख होश-ओ-हवास काबू में,साँसें उखड़ जाएँगी। न वक़्त है तेरे काबू में और न ही दिल है काबू में, किसी प्रतिशोध में खूबसूरत दुनिया उजड़ जाएगी। न तेरी मुट्ठी में जमीं है,न आसमां,न चाँद-सितारे, एकदिन तेरे जिस्म से ये रुह भी…

  • आजादी के शहजादे | Poem in Hindi on Bhagat Singh

    आजादी के शहजादे ( Azadi ke shahzade )    अठाईस सितंबर धन्य हुआ,तेईस मार्च की स्तुति में अठाईस सितंबर उन्नीस सौ सात, शहीदे आजम हिंद अवतरण । रज रज अति उमंग उल्लास, सर्वत्र अप्रतिम खुशियां संचरण । फिरंगी सिंहासन हिला डाला, प्रतिभाग कर क्रांतिकारी युक्ति में । अठाईस सितंबर धन्य हुआ, तेईस मार्च की स्तुति…

  •  यह कैसी भक्ति है? | Yah Kaisi Bhakti hai

    15 फीट लंबा दैत्य (राक्षस) बनाते हैं और उसके ऊपर 10 फीट बड़े गणेश जी को खड़ा करते हैं! यह कहाँ तक की समझदारी है। क्या आपको पता नहीं है इस 25 फीट की प्रतिमा को विसर्जित करने के लिए कितना पानी और समय लगने वाला है? एक मूर्तिकार बड़ी मेहनत और लगन से मूर्ति…

  • .हैसियत | Haisiyat

    .हैसियत ( Haisiyat )    शौक नही महफिलों को सजाने का मुझे घर की दीवारें भी खड़ी रहें यही बहुत है मेरे लिए देखी होगी तुमने ऊंचाई से जमीन हमने तो जमीन से ऊंचाई को देखा है… चम्मच से हम नही खाते अंगुलियों मे ही हैं पंच तत्व की शक्तियां हांथ ही उठा सकते हैं…

  • गणपति की जय जयकार | Ganpati ki Jai Jaikar

    गणपति की जय जयकार ( Ganpati ki jai jaikar )    एक दो तीन चार, गणपति की जय जयकार। करते सबका बेड़ा पार, विघ्न हरे भरे भंडार। गणपति की जय जयकार गौरीनंदन शंकर प्यारे, प्रथम पूज्य गजानंद प्यारे। रिद्धि सिद्धि संग घर आओ, गजानंदजी देव हमारे। एकदंत विनायक दरबार, छत्र फिरे गल सुमन हार। सुख…

  • सोने सी मुस्कान | Sone si Muskaan

    सोने सी मुस्कान ( Sone si muskaan )    सूरज सबको बाँट रहा है सोने सी मुस्कान कौन है जिसने बंद किये हैं सारे रोशनदान हमने गीत सदा गाये हैं सत्य अहिंसा प्यार के देख के हमको हो जाता है दुश्मन भी हैरान ख़ुद्दारी भी टूट गई मजबूरी के हाथो से दो रोटी की खातिर…

  • ख्वाब की ताबीर हो तुम | इक नज़्म

    ख्वाब की ताबीर हो तुम ( Khwab ki tabeer ho tum )    खुदा की लिखी कोई तहरीर तुम हो या किसी भूले ख्वाब की ताबीर हो तुम तस्सव्वुर में आये किसी ख्याल की तदबीर हो या तकाज़ा मेरी तकदीर का हो तुम मेरी किसी तमन्ना की जैसे तासीर तुम हो या दिल में बसी…