• मां ब्रह्मचारिणी | Maa Brahmacharini

    मां ब्रह्मचारिणी ( Maa Brahmacharini )  ( 2 ) दूजा माँ का रूप है, ब्रह्मचारिणी जान। हस्त कमण्डलु घोर तप, निरत सघन जप- ध्यान।। ब्रह्मचारिणी मातु की, करें वंदना भक्त। पूज रहे माँ के चरण, लगा आलता रक्त।। कष्टों की बरसात में, भीग रही हर बार। माँ सिर पर छाया करो, आऊँ जब भी द्वार।।…

  • नवरात्रि | Navratri

    नवरात्रि ( Navratri )  उन्होंने नवरात्रि व्रत, बहुत नियम धर्म से निभाया, देवी का पूजन किया, सिंगार किया, आरती किया, आज अष्टमी को, कुंवारी कन्याओं के, पांव भी पखारे, तभी उनको पता लगा कि, बहूं के पेट में, फिर बेटी होने वाली है, फिर उन्होंने अखंड व्रत ले लिया, जब तक बच्ची का गर्भपात करवा…

  • धुआँ धुआँ | Dhua Dhua

    धुआँ-धुआँ होकर रह गईं धरती! ( नज़्म )    जंग का मैदान बनकर रह गईं धरती, लहू से लथपथ होकर रह गई धरती। थर्ड वर्ल्ड वार के मुहाने पे न पहुँचे दुनिया, बारूद का ढेर बनके रह गई धरती। अमन पसंद इधर भी हैं और उधर भी, सबका मुँह ताकती रह गईं धरती। शोलों को…

  • कर्म पथ | Karm Path

    कर्म पथ ( Karm Path )   जुड़ने की कोशिशों मे टूटा हूं कई बार अपनों के साथ होने मे छूटा हूं कई बार पहुंचकर भी ऊंचाई तक गिरा हूं कई बार फिर भी अभी हारा नही हूं कमजोर जरूर हूं,बेचारा नही हूं…. मरते देखा हूं कई बार अपनों के नाते ही स्वाभिमान को कर…

  • मां शैलपुत्री | Maa shailputri

    मां शैलपुत्री ( Maa shailputri )    पर्वतराज हिमालय के घर जन्मी मां शैलपुत्री, आदिशक्ति जगदम्बा का प्रथम रूप हिमराज की पुत्री। कठोर तपस्या करके शिव की बनी अर्धांगिनी, रूप अनुपम शांत स्वभाव की है ये स्वामिनी। श्वेत वस्त्र प्रिय इनको करती वृष की सवारी, हिमराज और मैना देवी की है ये दुलारी। कैलाश पर्वत…

  • मेरा वतन | Mera Watan

    मेरा वतन ( Mera watan )    गुलाबी सा बहुत मेरा वतन आज़म रहे इसकी सदा यूं ही फ़बन आज़म ख़ुदा से रोज़ करता हूँ दुआ मैं ये न हो दिल में किसी के भी दुखन आज़म अदावत के नहीं काँटें उगे दिल में मुहब्बत का रहे हर पल चलन आज़म फ़िदा मैं क्यों न…

  • अज़ब धोखा हुआ | Dhoka Shayari Hindi

    अज़ब धोखा हुआ ( Ajab dhoka hua )    कल, बुलंदी की तलब में रूह का सौदा हुआ ज़िन्दगी भारी हुई देखो अज़ब धोखा हुआ ॥   राह-ए-उल्फ़त में चले नीयत सदाक़त अर्श पर फिर तभी रुसवाइयों का भी उन्हें ख़द्शा हुआ  ॥   बढ़ रहे बेगार, मुफ्लिश सर- जमीं मक्तल हुई हिल गया रब,…

  • यही वर दो मां | Yahi Var do Maa

    यही वर दो मां   नव रूपों मे सज धज कर आज आई हो मां मेरी बस इतनी सी विनती भी सुन लेना मां नही चाहिए धन दौलत या सारा सम्मान मुझे सब जन के मन मे केवल मानवता भर देना मानव ही मानव का कर रहा संहार क्यों इतना भी बैर हृदय मे कैसे…

  • मां दुर्गा के प्रथम रूप | Maa Durga ke Pratham Roop

    मां दुर्गा के प्रथम रूप ( Maa durga ke pratham roop )    मां दुर्गा के प्रथम रूप पर, सारा जग बलिहारी शैलपुत्री मंगल आगमन, सर्वत्र आध्यात्म उजास । नवरात्र शुभ आरंभ बेला, परिवेश उमंग उल्लास । योग साधना श्री गणेश, साधक मूलाधार चक्र धारी । मां दुर्गा के प्रथम रूप पर, सारा जग बलिहारी।।…

  • लड़खड़ाये आज फिर | Ladkhadaye aaj Phir

    लड़खड़ाये आज फिर  ( Ladkhadaye aaj phir )    लड़खड़ाये आज फिर ये क्या हो गया। संभाल न पाया आज ये क्या हो गया। धीरज रहा न धर्म बचा बेचैनी सी छाई। स्वार्थी इंसां हुआ कैसी ये आंधी आई। टूटी माला आज फिर ये क्या हो गया। बिखर चले मोती फिर ये क्या हो गया।…