Prem ka Adhyatmik Mahatva

प्रेम का आध्यात्मिक महत्व | Prem ka Adhyatmik Mahatva par Kavita

प्रेम का आध्यात्मिक महत्व

( Prem ka adhyatmik mahatva ) 

 

प्रेम कृष्ण की लीला है प्रेम राधा का प्यार
प्रेम धुन तान बंसी की प्रेम है जग आधार

प्रेम में बंधी ये दुनिया प्रेम गीता का सार
प्रेम वश दौड़े आते सारे जग के करतार

प्रेम दीवानी मीरा थी कृष्ण भक्ति में नाची
कुदरत प्रेम धरा दर्शाती श्रंगार बहुत राची

द्वारिका नाथ सांवरा करुणासागर भगवान
द्रौपदी की लाज बचाई सखा सुदामा मान

वृंदावन में रास रचाकर प्रेम का किया संचार
ब्रज में होली हुई प्रेम की बरसे मधुर रसधार

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/kavita-tu-hi/

Similar Posts

  • कागज के पुतले मत फूंको | Kavita kaagaz ke putle mat funko

    कागज के पुतले मत फूंको ( Kaagaz ke putle mat funko )     कागज के पुतले मत फूंको मन का अंधियारा दूर करो। जो दंभ छिपाये बैठे हो वो अंतर्मन अभिमान चूर करो।   लूट खसोट बेईमानी काले कारनामों की भरमार। जालसाजी रिश्वतखोरी अब फैल रहा है भ्रष्टाचार।   अभिमान को नष्ट करो जो…

  • सबको मतदान करना पड़ेगा | Purnika Sabko Matdan Karna Padega

    सबको मतदान करना पड़ेगा   बात मानो हमारी सारी जनता। वोट डालने तो जाना पड़ेगा।। ये जो अधिकार सबको मिला है। यही कर्तव्य निभाना पड़ेगा।। चाहे लाखों हों काम वोट के दिन। पर समय तो निकालना पड़ेगा।। एक एक वोट रहता जरूरी। अपना मत दान देना पड़ेगा।। घर मोहल्ले में कोई ना छूटे। सबको मतदान…

  • साथ चलो | Kavita saath chalo

    साथ चलो ( Saath chalo )   हर हर हर हर महादेव के, नारे के संग साथ चलो। गंगा के गोमुख से लेकर, गंगा सागर तक साथ चलो।   काशी मथुरा और अयोध्या, तक निनाद का जाप करो। जबतक भारत पूर्ण समागम,ना हो तब तक साथ चलो।   काश्मीर अपनी है पर, गिलगित और गारों…

  • नवदुर्गा | Navdurga

    नवदुर्गा ( Navdurga )   नवदुर्गा के नौ रूपों को पूजे हैं संसार। मात  करतीं सबका कल्याण । सिंह सवारी वाली मैया ,आईं गज पे सवार।  मात करतीं जग का कल्याण।  प्रथम शैलपुत्री कहलातीं,  पिता हिमाचल के घर जनमीं।  द्वितीय ब्रह्मचारिणी हो माते, संयम नियम का पाठ पढ़ातीं।  माथे पर घंटा सा चंदा, चंद्रघंटा है…

  • मन हो जब | Poem man ho jab

    मन हो जब ( Man ho jab )   मन हो जब खोल लेना दरवाज़े आंखों के दिल के खड़ी दिखूंगी यूं ही इस पार फकीरन (जोगन) सी हाथ फैलाए रख देना कुछ लफ्ज़ महोब्बत के नफ़रत के रख लूंगी हाथ की लकीर समझ बिना मोल किये . . . इंतज़ार तो खत्म होगा… लेखिका…

  • व्याकुलता | Vyakulta

    व्याकुलता ( Vyakulta )   खोज लेती है धारा प्रवाह अपना आपसे सलाह लेती नहीं निगाहों में जिनके बसता हो सागर वो नदी नालों में कभी रुकते नहीं आदि से अनंत तक की यात्रा रहती है गतिमान सदैव ही ठहर सकते हैं भले मन या तन से आप आपकी कहानी कभी रुकती नहीं अन गिनत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *