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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Sangharsh ki Dagar
    कविताएँ

    मैं संघर्षों की डगर पे रहता हूं | Sangharsh ki Dagar

    ByAdmin June 17, 2023

    मैं संघर्षों की डगर पे रहता हूं ( Main sangharsh ki dagar pe rahta hoon )   मैं संघर्षों की डगर पे रहता हूं। जाने कितने तूफान सहता हूं। हौसला ही रहा हथियार मेरा। बन भावों की धार बहता हूं। बाधाएं सुखसागर हो जाती। मुश्किलें वापस चली जाती। विश्वास है शिव भोलेनाथ पे। आस्था अधर…

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  • Hai Shaan nirali Bharat ki
    शेरो-शायरी

    है शान निराली भारत की | Hai Shaan nirali Bharat ki

    ByAdmin June 17, 2023June 17, 2023

    है शान निराली भारत की ( Hai shaan nirali Bharat ki )   है शान निराली भारत की हर चीज है प्यारी भारत की बलिदान दिया हर सैनिक ने तकदीर सवारी भारत की हर कोई उल्फ़त से बोले मीठी है बोली भारत की अबला न समझ तू अब उसको सबला है नारी भारत की राशन…

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  • Jara Sochie
    कविताएँ

    जरा सोचिए | Jara Sochie

    ByAdmin June 17, 2023

    जरा सोचिए! ( Jara sochie )   आजीवन कुर्सी/सत्ता का सुख भोगने वाले/ भोग सकने वाले माननीय लोग एक नहीं अनेक पदों के लिए अलग अलग आजीवन पेंशन पाते हैं वही सत्ता के दंभ में युवाओं के लिए चार साला स्कीम लेकर आते हैं फायदे बहुत गिनाते हैं कभी निजीकरण का कभी न्यू पेंशन स्कीम…

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  • Shrrngaar
    कविताएँ

    श्रृंगार | Shrrngaar

    ByAdmin June 17, 2023

    श्रृंगार ( Shrrngaar )    मधुरम नयन काजल से प्रिय, अधर पंखुड़ी गुलाब की जैसे , लट गुघराली उड़े जब मुख पर मधुरम मुस्कान को संग लिए स्त्री अपने लाज भाव से ही पूर्ण करे अपना श्रृंगार सारा ।। रूप मोतियों के जैसा प्यारा कंचन बरण दमके यह कया हृदय में प्रेम के स्वर सजाकर…

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  • First ki Second Inning
    कविताएँ

    फर्स्ट कि सेकंड इनिंग | First ki Second Inning

    ByAdmin June 16, 2023

    फर्स्ट कि सेकंड इनिंग ( First Ki Second Inning )   स्त्री तुम बाढ़ तो नहीं हो पावन नदी हो । अपनी मर्यादा में बहो प्रभु की मर्यादा में रहो। तुम आधुनिकता में उड़ता हुआ बवंडर नहीं! उजड़ा हुआ खंडहर नहीं! रंगभरी तस्वीर हो । जिंदगियों में रंग भरो ज़िंदगी को इंद्रधनुष करो। ख़ुद से…

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  • Waqt ka pahiya
    कविताएँ

    वक़्त का पहिया | Waqt ka Pahiya

    ByAdmin June 16, 2023

    वक़्त का पहिया ( Waqt ka pahiya )   वक्त का पहिया कभी न रूकता ये चलता ही रहता, सर्दी-गर्मी ऑंधी तूफ़ान यह बारिश में नहीं थकता। मेहनत करनें वालों को सदा मिलती यही सफ़लता, जिसमें है ये चार गुण वह हर दिल पर राज करता।। सबको आदर देता हो व विनम्रतापूर्वक बात करता, माफ़ी…

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  • Tum mat Rona Priya
    कविताएँ

    तुम मत रोना प्रिय | Tum mat Rona Priya

    ByAdmin June 16, 2023

    तुम मत रोना प्रिय ( Tum mat rona priya )   तुम मत रोना प्रिय मेरे, यह तेरा काम नही है। जिस संग मन ये लागा, मेरा घनश्याम वही है।।   जो राधा का है मोहन, मीरा का नटवर नागर। वो प्रेम रसिक इस जग का, मन मेरा छलकत गागर।।   वो एक पुरूष सृष्टि…

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  • Sanatan Dharma
    कविताएँ

    मेरा सनातन धर्म | Sanatan Dharma

    ByAdmin June 16, 2023

    मेरा सनातन धर्म ( Mera sanatan dharma )   कल्पवृक्ष सा ये धर्म सनातन इस वृक्ष का बीज परमात्मा प्रेम, जिसके रचयिता ब्रह्मा जी स्वयं हैं विष्णु जी जिसके पालनहार शिव शक्ति की असीम कृपा पर ही, यहां चलता है यह जग संसार।। सनातन धर्म हैं विशाल स्वरूप बाकी सब धर्मों का भी हैं आधार…

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  • Mujra
    कविताएँ

    खाए हो चोट दिल पे | Mujra Khaye ho Chot Dil pe

    ByAdmin June 16, 2023

    खाए हो चोट दिल पे! ( Khaye ho chot dil pe )  ( मुजरा )   खाए हो चोट दिल पे मरहम लगाऊँगी, रफ़्ता-रफ़्ता सइयाँ मैं अपना बनाऊँगी। तसव्वुर मेरे हरदम रहोगे, कुंवारे बदन का रस भी चखोगे। काँटों की सेज छोड़, फूल पे सुलाऊँगी, रफ़्ता-रफ़्ता सइयाँ मैं अपना बनाऊँगी, खाए हो चोट दिल पे…

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  • Parwaz
    कविताएँ

    परवाज उड़ान कल्पनाओं की | Parwaz

    ByAdmin June 16, 2023

    परवाज उड़ान कल्पनाओं की ( Parwaz udaan kalpanao ki )   भर परवाज नई उड़ाने नई नई कल्पना आई। भाव भरा सागर उमड़ा नई-नई रचनाएं आई।   शब्द सुरीले मन मोहे मंच मुदित वाणी हरसाई। गीत गजल छंद मुक्तक ने पावन सरिता बहाई।   कलमकार सुधीजन सारे पाते हैं मान-सम्मान। यशस्वी लेखनी हुई उदित कलमकार…

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