Category: छंद
जेठ की गर्मी | Chhand jeth ki garmi
जेठ की गर्मी ( Jeth ki garmi ) मनहरण घनाक्षरी चिलचिलाती धूप में, अंगारे बरस रहे। जेठ की दुपहरी में, बाहर ना जाइये। गर्मी से बेहाल सब, सूरज उगले आग। तप रही धरा सारी, खुद को बचाइये। त्राहि-त्राहि मच रही, प्रचंड गर्मी की मार। नींबू पानी शरबत, सबको पिलाइये। ठंडी…
सूर्य अस्त होने लगा | कुण्डलिया छंद | Kundaliya chhand ka udaharan
सूर्य अस्त होने लगा ( Surya ast hone laga ) सूर्य अस्त होने लगा, मन मे जगे श्रृंगार। अब तो सजनी आन मिल, प्रेम करे उदगार।। प्रेम करे उदगार, रात को नींद न आए। शेर हृदय की प्यास, छलक कर बाहर आए।। आ मिल ले इक बार, रात्रि जब पहुचे अर्ध्य। यौवन ऐसे खिले,…
गाँव | Gaon par chhand
गाँव ( Gaon ) मनहरण घनाक्षरी टेडी मेडी पगडंडी, खलिहानों की वो क्यारी। ठंडी-ठंडी बहारों में, गांव चले आइए। मीठे मीठे बोल मिले, सद्भाव प्रेम गांव में। हरे भरे पेड़ पौधे, ठंडी छांव पाइए। खुली हवा में सांस लो, हरियाली का आनंद। चौपाल में चर्चा चले, प्रेम बरसाइये। सुख-दुख बांटे सब,…
सिद्धिदात्री | Chhand siddhidatri
सिद्धिदात्री ( Siddhidatri ) मनहरण घनाक्षरी नवशक्ति सिद्धिदात्री, सिद्धियों की दाता अंबे। साधक शरण माता, झोली भर दीजिए। ध्यान पूजा धूप दीप, जप तप माला पाठ। भगवती भवानी मांँ, शरण में लीजिए। पंकज पुष्प विराजे, चतुर्भुज रूप सोहे। कमलनयनी माता, दुख दूर कीजिए। शंख चक्र गदा सोहे, वरदायिनी भवानी। सुख समृद्धि…
कालरात्रि | Chhand kalratri
कालरात्रि ( Kalratri ) मनहरण घनाक्षरी काली महाकाली दुर्गा, भद्रकाली हे भैरवी। चामुंडा चंडी रुद्राणी, कृपा मात कीजिए। प्रेत पिशाच भूतों का, करती विनाश माता। सिद्धिदात्री जगदंबे, ज्ञान शक्ति दीजिए। अग्नि ज्वाला से निकले, भयानक रूप सोहे। खड्ग खप्पर हाथ ले, शत्रु नाश कीजिए। रूद्र रूप कालरात्रि, पापियों का नाश करें।…
उपवास | Upwas chhand
उपवास ( Upwas ) मनहरण घनाक्षरी नेम धर्म व्रत करे विश्वास श्रद्धा भाव से प्रभु सुमिरन कर उपवास कीजिए जब तप योग ध्यान सर्व शक्ति हरि मान दुर्गुण दोष मन से त्याग सुधा दीजिए मन से करें जो पूजा व्रत निराहार रख कामना पूरी कर दे माला जप लीजिए उपवास बड़ा…
भक्त प्रह्लाद | Bhakt Prahlad
भक्त प्रह्लाद ( Bhakt prahlad ) होलिका भी जल गई, प्रह्लाद को भर गोद, हर्ष जग में छा गया, सब होली मनाइए। सद्भाव की घटाएं भी, लाई रंगों की बहार, घट घट हर्ष छाया, मस्त होकर गाइए। सच्चे भक्त प्रह्लाद जो, प्रभु का करते ध्यान, दीनानाथ रक्षा करें, हरि ध्यान लगाइए।…
होली | मनहरण घनाक्षरी | Holi ke chhand
होली ( Holi ) गोरा गोरा गाल गोरी, राधा रंग ले आओ जी, आओ खेलें संग होली, रंग बरसाइये। फूलों की होली भावन, मत रंग लगाओ जी, रंगीलो फागुन आयो, मस्ती भर गाइये। हंसी-खुशी मस्ती छाई, होली आज मनाओ जी, झूम झूम नाचो गाओ, त्योहार मनाइये। ले पिचकारी रंग की, मोहन…
बसंत | मनहरण घनाक्षरी | Basant ritu par chhand
बसंत हर्षाता खुशियां लाया, सुहाना बसंत आया। बहारें लेकर आया, झूम झूम गाइए। मधुमास मदमाता, उर उमंगे जगाता। वासंती बयार आई, खुशियां मनाइए। पीली सरसों महकी, खिली कलियां चहकी। फूलों पे भंवरे छाए, प्रेम गीत गाइए। प्रीत के तराने छेड़े, मुरली की तान मीठी। मदन मोहन बंसी, मधुर बजाइये। कवि…
मतदान | मनहरण घनाक्षरी | Poem on voting in Hindi
मतदान ( Matdan ) चुने हम सरकार सबका है अधिकार राष्ट्र निर्माण करने मतदान कीजिए मतदान महादान अधिकार पहचान लोकतंत्र मजबूत कर वोट दीजिए सशक्त हो जनादेश मतदान है विशेष सोच समझ अमूल्य वोट जरा दीजिए उम्मीदवार खरा हो वो राष्ट्रप्रेम भरा हो स्वच्छ छवि रखता हो चुन जरा लीजिए …