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TheSahitya – द साहित्य
  • Poem tukadon mei bati zindagi
    कविताएँ

    टुकड़ों में बटी ज़िंदगी | Poem tukadon mei bati zindagi

    ByAdmin March 23, 2022

    टुकड़ों में बटी ज़िंदगी ( Tukadon mein bati zindagi )   टुकड़ों में बटी ज़िंदगी जोड़ूँ कैसे सुलझाती इस ज़िंदगी को उलझ जाती हूँ कभी मैं सुलझाऊँ ‘गर खुद को तो उलझ कर रह जाये ज़िंदगी टुकड़ों का कोना तुड़ा मुड़ा जुड़े न इक दूजे से मसला – ए – ज़ीस्त हल करते करते खुद…

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  • "होली के रंग भोजपुरी के संग" काव्यमय होली मिलनोत्सव
    साहित्यिक गतिविधि

    “होली के रंग भोजपुरी के संग” काव्यमय होली मिलनोत्सव

    ByAdmin March 22, 2022

    “होली के रंग भोजपुरी के संग” काव्यमय होली मिलनोत्सव होली और ‘अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस’ के पावन पर्व का स्वागत करने के लिए “अंतरराष्ट्रीय साहित्य संगम” (साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था) की ओर से 20 मार्च, रविवार को सायं 5 बजे से एक काव्यमय होली मिलनोत्सव का आयोजन किया गया। विश्व स्तर पर भोजपुरी की महत्ता को…

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  • Essay in Hindi on Sustainable Development Goals and India
    निबंध

    निबंध : सतत विकास का लक्ष्य और भारत | Essay in Hindi on Sustainable Development Goals and India

    ByAdmin March 22, 2022October 31, 2022

    निबंध : सतत विकास का लक्ष्य और भारत ( Sustainable Development Goals and India : Essay in Hindi ) प्रस्तावना – सतत विकास सिद्धांत का संबंध एक ऐसे विचार से हैं जो हमारी भावी पीढ़ी की अपनी जरूरतों को पूरा करने की योग्यता को प्रभावित करें बिना वर्तमान समय की आवश्यकता को पूरा करता है।…

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  • Poem on sparrow in Hindi
    कविताएँ

    गोरैया | Poem on sparrow in Hindi

    ByAdmin March 22, 2022

    गोरैया ( Goraya )   चहचहाती गोरैया फुदकती सबके मन को हर्षाती रंग बिरंगी डाल डाल पे जब पंख पसारे उड़ जाती   नील गगन में उड़ाने भर छत पर आकर बैठती सुंदर सी मनभावन लगती मीठी-मीठी चहकती   रौनक आ जाती घर में सब गौरैया को डाले दाना फूरर फूरर उड़ना फिर आकर घर…

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  • Kavita par kavita
    कविताएँ

    कविता | Kavita par kavita

    ByAdmin March 22, 2022July 22, 2023

    कविता ( Kavita )   युगो युगो से कविता महकी सदियों अलख जगाई दिलों तक दस्तक दे जाती शब्द सुधा रस बरसाई   भावों की बहती सरिता काव्यधारा बन बह जाती जनजागरण जोत जला उजियारा जग में फैलाती   प्रेम की पावन गंगा सी सद्भावों की अविरल धारा देशप्रेम जन मन जगाती हरती मन का…

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  • Kavita ki kavita geet
    कविताएँ

    कविता की कविता | Kavita ki kavita geet

    ByAdmin March 21, 2022

    “कविता की कविता” ( Kavita ki kavita )     अर्थ भावनाओं के जिसके,शब्दों में ढल जाते हैं ! अन्तरतम के वे संवेदन, ही कविता कहलाते हैं !!   हर समाज में रहती है यह चाहे कोई हो भाषा बनी हजारों लाखों इसकी कितनी कितनी परिभाषा प्यार,समझ,विश्वास,त्यागमिल इसकेरूप बनाते हैं सारे श्रेष्ठ भाव मानवता, के…

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  • Geet Modi ki vaccine
    कविताएँ

    नहीं लगाना चाह रहे वो मोदी की वैक्सीन | Geet

    ByAdmin March 21, 2022March 21, 2022

    नहीं लगाना चाह रहे वो मोदी की वैक्सीन ( Nahin lagana chah rahe wo Modi ki vaccine )   “नहीं लगाना चाह रहे वो मोदी की वैक्सीन। काश ! नहीं मानें वो इसमें अब अपनी तौहीन। और लगा लें अब वे सारे मोदी की वैक्सीन।।” सुन कर ये उदगार मित्र ने तुरत विरोध किया कहा…

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  • Poem suni holi
    कविताएँ

    सूनी होली | Poem suni holi

    ByAdmin March 21, 2022

    सूनी होली ( Suni holi )   छेड़छाड़ ना कोई शरारत ना कोई हॅंसी ठिठोली ना कोई रंगों की महफ़िल ना कोई घूँट ना गोली सारा  जग  वैसा  ही  है पर लगती एक कमी है सोच  रहा  बैठा  मेरा  मन  कैसी  होली हो ली   भीड़ भाड़ औ’ शोरो गुल सब सन्नाटा बन बिखरा जितना…

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  • Man Pawan Ki Nauka Book Review
    पुस्तक समीक्षा

    भारतीय संस्कृति के तत्कालीन वैभव और विस्तार को प्रमाणित करती है “मन पवन की नौका”

    ByAdmin March 21, 2022

    भारतीय संस्कृति के तत्कालीन वैभव और विस्तार को प्रमाणित करती है “मन पवन की नौका” ( Man Pawan Ki Nauka : Book Review )   कुबेरनाथ राय द्वारा रचित ललित निबंध संग्रह का शीर्षक “मन पवन की नौका” सार्थक सिद्ध होता जान पड़ता है।पुस्तक के सम्पूर्ण दस निबंधों में रचनाकार अपने मन की गति से…

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  • Holi ne aakar kar dala
    कविताएँ

    होली ने आकर कर डाला | Ghazal

    ByAdmin March 20, 2022

    होली ने आकर कर डाला ( Holi ne aakar kar dala )     होली ने आकर कर डाला,सब कुछ गड़बड़ घोटाला है !  चेहरों के अंदर का चेहरा, धो-धो कर नया निकाला है !!    जो गले मिला  आकर उसने, कर डाला  खूब हरा नीला  यदिअधिकप्यारउमड़ातोफिर,करदियापकड़मुंहकालाहै !!    घर के पीछे कीगलियों से,छुप-छुपकर भागोगे…

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