Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • Sad ghazal heart touching
    शेरो-शायरी

    खूब आंखों में नमी है आजकल| Sad ghazal heart touching

    ByAdmin February 21, 2022February 21, 2022

    ख़ूब आंखों में नमी है आजकल ( Khoob aankhon mein nami hai aajkal )     हाँ सताती मुफ़लिसी है आजकल ख़ूब आंखों में नमी है आजकल   बढ़ गयी  बेरोजगारी अब बहुत यार पैसों की कमी है आजकल   हो गया इंसान से बढ़कर पैसा यार सस्ती जिंदगी है आजकल   कौन उल्फ़त के…

    Read More खूब आंखों में नमी है आजकल| Sad ghazal heart touchingContinue

  • Poem mehndi ki mahak
    कविताएँ

    मेहंदी की महक | Poem mehndi ki mahak

    ByAdmin February 21, 2022

    मेहंदी की महक ( Mehndi ki mahak )   नारी का श्रृंगार मेहंदी चार चांद चमका देती हिना में गुण आकर्षण पिया मन लुभा लेती   रचकर रंग दिखाती है सौंदर्य में निखार लाती है दुल्हन के हाथों का सौंदर्य मनभावन सजाती है   मेहंदी की मोहक महक मदमस्त हो मधुमास प्यार के मोती बरसते…

    Read More मेहंदी की महक | Poem mehndi ki mahakContinue

  • Poem on Chhatrapati Shivaji
    कविताएँ

    वीर छत्रपति शिवाजी | Poem on Chhatrapati Shivaji

    ByAdmin February 20, 2022

    वीर छत्रपति शिवाजी ( Veer Chhatrapati Shivaji )   निडर पराक्रमी वीर शिवाजी छत्रपति सम्राट हुए झुके नहीं कहीं वीर सिंह व्यक्तित्व विराट लिये   रणधीर पराक्रमी महायोद्धा महासमर में लड़ते थे छापामार युद्ध प्रणाली नित्य कीर्तिमान गढ़ते थे   नींव रखी मराठा साम्राज्य हिंद प्रबल पुजारी थे मुगलों से संघर्ष किया रणनीति शौर्य अवतारी…

    Read More वीर छत्रपति शिवाजी | Poem on Chhatrapati ShivajiContinue

  • Poem amar prem ki amar kahani
    कविताएँ

    अमर प्रेम की अमर कहानी | Poem amar prem ki amar kahani

    ByAdmin February 20, 2022February 20, 2022

    अमर प्रेम की अमर कहानी ( Amar prem ki amar kahani )     एक दीन साधारण सा इंसान पर इरादे थे फौलादी विशाल पर्वत का सीना चीरकर की उसने मुनादी   अथाह प्रेम की पराकाष्ठा का दिया उसने निशानी बिहार की पावन भूमि के लोगों को याद हुई जुबानी   दिन हीन दशरथ मांझी…

    Read More अमर प्रेम की अमर कहानी | Poem amar prem ki amar kahaniContinue

  • Charagari shayari
    शेरो-शायरी

    चारागरी हुआ कैसा इलाज़ है | Charagari shayari

    ByAdmin February 20, 2022

    चारागरी हुआ कैसा इलाज़ है ( Charagari hua kaisa ilaaz hai )   चारागरी  हुआ  कैसा इलाज़ है अच्छा नहीं हुआ मेरा मिज़ाज है   घर में ही आ गयी रोटी की दिक्क़त है इस  बार  कब  हुआ  यारों अनाज़ है   मिलनें का कर गया था वादा ए वफ़ा ए यार वो मिला मुझसे…

    Read More चारागरी हुआ कैसा इलाज़ है | Charagari shayariContinue

  • Kavita ek hunkar
    कविताएँ

    इक हुंकार | Kavita

    ByAdmin February 20, 2022

    इक हुंकार ( Ek hunkar )   हम संघी है….. जन संघी है, भारत जय हो, विजय सोच के रंगी है। हम संघी है.. भगवा है पहचान हमारी, शिव शक्ति मे डूबे हम अड भंगी है। हम संघी है.. खाकी रंग है माटी रंग, मातृभूमि के सेवक हम कुछ जंगी है। हम संघी है…. शेर…

    Read More इक हुंकार | KavitaContinue

  • Hanste khilte phool
    कविताएँ

    हंसते खिलते फूल | जलहरण घनाक्षरी

    ByAdmin February 19, 2022

    हंसते खिलते फूल ( Hanste khilte phool )   हंसते खिलते फूल, कितने प्यारे लगते। हंसते गाते बच्चे भी, चांद सितारे लगते।   मुस्कानों के मोती देखो, खिले फूल गुलाब सा। खुशियां बरसे यहां, चमन प्यारे लगते।   मोहक महक प्यारी, मन में उमंग जागे। खिलते फूल दिलों के, सबसे न्यारे लगते।   सद्भाव प्रेम…

    Read More हंसते खिलते फूल | जलहरण घनाक्षरीContinue

  • Kavita ghar ka batwara
    कविताएँ

    घर का बटवारा | Kavita ghar ka batwara

    ByAdmin February 19, 2022

    घर का बटवारा ( Ghar ka batwara )   घर की चौखट दीवारें भी कांप उठी थी आज जाने किसकी नजर लगी बरस पड़ी थी गाज   घर के बंटवारे को लेकर अब बैठ गए सब भाई बाबूजी की पेंशन पर भी हिसाब जोडै पाई पाई   सारा आंगन थर्राया बहना का भी दिल भर…

    Read More घर का बटवारा | Kavita ghar ka batwaraContinue

  • Kavita pratiggya
    कविताएँ

    प्रतिज्ञा | Kavita pratiggya

    ByAdmin February 19, 2022

    प्रतिज्ञा ( Pratiggya ) भीष्म प्रतिज्ञा की भीष्म ने महाभारत के काल में कौरव पांडव राज करे रहूं अविवाहित हर हाल में   जुए में हार गये पांडव दुशासन ने दुस्साहस किया प्रतिज्ञा द्रोपदी ने कर केशों को खुला छोड़ दिया   राष्ट्रप्रेम में देशभक्ति में देशभक्त प्रतिज्ञा करते हैं सार्वभौम सुरक्षा कर हुंकार वंदे…

    Read More प्रतिज्ञा | Kavita pratiggyaContinue

  • Poem tera intezaar
    कविताएँ

    तेरा इंतज़ार | Poem tera intezaar

    ByAdmin February 19, 2022

    तेरा इंतज़ार ( Tera intezaar )   आ गया मधुमास सुहाना, चलने लगी बयार। मोती बरसे प्रेम के, उमड़ रही रसधार। आ जाओ प्रियतम प्यारे, कुदरत ने किया श्रंगार। हमें तेरा इंतजार, हमें तेरा इंतजार।   दमक उठा मन का कोना, हृदय उमड़ता प्यार। फागुन का महीना आया, प्रीत भरा इजहार। होली के रंगों में…

    Read More तेरा इंतज़ार | Poem tera intezaarContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 626 627 628 629 630 … 832 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search