ग़ज़ल

  • सनम तुम | Ghzal Sanam Tum

    सनम तुम ( Sanam Tum )   मात्रा भार: १२२२ – १२२२ – १२२२ सनम तुम इक दफ़ा नजरें मिला लेना, झुकाकर यह नज़र, फिर से उठा लेना ! जो चाहो तुम मेरी हसरत कभी रखना हसीं मुख से ज़रा परदा हटा लेना ! छुआ है दिल तुम्हारी इन अदाओं ने, उठाकर तुम न ये…

  • आसां नहीं होता | Ghazal Aasan Nahi Hota

    आसां नहीं होता ( Aasan Nahi Hota )   बज़ाहिर लग रहा आसां मगर आसां नहीं होता बहुत दुश्वार उल्फ़त का सफ़र आसां नहीं होता। ज़मीं एहसास की बंजर अगर इक बार हो जाये लगाना फिर मुहब्बत का शजर आसां नहीं होता। सुनो अहदे वफ़ा करना अलामत इश्क़ की लेकिन निभाना अहद यारों उम्र भर…

  • पहली दफ़ा | Pehli Dafa

    पहली दफ़ा ( Pehli Dafa )   जबसे तुम्हें देखा है जीने की हसरत हुई है, पहली दफ़ा ख़ुद से हमको मोहब्बत हुई है, सुन ज़रा तू ऐ मेरे हमराज़ ऐ मेरे हम-नशीं, तेरे आने से मुर्दा-ए-दिल में हरकत हुई है, तू पास है दिलमें जश्न-ए-बहारां हर रोज़ है, तेरे बिन तो फ़क़त ख़िजाँ की…

  • सताया न कर | Sataya na Kar

    सताया न कर ( Sataya na Kar )   ज़ब्त रब का कभी आज़माया न कर बेवज़ह मुफ़लिसों को सताया न कर। है खफ़ा तो पता ये उसे भी लगे ख़ुद ब ख़ुद आदतन मान जाया न कर। रंजिशें दरगुज़र भी किया कर कभी तल्ख़ियां बेसबब यूं बढ़ाया न कर। तोड़ कर ख़्वाब ग़र तू…

  • दिल तो दिल है | Dil to Dil Hai

    दिल तो दिल है ( Dil to Dil Hai )   चुभा हुआ है जो काँटा निकल भी सकता है ये दर्दनाक सा मंज़र बदल भी सकता है निज़ाम और भी चौकस बना दिया जाये तो हादसा कोई होने से टल भी सकता है इशारा देखिए हाकिम के आप लहजे का वो सारी भीड़ को…

  • कहां होती | Kahan Hoti

    कहां होती ( Kahan Hoti )   रवैये में लचक कोई मुरव्वत ही कहां होती कभी सरकार की हम पर इनायत ही कहां होती। जो बातिन है वो ज़ाहिर हो ही जाया करता है इक दिन असलियत को छुपाने की ज़रूरत ही कहां होती। मेरी तकलीफ़ में जगती है वो शब भर दुआ करती हो…

  • सब को अपना नहीं कहा जाता | Sab ko Apna Nahi Kaha Jata

    सब को अपना नहीं कहा जाता ( Sab ko Apna Nahi Kaha Jata )   सब को अपना नहीं कहा जाता हद से आगे नहीं बढ़ा जाता मंज़िलें दूर जा निकलती हैं रास्तों में रुका नहीं जाता घटते बढ़ते हुए यह साये हैं इन का पीछा नहीं किया जाता रास्ते ख़ुद बनाये जाते हैं सब…

  • उदास हुआ | Udaas Hua

    उदास हुआ ( Udaas Hua )   जब तेरे प्यार से उदास हुआ लग के दीवार से उदास हुआ इससे पहले तो ठीक ठाक था मैं बार इतवार से उदास हुआ बेवफाओं का ख़ैर क्या शिकवा इक वफादार से उदास हुआ कोई उसको हंसा नहीं सकता शख्स जो यार से उदास हुआ किसको भाई नही…

  • खीचो बात बड़ी होती है | Baat Badi

    खीचो बात बड़ी होती है ( Kheecho baat badi hoti hai ) बहरे मीर वज़्न=== २२ २२ २२ २२ २२ २२ २२ २   खींचो बात बड़ी होती है, छोडो तो ज़द टलती हैं I देख रवानी जीवन में बस दो बातो से चलती है II गिरती दीवारों का क़ायल शायद ही कोई होगा I…

  • क्या करें बहार का | Kya Kare Bahar ka

    क्या करें बहार का ( Kya kare bahar ka )    मस अले हज़ार हो तो क्या करें बहार का अभी उलझ रहा है कुछ हिसाब कारोबार का। याद आ रहा वही बहार में न जाने क्यूं पास है जिसे न कौल का न ही करार का। मजलिसों में देखकर नज़र चुरा रहा है वो…