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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Shiv Shiv Bol
    कविताएँ

    शिव शिव बोल ज्ञान पट खोल | Shiv Shiv Bol

    ByAdmin June 6, 2023

    शिव शिव बोल ज्ञान पट खोल ( Shiv Shiv Bol Gyan Pat Khol )    शिव शिव बोल ज्ञान पट खोल। हर हर भज नर नाम अनमोल। बाबा भोलेनाथ जय महाकाल। गंगा जटा सोहे चंद्र सोहे भाल। त्रिनेत्र त्रिशूलधारी नीलकंठ त्रिपुरारी। भस्म रमाए शिवशंकर बाघाम्बर धारी। डम डम डमरू बाजे नटराज नृत्य धारे। बिल्व पत्र…

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  • Plastic Sa ho Gaya
    शेरो-शायरी

    प्लास्टिक सा हो गया तेरा दिल मेरा दिल | Plastic Sa ho Gaya

    ByAdmin June 5, 2023June 5, 2023

    प्लास्टिक सा हो गया तेरा दिल मेरा दिल ( Plastic sa ho gaya tera dil mera dil )  “Ecosystem Restoration”   प्लास्टिक के दौर में प्लास्टिक सा ही हो गया तेरा दिल मेरा दिल झुकेगा नहीं टूट जायेगा पिघलेगा तो धूँआ हो जायेगा न धड़कता है न धड़कने देगा कैसा ‘बेदिल‘ सा हो गया है…

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  • Paryavaran par Kavita in Hindi
    कविताएँ

    कुपित हो रही है यह प्रकृति | Paryavaran par Kavita in Hindi

    ByAdmin June 5, 2023

    कुपित हो रही है यह प्रकृति ( Kupit ho rahi hai yah prakriti )    आत्महंता कर्म हम कर रहे हैं, कुपित हो रही है यह प्रकृति जीव–जंतु सभी यहां मर रहे हैं है ये पर्यावरण की ही व्यथा कि, हो रहा जो पर्यावरण दूषित यहां आज सभी पक्षी भी हमारे लुप्त होते ! भोजन…

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  • Paryavaran ki Vyatha
    कविताएँ

    पर्यावरण की व्यथा | Paryavaran ki Vyatha

    ByAdmin June 5, 2023

    पर्यावरण की व्यथा ( Paryavaran ki vyatha )   बहुत दुखी हैं आज प्रकृति। सबसे अपनी व्यथा कहती, कोई सुने इसकी गुहार, बंद करें इसका संहार। पल पल पीड़ा को सहती, बहुत दुखी हैं आज प्रकृति। अपनी जरुरत की खातिर, क्युॅ॑ चलाते धार हथियार। इसे भी तो कष्ट होता, कभी समझें इसका प्यार। सभी को…

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  • Vishv Paryavaran Divas
    कविताएँ

    विश्व पर्यावरण दिवस | Vishv Paryavaran Divas

    ByAdmin June 5, 2023

    विश्व पर्यावरण दिवस ( Vishv paryavaran divas )   काट रहे हैं जंगल – जंगल, वृक्षारोपण भूल गए। पर्यावरण की रक्षा करना,आखिर कैसे भूल गए। छाँव और औषधि देकर तरुवर करते सबसे प्रेम, धन संचय की चाह में हम प्राणवायु क्यों भूल गए। देखो हवा जहरीली होकर श्वासों में विष घोल रही, वृक्ष हैं धरती…

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  • Vriksh Dhara ke Mool
    कविताएँ

    वृक्ष धरा के मूल | Vriksh Dhara ke Mool

    ByAdmin June 5, 2023

    वृक्ष धरा के मूल ( Vriksh dhara ke mool )  पर्यावरण संरक्षण पर कविता  वृक्ष धरा के मूल, भूल से इनको काटो ना नदी तालाब और पूल, भूल से इनको पाटो ना।। वृक्षों से हमें फल मिलता है एक सुनहरा कल मिलता है पेड़ रुख बन बाग तड़ाग सब धरती के फूल ,भूल से इनको…

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  • Paryavaran Sanrakshan
    शेरो-शायरी

    पर्यावरण संरक्षण | Paryavaran Sanrakshan

    ByAdmin June 5, 2023

    पर्यावरण संरक्षण ( Paryavaran Sanrakshan )  एक ग़ज़ल पर्यावरण संरक्षण पर   ज़मी बहुत उदास है इसे हंसाइए ज़रा मिला के हाथ आईए शजर लगाइए ज़रा यह धूप रोशनी हवा घिरे हुए हैं गर्द में फिज़ा से धुंध और ग़र्द को हटाइए ज़रा। जहां में हो रही बहुत ही आब की कमी अभी बिला वज़ह…

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  • Paryavaran
    कविताएँ

    पर्यावरण | Paryavaran

    ByAdmin June 5, 2023

    पर्यावरण ( Paryavaran )    विविध जीवों का संरक्षण मान होना चाहिए। स्वस्थ पर्यावरण का संज्ञान होना चाहिए।। प्रकृति साम्यता रहे धरा का भी श्रृंगार हो, वृक्षों की उपयोगिता पर ध्यान बार बार हो। वृक्ष, प्राणवायु फल छाया लकड़ियां दे रहे, उसके बदले में हम उनकी संख्या न्यून कर रहे। ‘दस पुत्र समो द्रुम:’ यह…

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  • Vriksh Sanrakshan
    कविताएँ

    वृक्ष संरक्षण | Vriksh Sanrakshan

    ByAdmin June 5, 2023

    वृक्ष संरक्षण ( Vriksh sanrakshan )    विश्व पर्यावरण दिवस हार्दिक शुभकामनाएं वृक्ष संरक्षण हम करें, प्रकृति बचाये आज | हरियाली हो इस धरा,ऐसा करना काज || सूर्य सकल तम को हरे, जग में भरे उजास। नव आशा नव प्रेरणा, भरता नव उल्लास।। शीतलता हो चाँद सी , चर्या शिष्टाचार। मानव हो कर तो नहीं…

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  • Ek Aah
    कविताएँ

    इक आह उभरती सीने में | Ek Aah

    ByAdmin June 5, 2023June 5, 2023

    इक आह उभरती सीने में ( Ek aah ubharti seene mein )   इक आह उभरती सीने में, और दर्द भी दिल में होता है। मन की पीर ढल शब्दों में, कविता का सृजन होता है। दिल की बातें दिल को छूती, कंठो से सरिता बहती है। अधरों की मुस्कान मोहक, शब्द शब्द में रहती…

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