Ishq ka Karz

इश्क़ का कर्जा | Ishq ka Karz

इश्क़ का कर्जा !

( Ishq ka karz ) 

 

अपनी लौ से तपाए ये कम तो नहीं,
आए गाहे – बगाहे ये कम तो नहीं।
सुर्ख होंठों से मिलता रहे वो सुकूँ,
दूर से ही पिलाए ये कम तो नहीं।

मेरे तलवों से कितने बहे हैं लहू,
आ के मरहम लगाए ये कम तो नहीं।
नहीं करती तिजारत खुशबू की वो,
साँस मेरी गमकाए ये कम तो नहीं।

खाक होने से मुझको बचाई है वो,
मेरे आँसू सुखाए ये कम तो नहीं।
अपने जल्वों से देखो सजाई मुझे,
प्यास मेरी बुझाए ये कम तो नहीं।

लगे इल्जाम कितने फिकर ही नहीं,
उजड़े दिल को बसाए ये कम तो नहीं।
कागजी चाँद से काम चलता नहीं,
चाँदनी बनके छाए ये कम तो नहीं।

कैसे उतरेगा इश्क़ का कर्जा मेरा,
ऐब मेरा छुपाए ये कम तो नहीं।
कितनी दुनिया खफ़ा है मेरे प्यार से,
दूटके जो वो चाहे ये कम तो नहीं।

 

रामकेश एम.यादव (रायल्टी प्राप्त कवि व लेखक),

मुंबई

यह भी पढ़ें :-

जवानी का मौसम | Jawani ka Mausam

Similar Posts

  • करूं भी तो क्या | Karoon Bhi to Kya

    करूं भी तो क्या हम सबकी जिंदगी भी एक सर्किल की तरह है,इसी में हम सब उलझें और घूमते रहते हैं हरदम।लाइन पर सीधा चलना तुम भी भूले और हम भी,अपने ही कामों में उलझे रहते हैं अब तो हरदम।। हम सबका था रंगीन जीवन अब बेरंग हो गया है,कलर प्लेट में है,या प्लेट कलर…

  • भगवान वामन अवतार | Bhagwan Vaman Avatar par Kavita

    भगवान वामन अवतार ( Bhagwan Vaman Avatar )    हर्षोल्लास एवं धूम धाम संग मनाया जाता यह पर्व, दस-दिनों तक चलता जिस पर हम-सब करतें गर्व। मलयालम कैलेंडर अनुसार जिसका होता आगाज़, सितम्बर माह में आता राजा बलि पर करतें है गर्व।। महाबली असुरों का राजा बलि था जिसका यें नाम, द्वार से जिसके कोई…

  • पति-पत्नी | Pati patni par kavita

    पति-पत्नी ( Pati patni )     लिखा है लेख यही ईश्वर ने हमारा, सोचकर बनाया है ये रिश्ता प्यारा। कहा जन्में हम‌ और कहा पर तुम, फिर भी इतना प्यार है यह हमारा।।     जीवन का डोर ये बंध गयी है ऐसे, सात फेरों का सारा खेल यह जैसे। पति और पत्नी कहलाएं…

  • अमरत्व | Amaratva

    अमरत्व ( Amaratva )    माना की बहुत कुछ खो चुका है आपका सालों की मेहनत ,सालों की कमाई बिखर गए हैं , संजते संवरते सपने अपनों की उम्मीदें ..सब कुछ!!! तो क्या!रास्ते यहीं खत्म हो गए हैं !? प्रकृति के विशाल प्रांगण मे खत्म कुछ नही होता दुखी,सुख,उपलब्धियां ,अपने पराए कुछ नही ,कोई नही…

  • मर्द का दर्द | Mard ka Dard

    मर्द का दर्द ( Mard ka dard )    थाली बजी, खुशियां मनाई, लड़के होने पर सबने बधाईयां बांटी, बलाइया ली, काला टीका लगाया, परिवार का वंश देने पर सबने मां को गले लगाया, धीरे-धीरे वक्त बीता, राजकुमार की तरह मैं रहा जीता, यौवन के पड़ाव पर खुद से जब रूबरू हुआ, एक राजकुमार से…

  • राम हे राम | Ram Hey Ram

    राम हे राम मेरे राम राम हे राम मेरे राम तुम आओ म्हारे घर में मेरे भाग खुल जाए तुम आओ म्हारे दिल में मेरा जीवन सफल हो जाए राम हे राम मेरे राम मैं डुबा हूं इस जीवन में मुझे तो तारो राम औरों को तारा मुझे भी निकालो मेरे राम राम हे राम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *