Author: Admin

  • चंदामामा | बाल मनुहार | पत्र

    प्रिय चंदा मामा सुनो ना, चंदा मामा! मां जब मैं आपसे मिलने की जिद करता हूं तो मुझे थाली में पानी भरकर तुम्हे दिखाती है। कहती है कि जैसे तुम्हारे पापा वीडियो कॉल करते है ना वैसे ही है । जब पूछता हूं चंदा मामा बोलते क्यू नही तो कहती है ‘ उन्हें बहुत से…

  • चांद पर भारत | Chand par Bharat

    चांद पर भारत! ( Chand par Bharat )    आशियाना चांद पे मिलके बनायेंगे, दूसरे ग्रहों पे भी कदम हम बढ़ाएंगे। गिर करके उठना दुनिया की रीति है, हौसले से फासले खुद हम घटाएंगे। अश्कों से जंगल होता हरा नहीं, हकीकत की दुनिया वहां अब बसायेंगे। महकेंगी सांसें पर अभी है तपाना, नए मंजरों पे…

  • नारी क्यों | Nari Kyon

    नारी क्यों ( Nari Kyon )    हर रचना के केन्द्र बिन्दू में नारी क्यों हैं। दिखती हैं कल्याणी पर,लाचारी क्यों हैं। बेबस सी मजबूर दिखा दो चाहे जितना, हर पापों का अन्त करे वो,काली क्यो हैं। रसवन्ती कचनार दिखे,मनभावनी क्यों है। हर पुरूषों की चाहत लगती, कामी क्यों हैं। जैसा जिसने देखा वैसी नजर…

  • वर्तमान समझ | Vartman Samaj

    वर्तमान समझ ( Vartman Samaj )   शिक्षा का विकास हुआ,समझ अधूरी रह गई पूरे की चाहत मे ,जिंदगी अधूरी रह गई बन गए हों कई भले ही महल अटारी चौबारे मुराद भीतर ही मन की,दम तोड़ती रह गई बिक गए पद,सम्मान औ प्रसंशा के मोल मे माता स्वाभिमान की,छाती पिटती रह गई सोच बदली…

  • यूं आहें भरता हूँ मैं | Yoon Aahen Bharta hoon Main

    यूं आहें भरता हूँ मैं ( Yoon aahen bharta hoon main )    दो दिन से भूखा हूँ मैं ? रोठी को तरसा हूँ मैं दूर ग़रीबी न यहाँ हो बरसों से तड़फा हूँ मैं पैसे पूरे मिलते कब मेहनत भी करता हूँ मैं कोई तो भेज यहाँ रब जीवन में तन्हा हूँ मैं मुश्किल…

  • कईसन बाड़ऽ तुऽ | Kaisan baral tu

    कईसन बाड़ऽ तुऽ ( Kaisan baral tu )    अपन घर छोड़ि के दूसरे के घर ताड़अ ताड़ऽ। कईसन बाड़ऽ तुऽ केहू के बात न मानऽ ताड़ऽ, लईका बह गईल, लईकनि बह गईलऽ खेत, मेड़ खलिहान दह गईल। तबहुं न सम्भल ताड़ऽ, कईसन बाड़ऽ तुऽ केहू के बात न मानऽ ताड़ऽ। मोंछि पर तॉव देऽ,…

  • श्राद्ध तर्पण | Shradh Tarpan

    आलेख श्राद्ध तर्पण मुख्य रूप से गृहस्थ द्वारा किए जाने वाले ब्रम्ह यज्ञ, देव यज्ञ , पितृ यज्ञ, अतिथि यज्ञ तथा बलिवैश्व यज्ञ में पितृ यज्ञ के अंतर्गत आता है। पितृ यज्ञ जीवित माता-पिता, आचार्य, विद्वान मनुष्य आदि की सेवा है। इस यज्ञ के श्राद्ध तर्पण दो भाग हैं। श्राद्ध तर्पण मृतक का नहीं बल्कि…

  • कर्ण | Karn

    कर्ण एक ऐसा महायोद्धा महादानी जो उसकी स्वयं की गलती नहीं होने पर भी जीवन भर अपमानित होता रहा। आखिर उसकी गलती ही क्या थी? जो जन्म के साथ ही उसकी मां ने उसे त्याग दिया ।शिक्षा प्राप्त करने गया तो वास्तविकता जानने पर गुरु ने समय पर सीखी हुई विद्या न याद होने का…

  • धरातल | Dharatal

    धरातल ( Dharatal )   समय के सामूहिक धरातल पर आपकी व्यक्तिगत चाहत बहुत कीमती नही होती… बात जब परिवार,समाज,देश की हो शिक्षा,संस्कृति,संस्कार की हो सभ्यता,स्वभाव,व्यवहार की हो… आपका उत्तरदायित्व आप तक ही सिमट नही सकता जरूरतें,जरूरत पर ही पूरी नही होती कर्म और सहयोग भी जरूरी है… गलत ठहराने से ही आप सही नही…

  • युवा राजनेता श्री राजीव गांधी | Shri Rajiv Gandhi

    युवा राजनेता श्री राजीव गांधी ( Yuva Rajneta Shri Rajiv Gandhi )    देश के युवा राज नेताओं में राजीव गांधी थें एक, केवल ४० वर्ष की उम्र में वे प्रधानमंत्री बनें नेंक। अद्भुत क्षमता उच्च तकनीक आधुनिक थी सोच, लोकप्रिय वो नेता जिनके चाहनें वालें थें अनेंक।। सहनशील और निर्मल था जिनका ऐसा स्वभाव,…