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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • देखो आज राम बन कितने रावण निकलेंगे
    कविताएँ

    देखो आज राम बन कितने रावण निकलेंगे | Kavita

    ByAdmin October 15, 2021

    देखो आज राम बन कितने रावण निकलेंगे ( Dekho aaj Ram ban kitne ravan nikalenge )   देखो ,आज राम बन कितने रावण निकलेंगे जलाने इक काग़ज़ के बने उस रावण को   अब तो रावण भी राम नाम लेते अपनी सोने की लंका बचाने को   वो  इक  गुनाह  के  पीछे  दसों  सिर  गवा …

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  • Nafraten dekh li hai
    शेरो-शायरी

    नफ़रतें देख ली है यहां हर घड़ी | Nafrat ghazal

    ByAdmin October 14, 2021October 14, 2021

    नफ़रतें देख ली है यहां हर घड़ी ( Nafraten dekh li hai yahan har ghadi )     नफ़रतें  देख  ली  है  यहां  हर  घड़ी प्यार की बारिश अब हो रवां हर घड़ी   रब फ़ूलों की ख़ुशी की कर दें बारिशें हो  रही  है  ग़मों  की ख़िज़ां हर घड़ी   है  यहां  तो  उदासी …

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  • Siddhidatri maan Aarti
    कविताएँ

    सिद्धिदात्री मां | Siddhidatri maan Aarti

    ByAdmin October 14, 2021

    सिद्धिदात्री मां ( Siddhidatri maan )   सिंह सवार मां जगदंबे कमलासन विराजित मां सुख समृद्धि यश की दाता सारे संकट हरती मां   सिद्धिदात्री गुण दाता मां भक्तों के भंडार भरे विजय का दे वरदान माता सिर पर हाथ धरे   जगमग दीप जले मां अंबे भक्त खड़े जयकार करें सजा है दरबार तुम्हारा…

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  • जय महागौरी
    कविताएँ

    जय महागौरी | Jai Mahagauri Aarti

    ByAdmin October 14, 2021

    जय महागौरी ( Jai mahagauri : Mahagauri Mata Ki Aarti )   जय मां अंबे जय जगदम्बे, जय जननी भवानी। श्वेत  वर्णी  वरदहस्त, सुख दायिनी कल्याणी।   सौम्य  स्वभाव  मुखमंडल, कांति  शक्ति दाता। अष्ट भुजाओं वाली अंबे, गुण भक्त तिहारे गाता।   पर्वत वासिनी करो कृपा, सब सिद्धियों की दाता। सारे जग की तुम नियंता, तुम ही…

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  • Vijayadashami kavita
    कविताएँ

    विजयादशमी | Vijayadashami Kavita

    ByAdmin October 13, 2021October 25, 2023

    विजयादशमी ( Vijayadashami kavita ) ( 10 )    जागो रावण आए साल तूझे यूं खामोशी से जलता देख हे रावण,मुझे तो तुझ से इश्क़ हो चला है कभी तो पूछ उस खुदा से, क्या इन्साफ है तेरा मरने के बाद भी ,सदियों ज़माना क्यूं सज़ा देता चला है सोने की लंका थी मेरी ,शिव…

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  • Navratri kavita
    कविताएँ

    नवरात्रि नव रूप | Navratri kavita

    ByAdmin October 13, 2021

    नवरात्रि नव रूप ( Navratri nav roop : Navratri par kavita in Hindi )   आया  माह  क्वार  का  नौ  दिन  गुजै  भक्ति अलग-अलग नौ रूप में पुजै मां दुर्गा की शक्ति   पहले दिन मां शैलपुत्रीका भक्त भाव से पूजै दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी देवी मनचाहा फल दीजै   तीसरे दिन चंद्रघंट भवानी मधुर कंठ…

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  • मुहब्बत का दिलों में गुल खिला दें
    शेरो-शायरी

    मुहब्बत का दिलों में गुल खिला दें | Ghazal

    ByAdmin October 13, 2021October 13, 2021

    मुहब्बत का दिलों में गुल खिला दें ( Muhabbat ka dilon mein gul khila de )     मुहब्बत का दिलों में गुल खिला दें  हवा  ऐसी  यहां  सबको  ख़ुदा  दें   गरीबों  पे  सितम  हो  जो  रहा  है ख़ुदा उन दुश्मनों का  सर झुका दें   उतरे तन से नफ़रत की धूल सबके उल्फ़त…

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  • Beti or pita par kavita
    कविताएँ

    बेटी और पिता | Beti aur pita par kavita

    ByAdmin October 13, 2021June 19, 2022

    बेटी और पिता ( Beti aur pita : Kavita )   एक बेटी के लिए दुनिया उसका पिता होता है पिता के लिए बेटी उसकी पूरी कायनात होती है बेटी  के  लिए  पिता  हिम्मत  और  गर्व  होता  है पिता के लिए बेटी उसकी जिन्दगी की साँसे होती है बेटे से अधिक प्यार पिता अपने बेटी…

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  • Zindagi par kavita in Hindi
    कविताएँ

    मन में प्यार जरूरी है | Zindagi par kavita in Hindi

    ByAdmin October 13, 2021

    मन में प्यार जरूरी है ( Man mein pyar jaroori hai )   नेह  की  संरिता  बहाए  तो  रसधार  जरूरी है अपनापन अनमोल जताये मन में प्यार जरूरी है   खुशियां बांटे सारे जग में दिल दिलदार जरूरी है गुल गुलशन महकाये तो मदमस्त बयार जरूरी है   मंजिल मिले राही को जिन की तैयारी…

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  • जनहित में
    व्यंग्य

    जनहित में | Political vyang in Hindi

    ByAdmin October 12, 2021

    जनहित में ( Janhit mein : Hindi vyang ) प्रजातंत्र में तंत्र का हर कार्य जनहित में होता है यानि तंत्र जो भी उचित अनुचित कानूनी गैर कानूनी साफ या गंदा काम करता है उससे जनहित होना चाहिए और यदि उन अनैतिक कार्यो से जनहित नही होता है तब भी जनहित होना चाहिए। तंत्र में…

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