वीरों की कहानी , भारत माँ कि जुबानी

वीरों की कहानी , भारत माँ कि जुबानी

खून टपकती बून्दो को तुम गिन्ती उन बून्दो की छोड़ो ,
याद करो शहीदों को और भारत माँ की जय बोलो।।

सूरज की किरणों में बसी एक कहानी,
शहीदों का बलिदान सुनो आज भारत माँ की जुबानी।।

गांधी जी की अहिंसा से जगे जन-गण-मन,
लड़े बड़े जोश से हर दिल और तन।।

लहराते थे तिरंगे बिछती थी लाशें,
आज़ादी की चाहत में गुज़रती बलिदान भरी रातें।।

हाथ बंधे ज़ंजीरो में तुम गिनती उन हाथों की छोड़ो,
याद करो शहीदों को और भारत माँ की जय बोलो।।

एकता में छिपा था हमारी आजादी का राज,
हर एक शहीद ने दिया स्वाभिमान का आज।।

धरती पर लहराये तिरंगा दसों दिशा में हर द्वार,
संविधान की बुनाई में छिपा है हमारा अधिकार।।

हमने चुना रास्ता न्याय और सम्मान का,
संविधान ने दिया हक हर नागरिक को मान का।।

एक जुट होकर चलते हैं उस राह पर आज बढ़ते हैं,
हर कदम-कदम याद करते हैं जो बलिदान आज भी चढ़ते हैं।।

शीश चढ़े जो सूली पे तुम गिनती उन शीशों की छोड़ो,
याद करो शहीदों को और भारत माँ की जय बोलो।।

अथर्व कुमार

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

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