• Badal Poem in Hindi | बादल

    बादल ( Badal )  सांसों की हाला पिलाएगा बादल, उजड़ी दुनिया बसाएगा बादल। स्वागत करेगी प्यासी ये धरती, प्रलय बाढ़ साथ में लाएगा बादल। सूख गई है जो जीवन की डाली, हरी- भरी धरा बनाएगा बादल। अमराई जागेगी बागों में फिर से, अधरों की प्यास बुझाएगा बादल। पट जाएगी फिर ऋतुओं से धरती, डालों पे…

  • खूबसूरत | Khoobsurati ki Tareef par Kavita

    खूबसूरत ( Khoobsurat )    खूबसूरत नज़र आती हो, अदाओं से भी लुभाती हो, आती हो जब भी सामने सच में कयामत ढाती हो। माथे पर बिंदी सजाती हो, आँखों में कजरा लगाती हो, महकाती हो बालों में गजरा सच में कयामत ढाती हो। हाथों में मेहंदी रचाती हो, चूड़ी कंगना खनकाती हो, ओढ़ती हो…

  • ” अखिल भारतीय काव्य प्रतियोगिता”

    ” अखिल भारतीय काव्य प्रतियोगिता” ।। कक्षा 5 से 12 तक के विद्यार्थी इस में भाग लेने हेतु स्वीकृत।। उपरोक्त विषयों में किसी एक पर पर शुद्ध हिंदी में औसत आकार की कविताएंँ प्रेषित करें। एक रचनाकार द्वारा एक प्रविष्टि मान्य होगी। अपना पूरा नाम , फोटो, पता ,स्कूल , व्हाट्सएप नंबर सहित प्रविष्टि भेजें।…

  • घात लगाकर बैठे हैं | Nazm in Hindi

    घात लगाकर बैठे हैं ( Ghaat lagakar baithe hain )   कुछ अपने ही ऐसे हैं प्यार बहुत दिखलाते हैं दिल में धोखा रखते हैं वे सब होते अपने हैं गम जितने भी देते हैं बात कभी करते हैं जब करते दिल की बातें कब पैसे पर मरते हैं सब ऐसो को क्या कहते तब…

  • सावन महीना | Sawan Mahina par Kavita

    सावन महीना ( Sawan Mahina )    सावन महीना अति विशेष प्रेम ,साधना , पूजा का अशेष ( संपूर्ण ) भक्त करते भक्ति भगवन की निरंतर होता जल अभिषेक।। अनोखी घटा निराली देखो सावन की खुशहाली देखो बदरिया पहने बूंदों के हार अंबर से बरसे प्रेम की फुहार।। रिमझिम रिमझिम सावन माह में कांवरिया जल…

  • रो दिये | Sad Ghazal in Hindi

    रो दिये ( Ro Diye)   जो हमारी जान था जिसपे फ़िदा ये दिल हुआ जब हुआ वो ग़ैर का सब कुछ लुटाकर रो दिये। है अकड़ किस बात की ये तो ज़रा बतलाइये वक्त के आगे यहां रुस्तम सिकंदर रो दिये। फख़्र था मुझको बहुत उनकी मुहब्बत पर मगर जब घुसाया पीठ में इस…

  • आशिक़ी | Aashiqui

    आशिक़ी! ( Aashiqui ) (नज़्म ) ( 3 )  बदलेगा मौसम मगर धीरे-धीरे, उठेगी जवानी मगर धीरे-धीरे। पिएंगे प्यासे उन आँखों से मय को, चढ़ेगी नशा वो मगर धीरे-धीरे। ढाएगी कयामत जमाने पे एकदिन, बढ़ेगी बेताबी मगर धीरे-धीरे। राह -ए -तलब में छोड़ेगी दिल को, होगा आशिक़ी का असर धीरे-धीरे। करेगी इनायत किसी न किसी…

  • कोई अब अरमान नहीं है | Arman Shayari

    कोई अब अरमान नहीं है ( Koi ab arman nahin hai )    प्यार की पहचान नहीं है कोई अब इंसान नहीं है इस जगत में कौन है ऐसा जो यहाँ मेहमान नहीं है हर कोई मायूस लगे अब चेहरों पर मुस्कान नहीं है बाप की बातें न ले दिल पर ये तेरा अपमान नहीं…

  • समानांतर रास्ते | Samanantar Raaste

    समानांतर रास्ते ( Samanantar raaste )    एक झूठें विश्वासघाती और छद्मवेशी मनुष्यों के संसार में अकेली चल रही हैं आजकल मेरी रूह फँसी हाँड-माँस की इस देह में… दो अपनी भुमिका दृढ़ करने की कोशिश करती और एक अनोखी हसरत के संग जहाँ-तहाँ विचरण करती मेरी घुमंतू रूह को सिवाय उसके कोई बांध ना…

  • वाह रे वाह ओ लाल टमाटर | Lal Tamatar

    वाह रे वाह ओ लाल टमाटर ( Wah re wah o lal tamatar )    वाह रे वाह ओ लाल-टमाटर तूने कर दिया कमाल, चन्द दिनों में ही बना लिया अच्छी खासी पहचान। तुमको बेचकर आज व्यापारी हो रहा है मालामाल, कम दामों में बिकने वाला अब छू रहा आसमान।। हर सब्ज़ी में संपूर्ण विश्व…