• कविता शादी | Shaadi par Kavita

    कविता – शादी ( Shaadi )    चल रहे है रिश्ते क्यों समझ बात नहीं आती l गृहस्ती रूपी गाड़ी पटरी पर दौड़ी जाती l शादी पवित्र बंधन ये भारत भूमि बतलाती l मित्रता है अस्त्र हमारा दुनिया को सिखलाती l परंपरा संस्कार हमारे दो जीवन मिलवाती l साथी का हाथ न छूटे सात फेरे…

  • कल तक उठा रहे थे जफ़ाओं पे जो सवाल | Zafaon pe Jo Sawal

    कल तक उठा रहे थे जफ़ाओं पे जो सवाल! ( Kal tak utha rahe the zafaon pe jo sawal )   कल तक उठा रहे थे,जफ़ाओं पे जो सवाल ! हैं सामने खुद उनकी वफ़ाओं के ही अमाल !!१ इस पर कहीं हैरत जदा, फिर भी नहीं कोई पहले भी पेश कर चुके हैं वे…

  • ईमान चाहिए | Iman Chahiye

    ईमान चाहिए! ( Iman chahiye )   रहने के लिए सबको मकान चाहिए, रोजी – रोटी के लिए दुकान चाहिए। फिसड्डी बनके घर में बैठना ठीक नहीं, तन मन को भी थोड़ी थकान चाहिए। तलवा चाटते रहना ये ठीक भी नहीं, सच पूछिए शिक्षा की उड़ान चाहिए। एक दिन हमारी साँसों का होगा हिसाब, साक्षी…

  • शादी | Shaadi

    “शादी” ( Shaadi )   आजकल कुछ लड़कियों की अजीब मानसिकता हो गई है, मिस्टर परफेक्ट ढूंढने के चक्कर में कुंवारी बैठी रहती है। कोई 22 से 28 साल की उम्र में शादी करती है, कोई और 5 साल जीवन साथी तलाशने में लगाती है। मुश्किल से 12 से 15 साल साथ निभाती है, 38…

  • सुनो/देखो | Suno

    सुनो/देखो ( Suno/ Dekho)    तुम्हारी याद नहीं ! लगता है ,खंजर आ रही है और मुझे कत्ल कर रहो है कत्ल कर मुझे जिन्दा और व्याकुल लाश बना रही है ये हमारे बीच की दूरी मेरे मौत की वजह बन रही है वो व्याकुलता और वो तड़प, बताओ तुम्हे ये कैसे दिखाएं करीब आओ…

  • गुरु पूर्णिमा | Guru Purnima

    गुरु पूर्णिमा ( Guru purnima )   सनातन धर्म में इसे एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता, जो आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को आता। इस दिन गुरुदेव महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिनको वेदों और पुराणों का रचियता कहा जाता।। यें अलौकिक-शक्ति से सम्पन्न और थें त्रिकालदर्शी, माॅं का नाम सत्यवती पिता का…

  • भारत की धरती | Bharat ki Dharti

    भारत की धरती ( Bharat ki dharti )    मेरी धरती माँ प्यारी है भारत की ख़ुशबू फ़ैली है ऐसा न कहीं देश मिलेगा गंगा जमना जो मिलती है उगते है गुल उगती सरसों धरती माँ देखो ऐसी है सैनिक करे है हिफाज़त कर सकता न अदू ज़ख्मी है नफ़रत के दुश्मन ख़त्म हुई उल्फ़त…

  • ह़ासिल मुक़ाम करना है | Faraz ki Ghazal

    ह़ासिल मुक़ाम करना है ( Hasil muqam karna hai )    करें वो जो भी उन्हें काम धाम करना है। हमें तो सिर्फ़ मुह़ब्बत को आ़म करना है। अभी जो आग लगाकर गए हैं इस दिल में। कहाँ हैं ढूँढिए उन को सलाम करना है। जमाले यार को लफ़्ज़ों में ढाल कर रखना। हमें तो…

  • अश्क नहीं खून | Ashk nahi Khoon

    अश्क नहीं खून ( Ashk nahi khoon )    आँखों से खून तभी बहा करते हैं जब इनसे अश्क बहना बंद कर देते हैं जख्म देने वाले कोई दुश्मन होता नहीं बल्कि वो कोई अपना ही रहा करते हैं ये सिर्फ अपने खुशी के लिए घर नहीं बल्कि पुरा संसार ही जला दिया करते हैं…

  • गुरू महिमा | Guru Mahima

    गुरू महिमा ( Guru Mahima ) ( 2 ) गुरू का रख लो मान गुरू जीवन में देते हैं सुप्त गुणों को मान गुरू हीं जानतें हैं हमारी विदया और बल बुद्धी का देते हैं हमें आशिर्वाद महान गुरू बिन नहीं जीवन का उद्धार गुरू की वाणी हैं गीता और रामायण वेद पुराण गुरू हैं…