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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Nazm Chikhloli Station
    शेरो-शायरी

    चिखलोली स्टेशन | Nazm Chikhloli Station

    ByAdmin May 21, 2024

    चिखलोली स्टेशन ( Chikhloli Station ) चिखलोली स्टेशन बनाने लगे हैं, वर्षो के ख्वाब वो सजाने लगे हैं। अभी तक बना है न ऐसा स्टेशन, मेरे दिल के तार वो गुदगुदाने लगे हैं। शैशव अवस्था में अभी हमने देखा, निगाह-ए -तलब वो बढ़ाने लगे हैं। उतरते हैं बादल इसे चूँमने को, छूकर हँसी वो लुटाने…

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  • Kavita Zindagi
    कविताएँ

    ज़िन्दगी | Kavita Zindagi

    ByAdmin May 21, 2024

    ज़िन्दगी ( Zindagi )   कभी शोला, कभी शबनम, कभी मधुर झनकार ज़िदगी। कभी है तन्हाई का गीत, न जाने कब आयेंगे मीत, मिलन जब होगा परम पुनीत, धन्य जब होंगे नयन अधीर, लगती है अभिसार जिंदगी। बगीचे में जो रोपे फूल, बने फिर आगे चल कर शूल, नहीं मिलता है कोई कूल, जिगर के…

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  • जल ही है जीवन का संबल
    कविताएँ

    जल ही है जीवन का संबल

    ByAdmin May 21, 2024

    जल ही है जीवन का संबल   जल ही है जीवन का संबल, जल ही जीवन का संचार! वन्य जीव फसलें जीवित सब, जल ही है सुख का आधार!! जल विहीन हो जीना चाहें, ऐसा संभव नहीं धरा पर! जल संचय करना हम सीखें, बर्बादी को रोकें परस्पर!! पर्यावरण प्रदूषित ना हो, वृक्ष से करें…

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  • Kahani Desh ki Mati
    कहानियां

    देश की माटी | Kahani Desh ki Mati

    ByAdmin May 20, 2024

    अभी रमेश को 15 दिन भी नहीं आए हुए थे पता चला उसकी मां को लकवा मार गया है । वह बहुत चाहता था मां के पास पहुंचे लेकिन चाह कर भी घर नहीं जा सकता था। रात्रि में जब वह लेटा हुआ था तो उसे नींद नहीं आ रही थी। वह सोचता रहा की…

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  • Ghazal Zindagi ki Kahani
    ग़ज़ल

    जिंदगी की कहानी | Ghazal Zindagi ki Kahani

    ByAdmin May 20, 2024

    जिंदगी की कहानी ( Zindagi ki Kahani )   कहूँ किस तरह जिंदगी की कहानी घिरी दर्द में ही रही जिंदगानी कभी अपने तो गैरों ने भी रुलाया भरा ही रहा दोनों आँख ही पानी क़दम पर क़दम दर्द था थी घुटन भी पड़ी जिंदगी से उसे भी निभानी बुने साथ में ख्वाब जब कहकशाँ…

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  • प्रेयसी सी लगती मधुशाला
    कविताएँ

    प्रेयसी सी लगती मधुशाला

    ByAdmin May 20, 2024

    प्रेयसी सी लगती मधुशाला   दुःख कष्ट पीड़ा संग, परम मैत्री अनुभूति । असफलता बिंदु पर , नवल प्रेरणा ज्योति । सघन तिमिर हरण कर , फैलाती अंतर उजाला । प्रेयसी सी लगती मधुशाला ।। तन मन पट नव चेतना, उत्साह उमंग अपार । अपनत्व सा मृदुल स्पर्श , अंतर्द्वन्द अवसानित धार । अदम्य हौसली…

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  • Insaniyat ki Raah Par
    कविताएँ

    इंसानियत की राह पर | Insaniyat ki Raah Par

    ByAdmin May 20, 2024

    इंसानियत की राह पर ( Insaniyat ki Raah Par )   इंसानियत की राह पर इंसान जब चलने लगेगा ! हृदय में तम से घिरा जो नूर है स्वयं ही दिखने लगेगा!! मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे चर्च में तुमको नहीं दिख पाएगा! दीन दुखी निबलों विकलों की सेवा में वो मिल जाएगा !! मंत्र, जप- तप,…

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  • Ghazal Pehli Mulaqat
    ग़ज़ल

    पहली मुलाकात | Ghazal Pehli Mulaqat

    ByAdmin May 20, 2024

    पहली मुलाकात ( Pehli Mulaqat )   धीरे-धीरे वो घूँघट उठाने लगे । धड़कनें मेरे दिल की बढ़ाने लगे ।। १ आ गई रात वो जब मुलाकात की। देखते ही हमें वो लजाने लगे ।। २ देख जबसे लिया यार मैनें सनम । क्या कहूँ की कदम लड़खड़ाने लगे ।। ३ हार कर ही सदा…

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  • Saath Lamhon ka
    कविताएँ

    साथ लम्हों का मिल जाए | Saath Lamhon ka

    ByAdmin May 20, 2024

    साथ लम्हों का मिल जाए ( Saath lamhon ka mil jaye ) साथ लम्हों का मिल जाए। चेहरा मेरा भी खिल जाए। मिल जाएगा चैन मुझे भी। मस्त बहारें मन को हर्षाए। जब तू चाले चाल मोरनी की। मन मयूरा झूम झूमकर गाए। बज उठे दिल की घंटियां भी। लबों पर मधुर मुस्कानें छाए। तेरा…

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  • खाली था दिल का जाम
    ग़ज़ल

    खाली था दिल का जाम | Ghazal Khali tha Dil ka Jaam

    ByAdmin May 20, 2024

    खाली था दिल का जाम ( Khali tha Dil ka Jaam )   रंगीनिये -हयात के मंज़र से भर गई बस इक नज़र मिली थी कि दिल में उतर गई प्यासों की प्यास और बढ़ा कर गुज़र गई लेकर सरापा-हुस्न के साग़र जिधर गई उसकी निगाहे-नाज़ बड़ा काम कर गई खाली था दिल का जाम…

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