किसको दिल की पीर सुनाएं
किसको दिल की पीर सुनाएं
एक ख़ता की लाख सज़ाएं।
किसको दिल की पीर सुनाएं।
कोई नहीं इब्न-ए-मरियम सा।
ज़ख़्म जिगर के किसको दिखाएं।
जान ही जाते हैं जग वाले।
राज़-ए-मुह़ब्बत कैसे छुपाएं।
नफ़रत के सहरा में आओ।
उल्फ़त के कुछ फूल खिलाएं।
ख़ाली से बेगार भली है।
मुफ़्त न अपना वक़्त गंवाएं।
क़रिया-क़रिया पेड़ लगा कर।
आबो-हवा को मस्त बनाएं।
क़ौमी यकजहती की ख़ातिर।
आओ फिर से हाथ मिलाएं।
सुनता नहीं वो बात हमारी।
कैसे फ़राज़ अब उसको मनाएं।

पीपलसानवी
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