• सीख लिया है | Kavita

    सीख लिया है ( Seekh liya hai )   जिसने जितने दुःख दिये हैं मुझे आकर वे अपने अपने ले जाएं अब कोई ठिकाना नहीं है मेरे पास तुम्हारे दिए हुए दुःखों के लिए…   जो मेरे हिस्से आए हैं वे रख लिए हैं अपने पास उन्हीं को लगा कर सीने से जीवन गुजार दूँगा…

  • चांद | Chand par muktak

    चांद मुक्तक  ( Chand Muktak )   चांद तारे बिछा देंगे हम राह में कुछ नया कर दिखा देंगे चाह में आओ मिलों हमसे मुस्कुरा कर गगन छू लेंगे हम आपकी पनाह में   बस जाओ मेरे दिल में, चमका दो किस्मत का तारा। महका दो जीवन की बगिया, खिला दो पुष्प ये प्यारा।  …

  • उपभोक्ता की समस्या | Kavita

    उपभोक्ता की समस्या ( Upbhokta ki samasya )   उद्योगों के विकास में औद्योगिक क्रांति देश में लाया| औद्योगिक क्रांति ने देश में उत्पादन को बढ़ाया| पर बड़े-बड़े कंपनियों ने ग्राहक को उपभोक्ता बनाया| इस उपभोक्ता को विज्ञापन ने खूब रिझाया| इस विज्ञापन ने बिना जरूरत के सामान को जरूरत बनाया| देश की प्रथम जरूरत…

  • भोर की नव बेला || Kavita

    भोर की नव बेला ( Bhor ki naw bela )   मैं करोना को हराकर बाहर आई हूँ खुद की बहादुरीपर थोडा इतराई हूँ मालूम था सफर बहुत कठिन है फिर भी हिम्मत खूब मन में जुटाई है   खूब पिया पानी खूब भाप भी ली खूब प्राणायाम की लगाई झडी लम्बी साँसे छत पर…

  • मुखड़ा देखो गुलाब है जिसका | Ghazal Mukhda Dekho

    मुखड़ा देखो गुलाब है जिसका ( Mukhda dekho gulab hai jiska )   मुखड़ा देखो गुलाब है जिसका हाँ उड़ा जो नकाब है जिसका   पी जाऊं मैं नशा समझकर के हुस्न लगता शराब है  जिसका   भेज रब जीस्त में उसको मेरी चेहरा जो आफ़ताब है जिसका   वो हक़ीक़त में घर आए मिलने…

  • प्यार सबको जोड़ता है | Kavita

    प्यार सबको जोड़ता है ( Pyar sab ko jodta hai )   प्यार मधुर एहसास रिश्तो का हर  बाधाओं  को  तोड़ता है अपनेपन  का  भाव  जगाता प्यार  सब  को  जोड़ता  है   हर रिश्तो में प्यार जरूरी मधुर प्रेम रग रग दौड़ता है दिल से दिल को दस्तक देता प्यार सब को जोड़ता है  …

  • हाथ पकड लो हे गिरधारी | Kavita

    हाथ पकड लो हे गिरधारी ( Haath Pakad Lo Hey Girdhari )   माना  वक्त  ले रहा परिक्षा हिम्मत बची नहीं अब बाकि जीवन के आयाम बदल गए हर ओर मचा तबाही का मंजर   एसा खौफ एसी बेबसी पसर रही चहु दिशा बेलौस जीवन मृत्यु के सर्घष बीच कांप रही तन बीच बसी रूह…

  • क्षितिज के तारे | Kavita

    क्षितिज के तारे ( Kshitij ke taare )   क्षितिज के तारे टूट रहे, अपनों के प्यारे छूट रहे। खतरों के बादल मंडराये, हमसे रब हमारे रूठ रहे।।   नियति का चलता खेल नया, कैसा  मंजर  दिखलाता है। बाजार बंद लेकिन फिर भी, कफ़न रोज बिकवाता है।।   मरघट  मौज  मना  रहा, सड़कों पर वीरानी…

  • मिली नई जिंदगी | Kavita

    मिली नई जिंदगी ( Mili Nayi Zindagi )   बचते बचते बचा हूं मैं, सजते सजते बचा हूं मैं। शुक्र है मौला इलाही तेरा, टाल दिया जो अभी बुलावा मेरा। जिंदगी बख्श दी जिंदगी की खातिर, वरना यह समाज है बहुत ही शातिर! फायदे को अपने बनाए सारे कायदे, जीते जी जो ना निभा सके?…

  • समावेशी विकास की अवधारणा | Essay In Hindi

    निबंध : समावेशी विकास की अवधारणा ( Concept of inclusive development : Essay In Hindi ) समावेशी विकास एक व्यापक अवधारणा है। इसका प्रमुख उद्देश्य देश के विकास प्रक्रिया में सभी नागरिकों को शामिल करने के साथ-साथ उनसे मिलने वाले लाभों की सत प्रतिशत पहुंच भी सुनिश्चित उन तक करना है। यानी कि समावेशी विकास…