• विश्व कविता दिवस | World Poetry Day

    विश्व कविता दिवस  ( World Poetry Day )   अल्फाज़ का जामा तो मैंने पहनाया था जज्बात को ,एहसासों को तो मैंने ही पिरोया था दिल से निकाल पन्नों पर तो मैंने उकेरा था तुझसे कैसे ये मेरे रूबरू हुये मेरे ही दिल में रहे और चोरी किये या था तुझको पता कि ये थे…

  • कविता कभी हँसाती कभी रुलाती | Kavita Kabhi Hasati

    कविता  ( Kavita )   कविता कभी हँसाती है, कविता कभी रुलाती है, सामाजिक कुरीतियों पर कविता प्रहार कराती है! कविता संवेदना लाती है, कविता वेदना दिखाती है, समाज को जागरूक करके कविता चेतना दर्शाती है। कविता प्रेम बरसाती है, कविता समर्पण जगाती है, प्रतिशोध की ज्वाला जला कविता अगन भड़काती है। कविता आत्ममंथन है,…

  • अधूरापन | Kavita Adhurapan

    अधूरापन ( Adhurapan )   कर लो कितनी है पूजा अर्चना नहा लो भले गंगाजल से सोच मगर मैली ही रही रहोगे दूर ही तुम कल के फल से से परिधान की चमक से व्यवहार में चमक आती नहीं कलुषित विचारों के साथ कभी बात सही समझ आती नहीं पढ़ना लिखना सब व्यर्थ है भर…

  • कैसा यह ज़माना | Kaisa yeh Zamana

    कैसा यह ज़माना ( Kaisa yeh Zamana )   देखो न अब आ गया है यह कैसा ज़माना, हर कोई जुटा है छिनने में दूसरों का दाना, काटके दरख़्तों को बनाया अपना बिछौना, बेघर कर छिन लिया परिंदों का आशियाना, सुबह घर से निकले तो शाम को लौटेंगे ही, घरका हश्र देख रुके कैसे उनका…

  • खेवनहार | Sansmaran Khevan Haar

    आज मैं एक विद्यालय में गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य जी सिगरेट के कस ले रहे थे। तब से दूसरे अध्यापक भी बीड़ी का बंडल निकाल कर बांटने लगते हैं। और फिर शुरू हो जाता है जाम का दौर। ऐसा लगता है कि भठ्ठे की चिमनी विद्यालय में लग गई हो। धुआं से पूरा प्रधानाचार्य कक्ष…

  • क्या खोया क्या पाया | Kya Khoya Kya Paya

    क्या खोया क्या पाया ( Kya Khoya Kya Paya )   उन गलियों से जब भी गुजरी आँखों मे अश्रुधार लिये सोच रही थी चलते-चलते कि—- यहाँ मैंने क्या खोया, क्या पाया है। पाकर सब कुछ फिर सब कुछ खोना क्या यही जिंदगी का फ़लसफ़ा है जब है फिर ये खोना या फिर पाना तो…

  • लवली | Kahani Lovely

    लवली कुछ गुमसुम सी बैठी है। उसे न जाने क्या हो गया है कि सारे घर में धमाल मचाने वाली किस सोच में डूबी है । मां को देखते ही प्रश्नों की झड़ी लगा देती है – अम्मा अम्मा आप क्यों मांग में सिंदूर लगाती हो ? मुझे क्यों नहीं लगाती ? हम कान क्यों…

  • होलिया में रंग कइसे बरसी | Holiya me

    होलिया में रंग कइसे बरसी?   सइयाँ जी हमार गइलन टर्की हो, होलिया में रंग कइसे बरसी। (4) केहू न केहू हमरे गलवा के रगरी, कब कै भरल बाटे हमरो ई गगरी। हमरो ई गगरी हो,हमरो ई गगरी, हमरो ई गगरी हो,हमरो ई गगरी, चोलिया से रंग कइसे छलकी हो, होलिया में रंग कइसे बरसी।…

  • मेरा अस्तित्व मेरी पहचान | Mera Astitva

    मेरा अस्तित्व मेरी पहचान ( Mera astitva meri pehchaan )   मेरा अस्तित्व मेरी पहचान, मेरा विश्वास मेरा अभिमान। मेरी हिम्मत हौसलों से डरते, बाधाएं आंधी और तूफान। मेरी धडकनें मेरी जान, सत्य सादगी है ईमान। मेरी कलम लिखती सदा, देश भक्ति स्वर राष्ट्रगान। मेरी सोच मेरे मन विचार, अपनापन और सदाचार। मेरे शब्दों में…

  • गीतों की गगरी | Geeton ki Gagari

    गीतों की गगरी ( Geeton ki Gagari ) गीतों की गगरी छलका कर,सर्वत्र सुधा बरसाता हूँ। अपने अधरों पर प्यास लिये, औरों की प्यास बुझाता हूँ।। मैं सोम-सुधा पीने वाला ,खाली है मेरा घट-प्याला । सजती रहती है नयनों में ,मेरे सपनों की मधुशाला । साँसों की तालों पर छेडूँ ,मधुरिम गीतों की स्वर माला…